#चैनपुर #वन_महोत्सव : सामुदायिक वन अधिकार मिलने पर ग्रामीणों ने लिया संरक्षण का संकल्प।
गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड के भटौली गांव में वन महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 82.76 एकड़ सामुदायिक वन पट्टा मिलने की खुशी मनाई गई और जंगल संरक्षण का संकल्प लिया गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मिलकर पारंपरिक तरीके से उत्सव मनाया। इस आयोजन ने पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक अधिकारों के महत्व को रेखांकित किया।
- भटौली गांव में वन महोत्सव का आयोजन।
- 82.76 एकड़ वन पट्टा मिलने पर जश्न।
- पैरघा परंपरा से अतिथियों का स्वागत।
- जंगल संरक्षण और पौधारोपण का संकल्प लिया।
- बड़ी संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि रहे शामिल।
गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत रामपुर पंचायत के भटौली गांव में सोमवार को वन महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन सामुदायिक वन अधिकार के तहत 82.76 एकड़ वन पट्टा मिलने की खुशी में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और जंगल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।
पैरघा परंपरा से हुआ स्वागत
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार ‘पैरघा’ परंपरा से की गई, जिसमें मुख्य अतिथियों को विशेष सम्मान के साथ मंच तक लाया गया। अतिथियों को अंगवस्त्र भेंट कर उनका स्वागत किया गया। इस पारंपरिक आयोजन ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बना दिया।
जनप्रतिनिधियों की रही भागीदारी
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा, प्रखंड प्रमुख ओलिभ कांता कुजूर, रामपुर मुखिया तथा फिया फाउंडेशन के प्रखंड समन्वयक ललित कुमार महतो उपस्थित रहे। सभी ने वन अधिकार मिलने को ग्रामीणों की बड़ी उपलब्धि बताया।
वन अधिकार और भविष्य की योजना
फिया फाउंडेशन के समन्वयक ललित कुमार महतो ने बताया:
ललित कुमार महतो ने कहा: “उपायुक्त, वन प्रमंडल पदाधिकारी और जिला कल्याण पदाधिकारी के सहयोग से यह वन पट्टा संभव हो पाया है।”
उन्होंने आगामी पांच वर्षों की कार्ययोजना भी साझा की और पर्यावरण दिवस के अवसर पर 100 पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया।
अन्य गांवों को भी मिलेगा लाभ
कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि भटौली के बाद अब लुपुंगपाठ, तिगावल और भेलवतला गांवों के सामुदायिक वन पट्टे भी तैयार हैं, जिन्हें जल्द ही ग्रामीणों को सौंपा जाएगा। इससे क्षेत्र के और गांवों को भी इसका लाभ मिलेगा।
जंगल संरक्षण का लिया संकल्प
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को जंगल में आग नहीं लगाने और हरे पेड़ों को नहीं काटने की शपथ दिलाई गई। समिति के अध्यक्ष मनीष लोहरा ने पेसा कानून के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जंगल की रक्षा करना हर ग्रामीण का कर्तव्य है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाई रौनक
वन पट्टा मिलने की खुशी में ग्रामीणों ने मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। पारंपरिक नृत्य और गीतों के माध्यम से उन्होंने अपनी खुशी का इजहार किया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने इन प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया।
जिम्मेदारी का संदेश
जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा ने कहा:
मेरी लकड़ा ने कहा: “जंगल हमारा है और इसकी रक्षा करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।”
उन्होंने पेसा कानून के तहत मिले अधिकारों को संजोकर रखने की अपील की।
बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति
इस अवसर पर पंचायत समन्वयक ऊषा सरिता मिंज, संजय टोप्पो, अमरेंद्र प्रसाद, रजनी केरकेट्टा, पूर्व मुखिया इफ्रेम, ग्राम प्रधान राजेश बैगा सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने एकजुट होकर इस आयोजन को सफल बनाया।

न्यूज़ देखो: अधिकार के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी
चैनपुर का यह वन महोत्सव केवल उत्सव नहीं, बल्कि सामुदायिक अधिकार और जिम्मेदारी का संदेश देता है। वन पट्टा मिलना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसका संरक्षण और सही उपयोग और भी महत्वपूर्ण है। क्या ग्रामीण इस जिम्मेदारी को निभा पाएंगे, यह आने वाले समय में तय होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
प्रकृति की रक्षा, भविष्य की सुरक्षा
जंगल हमारी जिंदगी का आधार हैं और इनकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है।
हर छोटा प्रयास पर्यावरण को बचाने में बड़ा योगदान दे सकता है।
आइए मिलकर हरियाली को बढ़ाएं और प्रकृति का संतुलन बनाए रखें।
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