अबुआ आवास योजना में दोहरी लाभुकता का खुलासा, बरवाडीह में मुखिया समेत तीन लोगों पर 80 हजार की वसूली

अबुआ आवास योजना में दोहरी लाभुकता का खुलासा, बरवाडीह में मुखिया समेत तीन लोगों पर 80 हजार की वसूली

author Akram Ansari
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#बरवाडीह #अबुआआवासगड़बड़ी : पहले पीएम आवास मिलने के बावजूद दोबारा स्वीकृत हुआ आवास।

लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड में अबुआ आवास योजना में अनियमितता सामने आने के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। केचकी पंचायत में एक लाभुक को पहले प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलने के बावजूद दोबारा अबुआ आवास योजना स्वीकृत कर दी गई थी। मामले की जांच के बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी ने पंचायत के मुखिया, तत्कालीन पंचायत सचिव और आवास मित्र पर कुल 80 हजार रुपये की वसूली का आदेश जारी किया है। संबंधित सभी लोगों को तीन दिनों के भीतर राशि जमा करने का निर्देश दिया गया है।

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  • बरवाडीह प्रखंड में अबुआ आवास योजना में अनियमितता का मामला सामने आया।
  • पहले PMAY-G का लाभ मिलने के बावजूद दोबारा स्वीकृत हुआ आवास।
  • केचकी पंचायत के मुखिया, पंचायत सचिव और आवास मित्र पर कार्रवाई।
  • तीनों पर कुल 80 हजार रुपये की राशि अधिरोपित की गई।
  • बीडीओ कार्यालय ने तीन दिनों के भीतर राशि जमा करने का निर्देश दिया।
  • तय समय में राशि जमा नहीं होने पर नियमसंगत कार्रवाई की चेतावनी।

लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड में अबुआ आवास योजना को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई की गई है। योजना में कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी कार्यालय ने केचकी पंचायत के मुखिया समेत तीन लोगों पर कुल 80 हजार रुपये की राशि अधिरोपित की है। प्रशासन का आरोप है कि एक लाभुक को पहले प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का लाभ मिलने के बावजूद दोबारा अबुआ आवास योजना का लाभ दिलाया गया। मामले को गंभीर मानते हुए जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

प्रखंड विकास पदाधिकारी कार्यालय से जारी पत्रांक 783 दिनांक 21 मई 2026 में इस पूरे मामले का उल्लेख किया गया है। प्रशासन ने तीन दिनों के भीतर राशि जमा करने का निर्देश दिया है और समय सीमा के बाद नियमसंगत कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

पहले पीएम आवास, फिर अबुआ आवास योजना का लाभ

जांच में सामने आया कि केचकी पंचायत निवासी श्रीमती लाखो देवी, पति जयराम राम को वित्तीय वर्ष 2016-17 में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत पहले ही आवास का लाभ मिल चुका था।

इसके बावजूद अभिलेख सत्यापन और जियोटैंगिंग की प्रक्रिया के दौरान संबंधित कर्मियों द्वारा दोबारा अबुआ आवास योजना के तहत लाभ स्वीकृत कर दिया गया। प्रशासनिक दस्तावेजों के अनुसार, अबुआ आवास योजना के तहत लाभुक का आईडी 2595919 है, जबकि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का आईडी JH1514864 बताया गया है।

दो किस्तों में जारी हुई 80 हजार रुपये की राशि

योजना स्वीकृत होने के बाद लाभुक को दो किस्तों में कुल 80 हजार रुपये की राशि का भुगतान भी कर दिया गया। बाद में जांच के दौरान दोहरी लाभुकता का मामला सामने आया, जिसके बाद प्रशासन ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए कार्रवाई शुरू की।

अधिकारियों का कहना है कि योजना के क्रियान्वयन के दौरान दस्तावेजों की सही तरीके से जांच नहीं की गई, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई।

तीन लोगों पर तय की गई जिम्मेदारी

मामले में प्रशासन ने केचकी पंचायत के मुखिया, तत्कालीन पंचायत सचिव और आवास मित्र को जिम्मेदार मानते हुए राशि अधिरोपित की है।

जारी आदेश के अनुसार:

  • मुखिया बुदेश्वर सिंह पर 30 हजार रुपये।
  • तत्कालीन पंचायत सचिव सत्येन्द्र प्रसाद सिंह पर 30 हजार रुपये।
  • आवास मित्र उमेश कुमार यादव पर 20 हजार रुपये।

तीनों को निर्धारित समय सीमा के भीतर राशि प्रखंड नजारत में जमा करने का निर्देश दिया गया है।

बीडीओ कार्यालय की ओर से जारी निर्देश में कहा गया: “निर्धारित अवधि के भीतर राशि जमा नहीं करने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमसंगत कार्रवाई की जाएगी।”

प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद पंचायत स्तर पर योजनाओं की निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि दस्तावेजों की सही तरीके से जांच की जाती तो दोहरी लाभुकता जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए लाभुकों के डेटा सत्यापन की प्रक्रिया और मजबूत की जाए। साथ ही योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की भी आवश्यकता बताई जा रही है।

योजनाओं में पारदर्शिता जरूरी

ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित आवास योजनाएं गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। ऐसे में योजनाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न केवल सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि वास्तविक लाभुकों को भी प्रभावित करती है।

प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अब इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। लोगों की नजर इस बात पर भी है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर राशि जमा होती है या नहीं।

न्यूज़ देखो: योजनाओं में लापरवाही पर जवाबदेही तय होना जरूरी

सरकारी योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक लाभ पहुंचाना होता है, लेकिन निगरानी में लापरवाही पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर देती है। बरवाडीह में सामने आया यह मामला दिखाता है कि दस्तावेज सत्यापन और योजना क्रियान्वयन में छोटी चूक भी बड़ी अनियमितता का रूप ले सकती है। प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन जरूरी यह भी है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक रहें, योजनाओं में पारदर्शिता की मांग उठाएं

सरकारी योजनाएं जनता के अधिकार और विकास से जुड़ी होती हैं।
इन योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
यदि कहीं गड़बड़ी दिखे तो आवाज उठाना लोकतांत्रिक जागरूकता का हिस्सा है।
जागरूक नागरिक ही बेहतर व्यवस्था की नींव मजबूत करते हैं।

अपने क्षेत्र की योजनाओं और विकास कार्यों पर नजर बनाए रखें।
इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में दें और पारदर्शी व्यवस्था की मांग को मजबूत बनाएं।

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Written by

बरवाडीह, लातेहार

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