
#पलामू #कराटे_परीक्षा : जिला स्तरीय बेल्ट ग्रेडिंग टेस्ट में विभिन्न स्कूलों के खिलाड़ियों की सक्रिय भागीदारी।
पलामू जिला कराटे संघ के तत्वावधान में रेड़मा, बारालोटा स्थित द कराटे एकेडमी में जिला स्तरीय कराटे बेल्ट ग्रेडिंग टेस्ट का आयोजन किया गया। इस टेस्ट में जिले के विभिन्न विद्यालयों और प्रशिक्षण केंद्रों से आए सैकड़ों खिलाड़ियों ने भाग लिया। खिलाड़ियों ने काता, कुमिते और बेसिक तकनीकों के माध्यम से अपने कौशल का प्रदर्शन किया। आयोजन का उद्देश्य खिलाड़ियों के तकनीकी मूल्यांकन के साथ उन्हें उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना रहा।
- रेड़मा, बारालोटा स्थित द कराटे एकेडमी में जिला स्तरीय बेल्ट टेस्ट का आयोजन।
- पलामू जिला कराटे संघ के तत्वावधान में हुआ कार्यक्रम।
- संत मरियम स्कूल, ग्रीन वैली इंटरनेशनल स्कूल सहित कई संस्थानों के खिलाड़ियों की भागीदारी।
- खिलाड़ियों ने काता, कुमिते और बेसिक तकनीकों में किया प्रदर्शन।
- शिहान सुमित बर्मन सहित कई प्रशिक्षकों ने किया मूल्यांकन।
- आयोजन के बाद खिलाड़ियों और अभिभावकों में दिखा उत्साह।
पलामू जिले में कराटे खेल को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम पहल के रूप में जिला स्तरीय कराटे बेल्ट ग्रेडिंग टेस्ट का आयोजन किया गया। रेड़मा, बारालोटा स्थित द कराटे एकेडमी में हुए इस कार्यक्रम में जिले के अलग-अलग हिस्सों से आए सैकड़ों खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बेल्ट टेस्ट के माध्यम से खिलाड़ियों के तकनीकी ज्ञान, अनुशासन और आत्मविश्वास का आकलन किया गया। इस आयोजन ने न केवल खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर दिया, बल्कि अभिभावकों और खेल प्रेमियों का भी ध्यान आकर्षित किया।
जिले भर के खिलाड़ियों की रही भागीदारी
इस जिला स्तरीय कराटे बेल्ट ग्रेडिंग टेस्ट में पलामू जिले के विभिन्न विद्यालयों और प्रशिक्षण केंद्रों से जुड़े खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। संत मरियम स्कूल, द कराटे एकेडमी (मुख्य शाखा), बारालोटा ब्रांच, ग्रीन वैली इंटरनेशनल स्कूल तथा द कराटे एकेडमी, जपला ब्रांच के खिलाड़ियों की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।
खिलाड़ियों ने अलग-अलग आयु वर्ग और बेल्ट श्रेणियों में परीक्षा दी, जिससे आयोजन का स्तर और व्यापकता स्पष्ट हुई। बच्चों से लेकर किशोर वर्ग तक के खिलाड़ियों ने पूरे अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रस्तुति दी।
काता, कुमिते और तकनीकों में दिखा कौशल
बेल्ट ग्रेडिंग टेस्ट के दौरान खिलाड़ियों का मूल्यांकन काता, कुमिते और बेसिक कराटे तकनीकों के आधार पर किया गया। काता में खिलाड़ियों की संतुलन क्षमता, तकनीकी शुद्धता और एकाग्रता पर विशेष ध्यान दिया गया। वहीं कुमिते के दौरान खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया क्षमता, रणनीति और नियंत्रण को परखा गया।
बेसिक तकनीकों में पंच, किक, ब्लॉक और मूवमेंट की सटीकता को देखा गया। इन सभी अभ्यासों के माध्यम से खिलाड़ियों ने यह साबित किया कि नियमित प्रशिक्षण और अनुशासन से वे बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
अनुभवी प्रशिक्षकों ने किया मूल्यांकन
इस अवसर पर मुख्य कराटे प्रशिक्षक शिहान सुमित बर्मन की उपस्थिति कार्यक्रम की खास पहचान रही। उनके साथ जय गोबिंद, सेंसाई आकर्ष प्रताप, अमरेश मेहता, श्रीकांत सिंह तथा सेंसाई सौभाग्य सिद्धार्थ भी मौजूद रहे।
सभी प्रशिक्षकों ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बारीकी से देखा और निष्पक्ष मूल्यांकन किया। प्रशिक्षकों ने खिलाड़ियों को तकनीकी सुधार, फिटनेस और मानसिक मजबूती से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।
शिहान सुमित बर्मन ने कहा: “इस तरह के बेल्ट टेस्ट खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं और उन्हें अगले स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए मानसिक रूप से तैयार करते हैं।”
खिलाड़ियों को मिला आगे बढ़ने का मार्गदर्शन
बेल्ट ग्रेडिंग टेस्ट के दौरान प्रशिक्षकों ने केवल मूल्यांकन तक ही सीमित न रहते हुए खिलाड़ियों को आगे की तैयारी के लिए मार्गदर्शन भी दिया। उन्हें बताया गया कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए नियमित अभ्यास, अनुशासन और धैर्य कितना आवश्यक है।
कई खिलाड़ियों के लिए यह टेस्ट एक सीखने का अवसर साबित हुआ, जहां उन्होंने अपनी कमजोरियों को पहचाना और उन्हें सुधारने का संकल्प लिया।
अभिभावकों में भी दिखा उत्साह
आयोजन के सफल समापन के बाद खिलाड़ियों के साथ-साथ अभिभावकों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। अभिभावकों ने बच्चों के आत्मविश्वास और अनुशासन में आए सकारात्मक बदलाव की सराहना की।
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि इस तरह के आयोजन बच्चों को खेल के प्रति गंभीर बनाते हैं और उन्हें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना सिखाते हैं।
न्यूज़ देखो: खेल संस्कृति को मजबूत करता ऐसा आयोजन
पलामू में आयोजित यह जिला स्तरीय कराटे बेल्ट ग्रेडिंग टेस्ट बताता है कि जिले में खेल संस्कृति धीरे-धीरे मजबूत हो रही है। कराटे जैसे अनुशासित खेल बच्चों के शारीरिक विकास के साथ मानसिक मजबूती भी प्रदान करते हैं। ऐसे आयोजन खेल संघों और प्रशिक्षकों की सक्रिय भूमिका को दर्शाते हैं, जो खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। आने वाले समय में इससे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पलामू के खिलाड़ियों की पहचान और मजबूत होने की उम्मीद की जा सकती है।
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आत्मविश्वास और अनुशासन की राह पर बढ़ते कदम
खेल केवल जीत-हार का नाम नहीं, बल्कि यह जीवन को बेहतर दिशा देने का माध्यम है। कराटे जैसे खेल बच्चों को आत्मरक्षा, अनुशासन और सम्मान का पाठ पढ़ाते हैं।
इस तरह के आयोजनों से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और युवा पीढ़ी को सही मार्गदर्शन मिलता है।
अगर आपके आसपास भी ऐसे खेल आयोजन हो रहे हैं, तो बच्चों को उसमें भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें। अपनी राय हमारे साथ साझा करें, इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और खेल के प्रति जागरूकता फैलाने में सहयोग करें।



