#गिरिडीह #मजदूर_आंदोलन : पांच मजदूरों की छंटनी के खिलाफ धरना प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा।
गिरिडीह स्थित बालमुकुंद फैक्ट्री के समक्ष पांच मजदूरों की कथित अवैध छंटनी के विरोध में असंगठित मजदूर मोर्चा और भाकपा माले का अनिश्चितकालीन धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने खनन विभाग, अनुमंडल प्रशासन और जिला प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपते हुए फैक्ट्री प्रबंधन पर मजदूरों के अधिकारों के दमन का आरोप लगाया। धरना स्थल पर नेताओं ने अवैध बालू, पानी और पत्थर ढुलाई के मामलों की जांच की मांग भी उठाई। बड़ी संख्या में महिला और पुरुष मजदूरों की मौजूदगी ने आंदोलन को और मजबूत बनाया।
- बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ तीसरे दिन भी जारी रहा अनिश्चितकालीन धरना।
- खनन विभाग, अनुमंडल प्रशासन और जिला प्रशासन को सौंपा गया आवेदन।
- पूरन महतो ने आंदोलन स्थल पहुंचकर मजदूरों के समर्थन में दिया संबोधन।
- मसूदन कोल और किशोर राय ने मजदूरों से एकजुट होने की अपील की।
- राजेश सिन्हा ने उसरी नदी से अवैध बालू और पानी ढुलाई का लगाया आरोप।
- सैकड़ों महिला और पुरुष मजदूर धरना स्थल पर डटे रहे।
गिरिडीह में बालमुकुंद फैक्ट्री से बिना नोटिस पांच मजदूरों को निकाले जाने के विरोध में असंगठित मजदूर मोर्चा और भाकपा माले द्वारा चलाया जा रहा अनिश्चितकालीन धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। फैक्ट्री के बाहर मजदूरों और नेताओं ने प्रदर्शन करते हुए विभिन्न विभागों के खिलाफ नाराजगी जताई। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री प्रबंधन मजदूरों के अधिकारों का लगातार हनन कर रहा है और प्रशासन इस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रहा। धरना स्थल पर लगातार नारेबाजी होती रही और मजदूरों ने न्याय की मांग दोहराई। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में महिला मजदूरों की भागीदारी भी देखने को मिली।
प्रशासन और विभागों को सौंपा गया आवेदन
धरना के तीसरे दिन आंदोलनकारियों ने खनन विभाग, अनुमंडल प्रभारी और जिला प्रशासन को लिखित आवेदन सौंपा। प्रखंड सचिव मसूदन कोल और मोर्चा अध्यक्ष किशोर राय ने कहा कि मजदूरों को बिना नोटिस हटाना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है और प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।
धरना स्थल पर लगातार नारे लगाए गए कि:
“मजदूरी रखने वाले ठेकेदार को हाजिर करो, फैक्ट्री का जीएम शर्म करो।”
मजदूर नेताओं ने कहा कि जब तक निकाले गए मजदूरों को वापस काम पर नहीं लिया जाता और सात सूत्री मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
खनन और श्रम विभाग पर उठे सवाल
धरना को संबोधित करते हुए कन्हाई पांडेय ने कहा कि खनन विभाग, श्रम विभाग और प्रशासनिक सुस्ती के कारण ही फैक्ट्री प्रबंधन का मनोबल बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग समय पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
कन्हाई पांडेय ने कहा: “खनन, श्रम और कई विभाग की सुस्ती के कारण ही फैक्ट्री प्रबंधन का मनोबल बढ़ता जा रहा है।”
वहीं राजेश सिन्हा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसरी नदी से अवैध तरीके से बालू चोरी कर सीधे फैक्ट्री में पहुंचाया जाता है। उन्होंने कहा कि पिकेट थाना को जानकारी रहने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है।
राजेश सिन्हा ने कहा: “उसरी नदी से बालू चोरी कर डायरेक्ट फैक्ट्री में घुसाया जाता है। पत्थर और पानी भी अवैध तरीके से फैक्ट्री पहुंचाया जा रहा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती।”
उन्होंने सवाल उठाया कि जब अवैध गतिविधियों को रोकना संभव नहीं हो पा रहा तो पिकेट थाना की उपयोगिता क्या है।
माले नेता पूरन महतो ने दिया समर्थन
धरना प्रदर्शन को समर्थन देने अखिल भारतीय किसान महासभा के नेता और माले के वरिष्ठ नेता पूरन महतो भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि गिरिडीह में फैक्ट्रियों की मनमानी बढ़ती जा रही है और मजदूरों के हक-अधिकार को दबाया जा रहा है।
पूरन महतो ने कहा: “श्रम कार्यालय फैक्ट्री के सामने बौना साबित हो रहा है। मजदूरों की आवाज दबाई जा रही है और इसकी शिकायत श्रम मंत्री से की जाएगी।”
उन्होंने जनता से एकजुट होकर आंदोलन को और तेज करने की अपील की। साथ ही कहा कि यदि मजदूर संगठित नहीं हुए तो शोषण लगातार बढ़ता जाएगा।
मजदूरों से एकजुट होने की अपील
मोर्चा अध्यक्ष किशोर राय और प्रखंड सचिव मसूदन कोल ने मजदूरों से मोर्चा के साथ जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि अलग-थलग मजदूरों को आसानी से निशाना बनाया जा रहा है।
धरना स्थल पर खूबलाल राय, दीपक गोस्वामी, नवीन पांडेय, तुलसी तुरी, इम्तियाज अंसारी, लखन कोल, भीम कोल, दिलचंद कोल सहित कई नेताओं ने मजदूर हित में अपनी बातें रखीं।
महिला साथियों में निमिया देवी, ललिता देवी, सरिता देवी, कुसुम देवी, करनी देवी, जगिया देवी, थलमुनी देवी और सुगिया देवी सहित सैकड़ों महिला और पुरुष धरना स्थल पर मौजूद रहे।
सात सूत्री मांगों को लेकर जारी है आंदोलन
असंगठित मजदूर मोर्चा और भाकपा माले ने कहा कि पांच मजदूरों की छंटनी केवल एक मुद्दा नहीं है बल्कि मजदूर अधिकारों पर लगातार हो रहे हमले का हिस्सा है। आंदोलनकारियों ने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर मजदूरों को न्याय दिलाने की मांग की।
धरना के दौरान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। मजदूरों ने शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखने की बात कही।
न्यूज़ देखो: मजदूर अधिकारों की लड़ाई अब बड़ा सवाल
गिरिडीह में जारी यह आंदोलन केवल पांच मजदूरों की नौकरी का मामला नहीं बल्कि श्रमिक अधिकारों, प्रशासनिक जवाबदेही और औद्योगिक पारदर्शिता का बड़ा सवाल बनता जा रहा है। लगातार तीसरे दिन तक आंदोलन का जारी रहना यह दर्शाता है कि मजदूरों में नाराजगी गहरी है। यदि प्रशासन समय रहते निष्पक्ष जांच और समाधान की दिशा में पहल नहीं करता है तो यह विवाद और व्यापक रूप ले सकता है। अवैध खनन और संसाधनों के उपयोग के आरोपों की भी गंभीर जांच आवश्यक है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मजदूरों की आवाज दबे नहीं, न्याय की लड़ाई मजबूत बने
लोकतंत्र में मजदूरों की आवाज सबसे महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है। जब मेहनतकश लोगों के अधिकारों पर सवाल उठते हैं, तब समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। संगठित और शांतिपूर्ण आंदोलन सामाजिक बदलाव की ताकत बनते हैं। जरूरत है कि हर नागरिक श्रमिकों के सम्मान और न्यायपूर्ण व्यवस्था के पक्ष में अपनी भूमिका निभाए।
यदि आपके क्षेत्र में भी मजदूरों, किसानों या आम जनता से जुड़ी समस्याएं हैं तो उन्हें सामने लाना जरूरी है। अपनी राय कमेंट में जरूर दें, खबर को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें और जनहित की आवाज को मजबूत बनाएं।

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