
#रांची #पारंपरिकस्वशासन : 16 अनुसूचित जिलों के प्रतिनिधियों की बैठक में संस्थान का गठन।
झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से रांची में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में 16 अनुसूचित जिलों के प्रतिनिधियों की सहमति से परंपरागत स्वशासन स्वशक्तिकरण संस्थान का गठन किया गया। बैठक में सिमडेगा के सामाजिक कार्यकर्ता अमृत चिराग तिर्की को संस्थान का केंद्रीय उपाध्यक्ष चुना गया।
- 15 मार्च 2026 को रांची के टाना भगत अतिथि गृह, बनहोरा में हुई महत्वपूर्ण बैठक।
- परंपरागत स्वशासन स्वशक्तिकरण संस्थान के गठन पर बनी सहमति।
- सिमडेगा के अमृत चिराग तिर्की को चुना गया केंद्रीय उपाध्यक्ष।
- संजीव भगत दिवान (लोहरदगा) बने संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष।
- पंचानन सोरेन (पश्चिमी सिंहभूम) को मिली केंद्रीय महासचिव की जिम्मेदारी।
- झारखंड के 16 अनुसूचित जिलों से एक-एक प्रतिनिधि को केंद्रीय उपाध्यक्ष बनाया जाएगा।
झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए परंपरागत स्वशासन स्वशक्तिकरण संस्थान का गठन किया गया है। इस संबंध में 15 मार्च 2026 को रांची के बनहोरा स्थित टाना भगत अतिथि गृह में एक अहम बैठक आयोजित की गई।
बैठक में झारखंड के विभिन्न अनुसूचित क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया और पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से संस्थान के गठन पर सर्वसम्मति से सहमति व्यक्त की।
अमृत चिराग तिर्की बने केंद्रीय उपाध्यक्ष
बैठक में सिमडेगा जिले के सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता और जननेता अमृत चिराग तिर्की को संस्थान का केंद्रीय उपाध्यक्ष चुना गया। उनके चयन पर उपस्थित प्रतिनिधियों ने खुशी व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी।
अमृत चिराग तिर्की ने इस अवसर पर सभी साथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह जिम्मेदारी उनके लिए सम्मान के साथ-साथ समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी भी है।
अमृत चिराग तिर्की ने कहा: “संस्थान के माध्यम से परंपरागत स्वशासन व्यवस्था, ग्रामसभा की सशक्त भूमिका और आदिवासी समाज को प्राप्त संवैधानिक अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में सामूहिक प्रयास किए जाएंगे।”
अन्य पदाधिकारियों का भी हुआ चयन
बैठक में संस्थान के अन्य पदाधिकारियों का भी चयन किया गया। इसमें लोहरदगा जिले के संजीव भगत दिवान को संस्थान का केंद्रीय अध्यक्ष बनाया गया। वहीं पश्चिमी सिंहभूम (जमशेदपुर क्षेत्र) के पंचानन सोरेन, जो सामाजिक कार्यकर्ता और राज्य स्तरीय पेसा मास्टर प्रशिक्षक हैं, उन्हें केंद्रीय महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।
इन पदाधिकारियों के नेतृत्व में संस्थान पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करने और ग्रामसभाओं की भूमिका को प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य करेगा।
16 अनुसूचित जिलों से होगा प्रतिनिधित्व
संस्थान की संरचना इस तरह से तैयार की गई है कि झारखंड के सभी 16 अनुसूचित जिलों से एक-एक प्रतिनिधि को केंद्रीय उपाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी दी जाएगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के सभी अनुसूचित क्षेत्रों की भागीदारी बनी रहे और पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयास किए जा सकें।
ग्रामसभा को मजबूत करने पर जोर
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यदि ग्रामसभाएं मजबूत होंगी, तो गांवों के विकास और स्थानीय संसाधनों के संरक्षण में भी बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
अमृत चिराग तिर्की ने कहा कि झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में पारंपरिक शासन व्यवस्था और ग्रामसभा की शक्ति को मजबूत करना समय की बड़ी आवश्यकता है। इसके लिए सभी जिलों के प्रतिनिधि मिलकर संगठित रूप से कार्य करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल संगठन बनाना नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करना और पारंपरिक स्वशासन की व्यवस्था को मजबूत बनाना है।
न्यूज़ देखो: पारंपरिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में पहल
झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था और ग्रामसभाओं की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में इस तरह के संस्थान का गठन स्थानीय शासन व्यवस्था को मजबूत करने और समाज को संगठित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संगठित समाज ही बनाता है मजबूत व्यवस्था
जब समाज संगठित होकर अपने अधिकारों और परंपराओं को मजबूत करने के लिए आगे बढ़ता है, तभी स्थायी विकास संभव होता है। पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास समाज को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसी सोच के साथ समाज के लोग यदि मिलकर कार्य करें, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत और सशक्त व्यवस्था तैयार की जा सकती है।






