
#देवघर #रक्तदान : समाहरणालय परिसर में रक्तदान शिविर का आयोजन, डीसी ने भ्रांतियां दूर कीं।
देवघर समाहरणालय परिसर में आयोजित रक्तदान शिविर में उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने 17वीं बार स्वयं रक्तदान कर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। मंगलवार को विकास भवन के समीप आयोजित इस शिविर का शुभारंभ डीसी के निर्देशानुसार किया गया। रक्तदान के माध्यम से उन्होंने न सिर्फ मानव सेवा का संदेश दिया, बल्कि रक्तदान से जुड़ी आम भ्रांतियों को भी खारिज किया। यह आयोजन जिले में स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
- देवघर समाहरणालय परिसर में रक्तदान शिविर का आयोजन।
- डीसी नमन प्रियेश लकड़ा ने 17वीं बार किया रक्तदान।
- रक्तदान से जुड़ी भ्रांतियों पर डीसी ने की स्पष्ट चर्चा।
- रक्तदान को बताया सेहत और सेवा दोनों के लिए लाभकारी।
- आम नागरिकों से नियमित रक्तदान की अपील।
देवघर में रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मंगलवार को समाहरणालय परिसर स्थित विकास भवन के समीप एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का शुभारंभ उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा के निर्देशानुसार किया गया। कार्यक्रम के दौरान डीसी ने स्वयं 17वीं बार रक्तदान कर उपस्थित लोगों को मानव सेवा के इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित किया।
उपायुक्त का यह कदम प्रशासनिक दायित्वों से आगे बढ़कर सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का उदाहरण माना जा रहा है। शिविर में अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों की मौजूदगी रही, जिन्होंने डीसी के इस प्रयास की सराहना की।
17वीं बार रक्तदान कर बने प्रेरणास्रोत
रक्तदान के बाद डीसी नमन प्रियेश लकड़ा ने कहा:
नमन प्रियेश लकड़ा ने कहा: “रक्तदान न केवल किसी की जिंदगी बचाने जैसी अनमोल खुशी देता है, बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।”
उन्होंने कहा कि रक्त की कमी से जूझ रहे मरीजों के लिए यह जीवनदायिनी साबित होता है। उनका मानना है कि यदि हर सक्षम व्यक्ति नियमित अंतराल पर रक्तदान करे, तो किसी भी मरीज को रक्त के अभाव में जान न गंवानी पड़े।
रक्तदान से जुड़ी भ्रांतियों पर खुलकर चर्चा
डीसी ने समाज में रक्तदान को लेकर फैली भ्रांतियों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आमतौर पर लोगों में यह गलत धारणा है कि रक्तदान करने से शरीर कमजोर हो जाता है या खून की कमी हो जाती है। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया:
डीसी ने कहा: “यह पूरी तरह मिथ्या है। रक्तदान के बाद शरीर में आवश्यक रक्त की आपूर्ति बहुत जल्द पुनः हो जाती है और इससे स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।”
उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक रूप से यह सिद्ध है कि रक्तदान से शरीर में नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण तेज होता है, जिससे स्वास्थ्य को लाभ पहुंचता है।
सेहत और सेवा दोनों का लाभ
उपायुक्त ने रक्तदान को एक ऐसा कार्य बताया, जिससे सेवा और स्वास्थ्य दोनों का लाभ मिलता है। उन्होंने कहा कि रक्तदान करने से जो आत्मसंतोष और मानसिक शांति मिलती है, वह किसी अन्य माध्यम से प्राप्त नहीं हो सकती। साथ ही यह हृदय और रक्त संचार से जुड़े स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है।
उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे स्वयं को स्वस्थ रखने और मानव सेवा के लिए नियमित रूप से रक्तदान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
प्रशासनिक पहल और सामाजिक संदेश
देवघर प्रशासन द्वारा इस तरह के शिविरों का आयोजन यह दर्शाता है कि सरकार केवल योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। डीसी का स्वयं रक्तदान करना आम लोगों के लिए एक मजबूत संदेश है कि यदि प्रशासन आगे बढ़कर उदाहरण पेश करे, तो समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।
शिविर में मौजूद लोगों ने कहा कि जब जिले के सर्वोच्च अधिकारी स्वयं रक्तदान करते हैं, तो इससे आम नागरिकों का डर और संकोच दूर होता है।
रक्तदाताओं के प्रति सम्मान
डीसी ने रक्तदान के प्रति समर्पित सभी रक्तदाताओं की सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग समाज के असली नायक हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की जान बचाने में योगदान देते हैं।
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग और रक्त संग्रहण टीम ने भी रक्तदान प्रक्रिया को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया।
न्यूज़ देखो: प्रशासन से समाज तक प्रेरणा की कड़ी
देवघर में डीसी द्वारा 17वीं बार रक्तदान करना यह साबित करता है कि नेतृत्व केवल निर्देश देने से नहीं, बल्कि स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करने से मजबूत होता है। रक्तदान को लेकर फैली भ्रांतियों को तोड़ना और लोगों को जागरूक करना आज की बड़ी जरूरत है। प्रशासन की यह पहल समाज में सकारात्मक सोच और सेवा भावना को बढ़ावा देती है। अब जरूरी है कि आम नागरिक भी इस संदेश को अपनाएं।
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रक्तदान से जीवनदान की ओर कदम
एक यूनिट रक्त किसी के लिए जीवन की नई उम्मीद बन सकता है। स्वस्थ समाज की पहचान यही है कि लोग एक-दूसरे के लिए आगे आएं। डीसी का यह प्रयास हमें याद दिलाता है कि सेवा का अवसर हर किसी के पास होता है।
अब आप भी आगे बढ़ें—रक्तदान को लेकर जागरूक बनें, इस खबर को साझा करें और दूसरों को भी इस महादान के लिए प्रेरित करें। आपकी एक पहल किसी की पूरी जिंदगी बदल सकती है।



