
#मेदिनीनगर #विचार_गोष्ठी : लोकतंत्र की मजबूती के लिए सामाजिक एकता और जागरूकता पर जोर।
पलामू के मेदिनीनगर स्थित पेंशनर भवन में विभाजनकारी राजनीति पर एक महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में कई बुद्धिजीवियों ने लोकतंत्र और सामाजिक एकता पर अपने विचार रखे। मुख्य अतिथि हृदयानंद मिश्र ने नागरिकों की जागरूकता को आवश्यक बताया। वक्ताओं ने संविधान के मूल्यों को अपनाने पर बल दिया।
- पेंशनर भवन, कचहरी परिसर में विचार गोष्ठी आयोजित।
- हृदयानंद मिश्र ने नागरिक जागरूकता पर दिया जोर।
- कार्यक्रम की अध्यक्षता नंद किशोर पाठक ने की।
- श्याम नारायण सिंह ने सामाजिक समावेशिता पर बल दिया।
- कई वक्ताओं ने विभाजनकारी राजनीति का विरोध किया।
मेदिनीनगर, पलामू में लोक विचार मंच के तत्वावधान में “विभाजनकारी राजनीति भारतीय लोकतंत्र के लिए घातक” विषय पर एक महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पेंशनर भवन, कचहरी परिसर, डाल्टनगंज में आयोजित हुआ, जिसमें समाज और राजनीति से जुड़े कई प्रबुद्धजन शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य लोकतंत्र की मजबूती और सामाजिक एकता को लेकर जागरूकता फैलाना था।
अध्यक्षता और मुख्य अतिथि का संबोधन
कार्यक्रम की अध्यक्षता लोक विचार मंच के पलामू जिला अध्यक्ष नंद किशोर पाठक ने की। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हृदयानंद मिश्र ने अपने संबोधन में नागरिकों की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया।
हृदयानंद मिश्र ने कहा: “जब तक नागरिक जागरूक नहीं होंगे, तब तक विभाजनकारी नीति समाप्त नहीं होगी।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत की आत्मा उसकी विविधता और सह-अस्तित्व में निहित है, जिसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देना चाहिए।
लोकतंत्र और सामाजिक एकता पर जोर
कार्यक्रम के संयोजक और कांग्रेसी नेता श्याम नारायण सिंह ने अपने संबोधन में लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डाला।
श्याम नारायण सिंह ने कहा: “भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद भाईचारे, समावेशिता और सामाजिक न्याय पर टिकी हुई है।”
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक शक्तियां अल्पकालिक लाभ के लिए समाज को धर्म, जाति और भाषा के आधार पर बांटने का प्रयास कर रही हैं, जो देश के लिए चिंताजनक है।
अन्य वक्ताओं ने भी रखे विचार
कांग्रेसी नेता चंद्रशेखर शुक्ला ने कहा कि देश की आजादी और संविधान की मूल भावना सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की है। उन्होंने कहा कि विभाजनकारी राजनीति देश के विकास में बाधा उत्पन्न करती है।
वहीं अलख निरंजन चौबे ने अपने विचार रखते हुए कहा कि लोकतंत्र में विविधता स्वाभाविक है, लेकिन समाज को बांटकर राजनीतिक लाभ उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
अलख निरंजन चौबे ने कहा: “युवाओं को जागरूक होकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में आगे आना चाहिए।”
विभिन्न गणमान्य लोगों की उपस्थिति
इस कार्यक्रम में पलामू बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामदेव यादव, पेंशनर समाज के अध्यक्ष झुबल राम, शमीम अहमद लाइन, लोक विचार मंच गढ़वा जिला अध्यक्ष दीपमाला कुमारी, कुलदीप सिंह चेरो, अवधेश सिंह, रविंद्र चौबे, कृष्णा सिंह, परमानंद सिंह सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।
सभी वक्ताओं ने एक स्वर में सामाजिक एकता, भाईचारा और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने पर बल दिया।
एकता और अखंडता बनाए रखने का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने विभाजनकारी राजनीति का विरोध करते हुए देश की एकता और अखंडता को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
न्यूज़ देखो: लोकतंत्र की मजबूती के लिए जागरूक नागरिक जरूरी
मेदिनीनगर में आयोजित यह विचार गोष्ठी एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि लोकतंत्र केवल सरकार से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों से मजबूत होता है। जब समाज एकजुट रहेगा और संविधान के मूल्यों का पालन करेगा, तभी विभाजनकारी प्रवृत्तियों को रोका जा सकेगा। ऐसे आयोजनों से लोगों में जागरूकता बढ़ती है, लेकिन इसे व्यवहार में उतारना भी उतना ही जरूरी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक बनें, लोकतंत्र को मजबूत करें
लोकतंत्र की ताकत जनता में होती है और जनता की ताकत उसकी जागरूकता में। आज जरूरत है कि हम सभी मिलकर समाज में एकता, भाईचारा और संविधान के मूल्यों को अपनाएं।
आइए, हम जिम्मेदार नागरिक बनें और अपने देश की एकता और लोकतंत्र की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाएं।
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