
#मेदिनीनगर #ध्वनि_प्रदूषण : रामनवमी में तेज डीजे से लोगों ने स्वास्थ्य और शांति पर चिंता जताई।
मेदिनीनगर में रामनवमी के दौरान डीजे के अत्यधिक शोर को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी सामने आई है। वरदान चैरिटेबल ट्रस्ट की सचिव शर्मिला वर्मा ने प्रशासन से ध्वनि सीमा तय करने या डीजे पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि तेज आवाज के कारण लोग बीमार पड़ रहे हैं और जानवरों पर भी इसका असर पड़ रहा है। यह मुद्दा अब सामाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बनता जा रहा है।
- मेदिनीनगर में रामनवमी के दौरान तेज डीजे से लोगों में नाराजगी।
- शर्मिला वर्मा, सचिव वरदान चैरिटेबल ट्रस्ट ने उठाई आवाज।
- डीजे की तेज ध्वनि से बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग प्रभावित।
- कई घरों में कांच टूटने और आर्थिक नुकसान की शिकायत।
- पालतू जानवरों पर भी पड़ा असर, दहशत में खाना-पीना छोड़ा।
- प्रशासन से ध्वनि सीमा तय करने या पूर्ण प्रतिबंध की मांग।
मेदिनीनगर में रामनवमी के अवसर पर जहां एक ओर श्रद्धा और उत्सव का माहौल था, वहीं दूसरी ओर डीजे के तेज शोर को लेकर विवाद और चिंता भी सामने आई। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने आरोप लगाया कि डीजे की कर्कश आवाज ने त्योहार की पारंपरिक गरिमा को प्रभावित किया है। इस मुद्दे को लेकर अब प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग की जा रही है।
पारंपरिक उत्सव से आधुनिक शोर तक
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले रामनवमी जैसे त्योहारों में बैंड-बाजे और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुन पर शोभायात्राएं निकलती थीं। हजारों की संख्या में पुरुष, महिलाएं और बच्चे अपने घरों से निकलकर इस उत्सव का आनंद लेते थे। लेकिन अब डीजे के बढ़ते चलन ने इस पारंपरिक स्वरूप को बदल दिया है, जिससे शांति और सौहार्द प्रभावित हो रहा है।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा गंभीर असर
तेज ध्वनि के कारण कई लोगों के बीमार पड़ने की शिकायत सामने आई है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार व्यक्तियों के लिए यह स्थिति अधिक गंभीर हो जाती है। कई परिवारों ने बताया कि उन्हें घरों में रहना मुश्किल हो गया, जबकि कुछ लोगों को अस्पताल तक जाना पड़ा।
शर्मिला वर्मा ने कहा: “त्योहार खुशियों का प्रतीक होता है, लेकिन अगर लोग बीमार पड़ जाएं और डर के माहौल में जीएं, तो यह चिंताजनक है।”
आर्थिक नुकसान और भय का माहौल
रिपोर्ट के अनुसार, डीजे की अत्यधिक आवाज से कई घरों की खिड़कियों के कांच टूट गए, जिससे लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इसके अलावा, पालतू जानवरों में भी डर और तनाव देखा गया, जिन्होंने खाना-पीना तक छोड़ दिया। कुछ लोगों को शोर से बचने के लिए अस्थायी रूप से अन्य स्थानों पर शरण लेनी पड़ी।
प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग
शर्मिला वर्मा और अन्य नागरिकों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि या तो डीजे की आवाज की एक सीमा तय की जाए या फिर त्योहारों में इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। उनका कहना है कि पारंपरिक वाद्य यंत्रों को बढ़ावा देकर शांतिपूर्ण और सुरक्षित वातावरण में त्योहार मनाया जा सकता है।
लापरवाह ड्राइविंग और नशाखोरी पर भी चिंता
त्योहार के दौरान कुछ युवाओं द्वारा नशे में गाड़ी चलाने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे सड़क सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है। लोगों ने प्रशासन से इस पर भी सख्ती से कार्रवाई करने की मांग की है ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
न्यूज़ देखो: उत्सव में संतुलन जरूरी
मेदिनीनगर में उठी यह आवाज एक बड़े सामाजिक मुद्दे की ओर इशारा करती है, जहां परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है। त्योहारों की खुशियां तभी सार्थक हैं, जब वे सभी के लिए सुरक्षित और सुखद हों। प्रशासन को इस दिशा में ठोस नीति बनानी होगी ताकि ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण हो सके और आमजन को राहत मिल सके। साथ ही, समाज को भी जागरूक होकर जिम्मेदारी निभानी होगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जिम्मेदार बनें, सुरक्षित उत्सव मनाएं
त्योहार हमारे जीवन में खुशियां और एकता का संदेश लेकर आते हैं, लेकिन यह जरूरी है कि हम इन्हें जिम्मेदारी के साथ मनाएं। तेज शोर, लापरवाही और असंवेदनशीलता न केवल दूसरों के लिए परेशानी बनती है, बल्कि पूरे समाज के लिए खतरा भी पैदा करती है।
आइए, हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि पारंपरिक मूल्यों को बनाए रखते हुए शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाएंगे। प्रशासन के नियमों का पालन करेंगे और दूसरों की सुविधा का भी ध्यान रखेंगे।
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