#सिमडेगा #ग्रामीणसमस्या : बीरकेरा में मूलभूत सुविधाओं के संकट पर इंटक नेता ने लिया जायजा।
सिमडेगा के बीरू पंचायत अंतर्गत बीरकेरा गांव में बिजली, पेयजल और टूटा पुल जैसी समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने इंटक नेता दिलीप तिर्की के समक्ष अपनी परेशानी रखी। करीब 130 परिवार लंबे समय से इन मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। दिलीप तिर्की ने मौके पर पहुंचकर समस्याओं का जायजा लिया और संबंधित विभागों के समक्ष मुद्दे उठाने का आश्वासन दिया। उन्होंने शीघ्र समाधान नहीं होने पर ग्रामीणों के साथ लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करने की बात कही।
- बीरू पंचायत के बीरकेरा गांव में बिजली, पानी और पुल की समस्या से ग्रामीण परेशान।
- करीब 130 परिवारों वाले गांव में सिर्फ 25 केवी ट्रांसफार्मर से हो रही बिजली आपूर्ति।
- 7 जलमीनार वर्षों से बंद, ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना।
- मुख्य मार्ग का टूटा पुल आवागमन में बाधा, लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही।
- इंटक नेता दिलीप तिर्की ने विभागीय अधिकारियों से समाधान का भरोसा दिलाया।
सिमडेगा प्रखंड के बीरू पंचायत अंतर्गत बीरकेरा गांव में ग्रामीणों ने लंबे समय से चली आ रही मूलभूत समस्याओं को लेकर अपनी आवाज उठाई है। गांव के लोगों ने इंटक नेता दिलीप तिर्की को क्षेत्र का भ्रमण कराकर बिजली, पेयजल और आवागमन से जुड़ी परेशानियों से अवगत कराया। ग्रामीणों का कहना है कि सुविधाओं के अभाव के कारण रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।
बिजली संकट से जूझ रहे ग्रामीण, क्षमता बढ़ाने की मांग
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में वर्तमान समय में केवल 25 केवी का ट्रांसफार्मर लगा हुआ है, जो आबादी और जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। कम क्षमता के कारण वोल्टेज की समस्या बनी रहती है और घरों में बिजली उपकरण ठीक से काम नहीं कर पाते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार शाम के समय पर्याप्त रोशनी नहीं मिलने से लोगों को परेशानी होती है। उन्होंने गांव की आवश्यकता को देखते हुए 100 केवीए ट्रांसफार्मर लगाने की मांग की है, ताकि बिजली आपूर्ति में सुधार हो सके।
वर्षों से बंद जलमीनारों से पेयजल संकट
बीरकेरा गांव में पेयजल व्यवस्था भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा गांव में कुल 7 जलमीनारों का निर्माण कराया गया था, लेकिन लंबे समय से सभी जलमीनार बंद पड़े हैं।
गर्मी के मौसम में पेयजल संकट और गंभीर हो जाता है। महिलाओं और बच्चों को पानी के लिए दूर-दराज के जलस्रोतों पर निर्भर होना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
टूटे पुल के कारण आवागमन प्रभावित
ग्रामीणों ने मुख्य मार्ग पर स्थित टूटे हुए पुल की समस्या भी प्रमुखता से उठाई। पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण गांव तक पहुंचने वाले वाहनों को कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि स्कूल, बाजार और अस्पताल जाने के लिए ग्रामीणों को तीन से चार किलोमीटर अतिरिक्त रास्ता तय करना पड़ता है। बरसात के समय स्थिति और कठिन हो जाती है, जिससे ग्रामीणों को सुरक्षा संबंधी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।
दिलीप तिर्की ने अधिकारियों के समक्ष उठाने का दिया भरोसा
ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने के बाद इंटक नेता दिलीप तिर्की ने कहा कि बीरकेरा गांव एक जागरूक और संगठित गांव है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2009 से प्रत्येक शनिवार गांव के लोग सामूहिक बैठक कर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते आ रहे हैं।
दिलीप तिर्की ने कहा कि इतने जागरूक गांव में भी लंबे समय से बिजली, पानी और सड़क जैसी सुविधाओं का अभाव चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सरकार गांवों के विकास की बात करती है, लेकिन कई स्थानों पर ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “ग्रामीणों की समस्याओं को संबंधित विभागों और जिला प्रशासन के समक्ष प्रमुखता से रखा जाएगा। ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाने, बंद जलमीनारों को चालू कराने और टूटे पुल के निर्माण के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।”
ग्राम सभा की भूमिका पर भी दिया जोर
दिलीप तिर्की ने ग्रामीणों को ग्राम सभा की मजबूती और उसके महत्व के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए ग्राम सभा एक महत्वपूर्ण माध्यम है और ग्रामीणों को इसके माध्यम से अपनी मांगों को मजबूती से रखने की आवश्यकता है।
उन्होंने अधिकारियों से मौके पर ही फोन के माध्यम से समस्याओं के समाधान को लेकर बातचीत की। संबंधित अधिकारियों ने आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
दिलीप तिर्की ने कहा कि यदि समय पर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो ग्रामीणों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा।
ग्रामीणों ने शीघ्र समाधान की उठाई मांग
बैठक के दौरान ग्राम सभा अध्यक्ष क्लेस्तुस डुंगडुंग, वार्ड सदस्य सिनकोमडुंग डुंग, सहायिका एबलिन कुल्लू, पूनम, बिनीता देवी, हेमंती देवी, बीना केरकेट्टा, फ्रिस्का केरकेट्टा, खरिस्तो दास किंडो, धनेश्वर साहू, अमृत डुंगडुंग, करमचंद साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
सभी ग्रामीणों ने एक स्वर में बिजली व्यवस्था सुधारने, पेयजल सुविधा बहाल करने और टूटे पुल का जल्द निर्माण कराने की मांग की। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि लगातार उठाई जा रही समस्याओं पर अब प्रशासन गंभीरता से पहल करेगा।
न्यूज़ देखो: ग्रामीण सुविधाओं की लड़ाई में जवाबदेही जरूरी
बीरकेरा गांव की स्थिति यह बताती है कि विकास योजनाओं का लाभ जमीन तक पहुंचना कितना महत्वपूर्ण है। बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं किसी भी क्षेत्र के विकास की पहली आवश्यकता होती हैं। संबंधित विभागों को केवल योजना निर्माण तक सीमित न रहकर उनके नियमित संचालन और रखरखाव पर भी ध्यान देना होगा।
ग्रामीणों की समस्याओं को जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा उठाना सकारात्मक पहल है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए विभागीय कार्रवाई जरूरी होगी। अब देखना होगा कि प्रशासन कितनी जल्द ट्रांसफार्मर, जलमीनार और पुल से जुड़ी समस्याओं पर ठोस कदम उठाता है।
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गांव की आवाज को मजबूती देने का संकल्प
बुनियादी सुविधाएं हर नागरिक का अधिकार हैं और जागरूक समाज ही बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बनता है। बीरकेरा जैसे गांवों की समस्याएं सामने आना जरूरी है ताकि जिम्मेदार विभाग समय रहते समाधान कर सकें।
आप भी अपने क्षेत्र की समस्याओं और सकारात्मक बदलावों से जुड़े रहें। अपनी राय कमेंट करें, इस खबर को जरूरतमंद लोगों तक साझा करें और जनहित के मुद्दों को मजबूती देने में सहयोग करें।

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