#केरसई #अंधविश्वासविरोध : प्रभात फेरी निकाल कर डायन प्रथा खत्म करने का आह्वान किया गया।
सिमडेगा जिले के केरसई में डायन बिसाही जैसी कुप्रथा के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया गया। +2 उच्च विद्यालय के छात्रों और शिक्षकों ने प्रभात फेरी निकालकर अंधविश्वास के खिलाफ संदेश दिया। कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर आयोजित हुआ। इस पहल को समाज में जागरूकता और महिला सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
- केरसई +2 उच्च विद्यालय में अंधविश्वास विरोधी जागरूकता अभियान आयोजित।
- डायन प्रथा उन्मूलन को लेकर छात्रों ने निकाली प्रभात फेरी।
- “अंधविश्वास मिटाओ, शिक्षा अपनाओ” जैसे नारों से किया जागरूक।
- ज्वेल टेटे व पीएलवी विष्णु प्रसाद सहित शिक्षक रहे शामिल।
- जिला विधिक सेवा प्राधिकार सिमडेगा के निर्देश पर कार्यक्रम आयोजित।
सिमडेगा जिले के केरसई प्रखंड में अंधविश्वास और कुरीतियों के खिलाफ एक प्रभावी जनजागरूकता अभियान चलाया गया। +2 उच्च विद्यालय केरसई में आयोजित इस कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों और शिक्षकों ने प्रभात फेरी निकालकर समाज को जागरूक करने का प्रयास किया। डायन बिसाही जैसी कुप्रथा के खिलाफ उठी यह आवाज क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है।
प्रभात फेरी से गूंजा जागरूकता का संदेश
विद्यालय परिसर से शुरू हुई प्रभात फेरी आसपास के गांवों और बस्तियों में पहुंची, जहां छात्र-छात्राओं ने जोशीले नारों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया। “डायन प्रथा बंद करो” और “अंधविश्वास मिटाओ, शिक्षा अपनाओ” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
इस दौरान विद्यार्थियों ने लोगों को बताया कि अंधविश्वास के कारण समाज में कई निर्दोष महिलाओं को प्रताड़ित किया जाता है, जो पूरी तरह अमानवीय और गैरकानूनी है।
डायन प्रथा को बताया सामाजिक अभिशाप
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने डायन बिसाही प्रथा को समाज के लिए एक बड़ा अभिशाप बताया। उन्होंने कहा कि इस कुप्रथा के कारण विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के साथ हिंसा और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
वक्ताओं ने कहा: “डायन प्रथा जैसी कुरीतियों को खत्म करने के लिए शिक्षा और जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।”
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी तरह के अंधविश्वास में न पड़ें और किसी भी विवाद की स्थिति में कानून का सहारा लें।
कानून और जागरूकता पर जोर
यह कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकार सिमडेगा के निर्देशानुसार आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना भी था।
अधिकारियों ने बताया कि डायन बिसाही के मामलों में कानून बेहद सख्त है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। इसलिए समाज को चाहिए कि वह ऐसे मामलों में चुप न रहे, बल्कि आवाज उठाए।
शिक्षकों और छात्रों की सक्रिय भागीदारी
इस अभियान में विद्यालय के प्रधान शिक्षक ज्वेल टेटे, पीएलवी विष्णु प्रसाद, सभी शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। सभी ने मिलकर समाज से अंधविश्वास खत्म करने और एक जागरूक समाज बनाने का संकल्प लिया।
छात्रों की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि नई पीढ़ी अब कुरीतियों के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने के लिए तैयार है।
न्यूज़ देखो: जागरूकता ही कुरीतियों के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार
केरसई में चला यह अभियान दिखाता है कि यदि शिक्षा और कानून की जानकारी लोगों तक पहुंचे, तो अंधविश्वास जैसी कुरीतियों को जड़ से खत्म किया जा सकता है। प्रशासन और विद्यालय का यह प्रयास सराहनीय है, लेकिन इसे निरंतर अभियान के रूप में चलाने की जरूरत है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अंधविश्वास छोड़ें, जागरूक समाज की ओर बढ़ें
समाज तभी आगे बढ़ेगा जब हम कुरीतियों को पीछे छोड़ेंगे।
डायन प्रथा जैसी सोच इंसानियत के खिलाफ है, इसे खत्म करना जरूरी है।
हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह जागरूक बने और दूसरों को भी जागरूक करे।
शिक्षा ही वह शक्ति है जो समाज को सही दिशा दिखाती है।
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