#हुसैनाबाद #पेयजलसंकट : खराब हैंडपंप और जलमीनार से ग्रामीणों को भारी परेशानी।
पलामू के हुसैनाबाद प्रखंड की बैरांव पंचायत में भीषण पेयजल संकट ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद दर्जनों हैंडपंप और जलमीनार खराब पड़े हैं। 43 डिग्री तापमान में ग्रामीण दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। समस्या को लेकर कई बार शिकायत के बावजूद समाधान नहीं होने से लोगों में आक्रोश है।
- बैरांव पंचायत में दर्जनों हैंडपंप व जलमीनार खराब पड़े हैं।
- करीब 43 डिग्री तापमान में पानी के लिए भटक रहे ग्रामीण।
- शादी-विवाह के मौसम में समस्या और हुई गंभीर।
- कई बार शिकायत के बावजूद प्रशासनिक उदासीनता का आरोप।
- रामराज मेहता ने जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
पलामू जिले के हुसैनाबाद प्रखंड अंतर्गत बैरांव पंचायत में इन दिनों भीषण जल संकट ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। सरकारी योजनाओं के तहत करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि पंचायत के अधिकांश हैंडपंप और जलमीनार खराब पड़े हैं। भीषण गर्मी के बीच ग्रामीणों को पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
भीषण गर्मी में बढ़ी परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में तापमान लगभग 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है। पानी की किल्लत के कारण लोगों को कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ रहा है।
गांव की महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिन्हें रोजाना घंटों समय पानी लाने में लगाना पड़ रहा है। इससे न केवल उनका समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है।
शादी-विवाह के मौसम में बढ़ी मुश्किलें
ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान समय में शादी-विवाह का सीजन चल रहा है, जिससे पानी की मांग और बढ़ गई है। ऐसे में घर में मेहमानों के आने पर पानी की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
लोगों का कहना है कि पहले से ही सीमित जलस्रोत थे, अब वे भी खराब होने के कारण स्थिति और खराब हो गई है।
करोड़ों खर्च, फिर भी व्यवस्था ध्वस्त
गौरतलब है कि 15वें वित्त आयोग के तहत पंचायतों के विकास और पेयजल व्यवस्था के लिए भारी राशि आवंटित की गई है। इसके बावजूद बैरांव पंचायत में बुनियादी सुविधाओं की ऐसी स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बरती गई है, जिसके कारण आज यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
न तो खराब हैंडपंपों की मरम्मत कराई गई और न ही बंद पड़े जलमीनारों को चालू किया गया। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
जनप्रतिनिधियों पर उठे सवाल
इस मामले में भाजपा नेता रामराज मेहता ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि लापरवाही के कारण पंचायतों में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
रामराज मेहता ने कहा: “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। जल्द से जल्द सभी खराब हैंडपंप और जलमीनारों की मरम्मत होनी चाहिए।”
आंदोलन की चेतावनी
लगातार बढ़ती परेशानी के बीच ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। लोगों का कहना है कि पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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बैरांव पंचायत की स्थिति यह दर्शाती है कि योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं होने पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद जनता तक उसका लाभ नहीं पहुंच पाता। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है, ताकि ऐसी समस्याओं का स्थायी समाधान हो सके। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
पानी है जीवन, इसे बचाना और उपलब्ध कराना हमारी जिम्मेदारी
पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए संघर्ष किसी भी समाज के लिए चिंताजनक है।
जरूरत है कि हम अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों और आवाज उठाएं।
प्रशासन से जवाब मांगना और समाधान सुनिश्चित कराना हर नागरिक का हक है।
आइए, मिलकर इस समस्या के समाधान के लिए आगे बढ़ें।
अपनी राय कमेंट में जरूर दें, इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और पानी जैसी जरूरी समस्या पर जागरूकता फैलाएं।

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