गढ़ाटोली में हाथियों का तांडव, तीन घर क्षतिग्रस्त, झामुमो केंद्रीय सदस्य फिरोज अली ने पीड़ित परिवारों से की मुलाकात

गढ़ाटोली में हाथियों का तांडव, तीन घर क्षतिग्रस्त, झामुमो केंद्रीय सदस्य फिरोज अली ने पीड़ित परिवारों से की मुलाकात

author Birendra Tiwari
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#सिमडेगा #हाथी_आतंक : गढ़ाटोली गांव में हाथियों के हमले से ग्रामीण दहशत में, राहत व मुआवजे की मांग।

सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड अंतर्गत बरसलोया पंचायत के गढ़ाटोली गांव में हाथियों के झुंड ने घुसकर भारी उत्पात मचाया, जिससे तीन ग्रामीणों के घर क्षतिग्रस्त हो गए। घटना के बाद पूरे गांव में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। सूचना मिलते ही झामुमो केंद्रीय समिति सदस्य फिरोज अली ने गांव पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और राहत सामग्री वितरित की। उन्होंने प्रशासन से त्वरित मुआवजा और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है।

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  • गढ़ाटोली गांव में हाथियों के झुंड ने मचाया उत्पात।
  • हाथियों के हमले में तीन घर क्षतिग्रस्त, घरेलू सामान नष्ट।
  • झामुमो केंद्रीय समिति सदस्य फिरोज अली ने किया दौरा।
  • पीड़ित परिवारों के बीच कंबल का वितरण
  • प्रशासन से मुआवजा और सुरक्षा उपाय की मांग।
  • वन विभाग से स्थायी समाधान की अपील।

सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड अंतर्गत बरसलोया पंचायत के गढ़ाटोली गांव में हाथियों के आतंक ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। बीते दिनों हाथियों के एक झुंड ने गांव में घुसकर जमकर उत्पात मचाया, जिससे तीन ग्रामीण परिवारों के घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। घरों की दीवारें और छत टूट गईं, वहीं घरेलू सामान भी नष्ट हो गया। अचानक हुई इस घटना से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और लोग रात के समय अपने घरों में रहने से डर रहे हैं।

हाथियों के हमले से ग्रामीणों को भारी नुकसान

ग्रामीणों के अनुसार, देर रात हाथियों का झुंड जंगल से निकलकर गांव में प्रवेश कर गया। हाथियों ने पहले खेतों और फिर रिहायशी इलाकों में नुकसान पहुंचाया। तीन घरों को पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया गया, जिससे संबंधित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए। गनीमत रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन आर्थिक क्षति काफी अधिक बताई जा रही है।

सूचना मिलते ही झामुमो नेता पहुंचे गांव

घटना की जानकारी मिलते ही झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के जिला अध्यक्ष अनिल कंडुलना के निर्देश पर झामुमो केंद्रीय समिति सदस्य फिरोज अली गढ़ाटोली गांव पहुंचे। उन्होंने हाथियों से प्रभावित परिवारों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं और हालात का जायजा लिया। ठंड के मौसम को देखते हुए फिरोज अली ने पीड़ित परिवारों के बीच कंबल का वितरण किया, जिससे उन्हें कुछ राहत मिल सके।

हरसंभव सहायता का भरोसा

पीड़ित परिवारों से बातचीत के दौरान फिरोज अली ने कहा:

“हाथियों के आतंक से ग्रामीणों को जो नुकसान हुआ है, वह बेहद गंभीर है। पार्टी की ओर से पीड़ितों को हरसंभव सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा।”

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए और गांव में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

पार्टी कार्यकर्ताओं की रही मौजूदगी

इस मौके पर झामुमो के प्रखंड सचिव बीरीश डुंगडुंग, एल्विन समद सहित अन्य पार्टी कार्यकर्ता भी मौजूद थे। सभी ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें ढांढस बंधाया और भरोसा दिलाया कि इस समस्या को लेकर प्रशासनिक स्तर पर आवाज उठाई जाएगी।

ग्रामीणों में भय का माहौल

हाथियों के हमले के बाद गढ़ाटोली गांव के ग्रामीण खासे डरे हुए हैं। लोगों का कहना है कि आए दिन हाथियों का झुंड आसपास के जंगलों से निकलकर गांव की ओर आ जाता है, जिससे जान-माल का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि बच्चों और बुजुर्गों को लेकर सबसे अधिक चिंता है, क्योंकि रात के समय अचानक हाथियों का आ जाना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

वन विभाग से ठोस कदम उठाने की मांग

ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों के आतंक से निजात दिलाने के लिए ठोस और स्थायी कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि सिर्फ अस्थायी उपायों से समस्या का समाधान नहीं होगा। हाथियों के मूवमेंट पर नजर रखने, जंगल और गांव के बीच सुरक्षित दूरी बनाने तथा चेतावनी व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है।

मानव–वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती चुनौती

यह घटना एक बार फिर मानव–वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को उजागर करती है। झारखंड के कई जिलों में हाथियों का गांवों में प्रवेश आम होता जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में भोजन और पानी की कमी, साथ ही मानव बस्तियों का विस्तार इस समस्या को और बढ़ा रहा है।

न्यूज़ देखो: हाथी आतंक पर स्थायी समाधान जरूरी

गढ़ाटोली की घटना बताती है कि हाथियों का आतंक अब केवल वन क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रिहायशी इलाकों के लिए भी बड़ा खतरा बन चुका है। प्रशासन और वन विभाग को मिलकर दीर्घकालिक रणनीति बनाने की जरूरत है, ताकि ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सुरक्षा और संवेदनशीलता की जरूरत

ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग पहले ही कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
हाथियों के आतंक से प्रभावित परिवारों को समय पर मुआवजा और सुरक्षा मिलना जरूरी है।
इस खबर पर अपनी राय साझा करें, इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और जिम्मेदार संस्थाओं का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करें।

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Written by

सिमडेगा

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