#डुमरी #किसान_आंदोलन : किसानों ने मुआवजा और सहमति के बिना कार्य कराने पर कार्रवाई की मांग उठाई।
डुमरी प्रखंड के मध्य गोपाली पंचायत स्थित महुवाटांड़ गांव के किसानों और ग्रामीणों ने एसपीएमएल कंपनी के खिलाफ अनुमंडल पदाधिकारी को आवेदन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि जलापूर्ति पाइपलाइन परियोजना के तहत बिना अनुमति और बिना मुआवजा दिए किसानों की निजी जमीन पर पाइपलाइन बिछाई गई, जिससे फसल और खेती योग्य भूमि को नुकसान पहुंचा। किसानों ने प्रशासन से क्षति का आकलन कर उचित मुआवजा देने और भविष्य में बिना सहमति कार्य नहीं कराने की मांग की है।
- महुवाटांड़ गांव के किसानों ने एसडीएम को सौंपा आवेदन।
- एसपीएमएल कंपनी पर बिना अनुमति पाइपलाइन बिछाने का आरोप।
- किसानों ने फसल और खेती योग्य जमीन को नुकसान होने की बात कही।
- प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग उठाई गई।
- 15 दिनों में समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी।
- आवेदन में कई ग्रामीणों और किसानों ने हस्ताक्षर कर समर्थन दिया।
डुमरी प्रखंड अंतर्गत मध्य गोपाली पंचायत के महुवाटांड़ गांव के किसानों एवं ग्रामीणों ने एसपीएमएल इंफ्रा लिमिटेड के खिलाफ अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) डुमरी को आवेदन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी द्वारा जलापूर्ति पाइपलाइन परियोजना के तहत बिना सूचना और बिना किसानों की सहमति के निजी खेती योग्य जमीन पर पाइपलाइन बिछाई गई, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित किसानों की क्षति का आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाए और भविष्य में किसानों की सहमति के बिना इस तरह का कार्य नहीं कराया जाए।
बिना सहमति जमीन पर पाइपलाइन बिछाने का आरोप
ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन में कहा गया है कि एसपीएमएल कंपनी ने किसानों की निजी भूमि पर बिना पूर्व सूचना और बिना लिखित अनुमति पाइपलाइन बिछाने का कार्य कराया। इससे खेतों में लगी फसल और खेती योग्य भूमि प्रभावित हुई है।
किसानों का कहना है कि विकास कार्यों का वे विरोध नहीं करते, लेकिन किसानों की जमीन और फसल को नुकसान पहुंचाकर काम करना गलत है।
ग्रामीणों ने कहा: “किसानों की सहमति और उचित प्रक्रिया के बिना निजी जमीन पर कार्य कराना अन्यायपूर्ण है।”
मुआवजा देने की मांग
आवेदन में किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जिन किसानों की फसल और जमीन को नुकसान हुआ है, उन्हें तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि खेती ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है और फसल नुकसान होने से आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो गई है।
किसानों ने मांग की: “प्रभावित किसानों की क्षति का आकलन कर जल्द मुआवजा दिया जाए और भविष्य में बिना एनओसी कार्य नहीं कराया जाए।”
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर समस्या का समाधान नहीं किया गया और किसानों को मुआवजा नहीं मिला तो वे अनुमंडल कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए कंपनी की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
किसानों के अधिकारों की रक्षा की उठी मांग
ग्रामीणों ने कहा कि विकास परियोजनाओं के दौरान किसानों के अधिकारों और हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने और किसानों के साथ संवाद स्थापित करने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण और पाइपलाइन जैसी परियोजनाओं में किसानों की सहमति और मुआवजा सुनिश्चित करना जरूरी है।
कई ग्रामीणों ने किया हस्ताक्षर
आवेदन पर रामचंद्र महतो, उमेश कुमार, जितेंद्र महतो, किशोरी देवी, गीता कुमारी, डिंपल कुमारी, मोहनी देवी, सीता देवी, टेकलाल महतो और श्यामसुंदर महतो समेत कई ग्रामीणों और किसानों ने हस्ताक्षर कर समर्थन दिया।
मामले की प्रतिलिपि झारखंड एकता किसान मजदूर यूनियन को भी दी गई है।
विकास और किसानों के अधिकार के बीच संतुलन की चुनौती
ग्रामीण क्षेत्रों में पाइपलाइन और अन्य विकास परियोजनाओं के दौरान भूमि, मुआवजा और किसानों की सहमति का मुद्दा लगातार विवाद का कारण बनता रहा है। महुवाटांड़ का यह मामला भी विकास कार्यों और किसानों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को सामने लाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को समय रहते पहल कर समाधान निकालना चाहिए ताकि विवाद बढ़ने से रोका जा सके।
न्यूज़ देखो: विकास कार्यों में किसानों की सहमति और अधिकार की अनदेखी नहीं होनी चाहिए
ग्रामीण क्षेत्रों में विकास परियोजनाएं जरूरी हैं, लेकिन किसानों की जमीन और आजीविका की कीमत पर नहीं। महुवाटांड़ के किसानों द्वारा उठाया गया मुद्दा यह दिखाता है कि संवाद और पारदर्शिता के बिना परियोजनाएं विवाद का रूप ले सकती हैं। प्रशासन और कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे किसानों की सहमति, मुआवजा और अधिकारों का सम्मान करें। समय रहते समाधान नहीं निकला तो यह मामला बड़े आंदोलन का रूप भी ले सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
किसानों की आवाज और अधिकार दोनों का सम्मान जरूरी
किसान केवल अन्नदाता नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी होते हैं। विकास तभी सार्थक माना जाएगा जब उसमें किसानों और आम लोगों के हितों की रक्षा भी सुनिश्चित हो।
संवाद, पारदर्शिता और न्यायपूर्ण प्रक्रिया ही किसी भी परियोजना को सफल बना सकती है। समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर संतुलित विकास की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
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