पंजाब में काम कर रहे बेटे को वापस बुलाने के लिए बुजुर्ग माता पिता ने एसपी से लगाई गुहार

पंजाब में काम कर रहे बेटे को वापस बुलाने के लिए बुजुर्ग माता पिता ने एसपी से लगाई गुहार

author Shivnandan Baraik
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#बानो #परिवार_समस्या : आर्थिक और स्वास्थ्य संकट से जूझ रहे माता पिता ने बेटे को घर बुलाने की मांग की।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड के एक बुजुर्ग दंपति ने अपने बेटे को वापस घर बुलाने के लिए पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई है। बेटा पिछले पांच वर्षों से पंजाब में काम कर रहा है और परिवार की आर्थिक व स्वास्थ्य स्थिति खराब होने के बावजूद घर नहीं लौट पाया है। इस मामले ने प्रवासी मजदूरों और परिवारों के बीच बढ़ती दूरी की समस्या को उजागर किया है।

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  • बानो प्रखंड के एल्ला जितिया टोली निवासी झलकु स्वांसी ने एसपी को दिया ज्ञापन।
  • पांच साल से पंजाब में काम कर रहा बेटा अनिल स्वांसी, घर नहीं लौटा।
  • आर्थिक तंगी और खराब स्वास्थ्य से जूझ रहे बुजुर्ग माता पिता।
  • मुखिया सोमारी कैथवार और महाबुवाग थाना को भी दी गई थी सूचना।
  • कोई पहल नहीं होने पर पहुंचे एसपी श्रीकांत सुरेश राव खोटरे के पास।
  • बेटे ने फोन पर कहा – दो माह में घर लौटने का किया वादा

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड अंतर्गत सोय पंचायत के एल्ला जितिया टोली गांव का एक परिवार इन दिनों गहरी चिंता और असहाय स्थिति से गुजर रहा है। बुजुर्ग माता-पिता अपने बेटे के घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं, जो पिछले पांच वर्षों से पंजाब में काम कर रहा है। बेटे के न लौटने और अपनी बिगड़ती आर्थिक एवं स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्होंने अब प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।

एसपी को ज्ञापन देकर लगाई गुहार

ग्राम एल्ला जितिया टोली निवासी झलकु स्वांसी ने अपने पुत्र अनिल स्वांसी को घर वापस बुलाने के लिए सिमडेगा के पुलिस अधीक्षक श्रीकांत सुरेश राव खोटरे को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि उनका बेटा करीब पांच साल पहले रोजगार की तलाश में पंजाब गया था और तब से अब तक वापस नहीं लौटा है।

बुजुर्ग पिता का कहना है कि अब उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है और शारीरिक स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता। ऐसे में बेटे की जरूरत पहले से अधिक महसूस हो रही है।

पंचायत स्तर पर भी की गई थी पहल

परिजनों के अनुसार, जब बेटे से बार-बार घर लौटने की अपील के बावजूद कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला, तो उन्होंने पंचायत स्तर पर मदद की कोशिश की। इस संबंध में पंचायत की मुखिया सोमारी कैथवार को पूरी जानकारी दी गई थी।

इसके बाद महाबुवाग थाना प्रभारी को भी सूचित कर बेटे को वापस लाने के लिए पहल करने का अनुरोध किया गया था। हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी, जिससे परिवार को निराशा हाथ लगी और अंततः उन्हें एसपी के पास जाना पड़ा।

पंजाब में काम कर रहा है अनिल स्वांसी

दूसरी ओर, पंजाब में काम कर रहे अनिल स्वांसी ने फोन पर बताया कि वह मालूपुर, तहसील शाहकोट, जिला जालंधर में कार्यरत है और वहां उसे किसी प्रकार की परेशानी नहीं है।

अनिल स्वांसी ने कहा: “मैं यहां काम कर रहा हूं, कोई दिक्कत नहीं है। मालिक छुट्टी देगा तो जरूर घर जाऊंगा और परिवार की स्थिति को देखते हुए अगले दो महीने में घर आने की कोशिश करूंगा।”

उसके इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि वह अपनी स्थिति से संतुष्ट है, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों और माता-पिता की स्थिति को भी समझ रहा है।

प्रवासी मजदूरी और पारिवारिक दूरी का असर

यह मामला केवल एक परिवार की समस्या नहीं है, बल्कि यह उस बड़ी सामाजिक सच्चाई को सामने लाता है, जिसमें रोजगार के लिए बाहर गए लोग अपने परिवारों से दूर हो जाते हैं। खासकर बुजुर्ग माता-पिता के लिए यह दूरी मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की परेशानी का कारण बनती है।

स्थानीय स्तर पर रोजगार के सीमित अवसरों के कारण युवा वर्ग बाहर जाने को मजबूर है, जिससे परिवारों में भावनात्मक दूरी बढ़ती जा रही है।

प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

परिवार का कहना है कि उन्होंने पहले ही स्थानीय स्तर पर प्रशासन को जानकारी दी थी, लेकिन समय पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यदि प्रारंभिक स्तर पर पहल की जाती, तो शायद उन्हें एसपी तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

अब देखना यह होगा कि एसपी स्तर पर इस मामले में क्या कार्रवाई होती है और क्या बुजुर्ग माता-पिता को जल्द अपने बेटे से मिलने का अवसर मिल पाता है।

न्यूज़ देखो: प्रवासी मजदूरी की मजबूरी और बुजुर्गों की बढ़ती पीड़ा

यह घटना बताती है कि रोजगार की तलाश में घर से दूर जाना कई बार परिवारों के लिए भावनात्मक संकट बन जाता है। प्रशासन को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता दिखाते हुए परिवारों की मदद के लिए ठोस व्यवस्था करनी चाहिए। क्या भविष्य में ऐसे मामलों के लिए कोई स्थायी समाधान निकलेगा, यह एक बड़ा सवाल है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

परिवार की जिम्मेदारी समझें और अपनों के साथ जुड़ाव बनाए रखें

जीवन की भागदौड़ में हम अक्सर अपने परिवार और उनकी जरूरतों को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन याद रखें, माता-पिता का सहारा बनना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उनके कठिन समय में साथ देना ही सच्ची सफलता है।

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Written by

बानो, सिमडेगा

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