
#महुआडांड़ #जल_संकट : प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में खराब जलमीनार और चापाकलों के कारण लोगों को पानी के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
महुआडांड़ प्रखंड में गर्मी की शुरुआत के साथ ही पेयजल संकट गहराने लगा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 60 प्रतिशत जलमीनार खराब पड़े हैं, जबकि 100 से अधिक चापाकल भी बंद हालत में हैं। इससे कई गांवों में लोगों को शुद्ध पानी के लिए भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
- महुआडांड़ प्रखंड में पेयजल संकट गहराया।
- करीब 60 प्रतिशत जलमीनार खराब पड़ी।
- 100 से अधिक चापाकल बंद हालत में।
- ग्रामीणों को पानी के लिए दूर-दराज जाना पड़ रहा।
- लोगों ने प्रशासन से जल्द मरम्मत की मांग की।
महुआडांड़, लातेहार। प्रखंड में गर्मी की शुरुआत के साथ ही पेयजल संकट गंभीर होता जा रहा है। कई गांवों में जलमीनार और चापाकल खराब होने के कारण लोगों को शुद्ध पानी के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार महुआडांड़ प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 60 प्रतिशत जलमीनार खराब पड़े हैं। इसके अलावा 100 से अधिक चापाकल भी बंद हालत में हैं, जिससे पेयजल व्यवस्था प्रभावित हो गई है।
पानी के लिए बढ़ी ग्रामीणों की परेशानी
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई जलमीनार और चापाकल महीनों से खराब पड़े हैं, लेकिन उनकी मरम्मत नहीं कराई गई है।
गर्मी बढ़ने के साथ ही पानी की मांग भी बढ़ गई है। ऐसे में जलस्रोतों के बंद रहने से लोगों को काफी कठिनाई हो रही है और कई गांवों के लोग दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाने को मजबूर हैं।
समय पर मरम्मत नहीं होने से बढ़ा संकट
ग्रामीणों के अनुसार यदि खराब पड़े जलमीनार और चापाकलों की समय पर मरम्मत कर दी जाती तो आज यह स्थिति नहीं बनती।
लोगों का कहना है कि गर्मी के मौसम में पानी की समस्या हर साल सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
प्रशासन से की गई कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि खराब पड़े जलमीनारों और चापाकलों की जल्द मरम्मत कराई जाए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो आने वाले दिनों में महुआडांड़ में जल संकट और गंभीर हो सकता है।
न्यूज़ देखो: पानी जैसी बुनियादी जरूरत पर ध्यान जरूरी
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था जीवन की सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक है। जलस्रोतों के खराब होने से लोगों की दैनिक जिंदगी पर सीधा असर पड़ता है।
समय रहते समाधान ही बनेगा राहत का रास्ता
पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
स्थायी समाधान और नियमित मरम्मत से ही जल संकट को रोका जा सकता है।
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