
#बानो #बिजली_संकट : बिन्तुका पंचायत के पांगुर गढ़ा टोली में चार वर्षों से ट्रांसफार्मर खराब, विभागीय उदासीनता से ग्रामीण परेशान।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड अंतर्गत बिन्तुका पंचायत के पांगुर गढ़ा टोली में पिछले चार वर्षों से जला पड़ा ट्रांसफार्मर आज भी नहीं बदला गया है। इस कारण करीब 30 घरों के ग्रामीण अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर हैं। बार-बार शिकायत और लिखित आवेदन के बावजूद बिजली विभाग और जनप्रतिनिधियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। हाथी प्रभावित और जंगल-पहाड़ से घिरे इस इलाके में बिजली संकट ग्रामीणों की सुरक्षा और बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर डाल रहा है।
- पांगुर गढ़ा टोली में पिछले चार वर्षों से जला पड़ा है ट्रांसफार्मर।
- लगभग 30 घरों के ग्रामीण आज भी बिजली से वंचित।
- एसडीओ, सांसद, मुखिया सहित कई जनप्रतिनिधियों को दिया गया आवेदन।
- इलाका हाथी प्रभावित और जंगल-पहाड़ों से घिरा हुआ।
- बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा पर पड़ रहा सीधा असर।
- जेएलकेएम प्रखंड अध्यक्ष रविन्द्र सिंह ने हस्तक्षेप का दिया आश्वासन।
बानो प्रखंड क्षेत्र के बिन्तुका पंचायत अंतर्गत पांगुर गढ़ा टोली की स्थिति प्रशासनिक उदासीनता का जीवंत उदाहरण बनती जा रही है। चार वर्षों से जला पड़ा ट्रांसफार्मर न केवल बिजली व्यवस्था की बदहाली को उजागर करता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी को भी सामने लाता है। अंधेरे में गुजरती रातें, बच्चों की प्रभावित पढ़ाई और हाथियों का डर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।
चार वर्षों से जस का तस हालात
ग्रामीणों के अनुसार पांगुर गढ़ा टोली में ट्रांसफार्मर करीब चार वर्ष पूर्व जल गया था। शुरुआत में लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही नया ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा, लेकिन समय बीतता गया और समस्या जस की तस बनी रही। बिजली नहीं होने के कारण गांव में पंखा, बल्ब, टीवी जैसे बुनियादी उपकरण तो दूर, मोबाइल चार्ज करना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।
लिखित शिकायतों के बाद भी नहीं हुई सुनवाई
ग्रामीण विलियम लुगुन और राजेंद्र सिंह ने बताया कि ट्रांसफार्मर जलने के बाद बिजली विभाग के एसडीओ, क्षेत्र के सांसद, मुखिया सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को कई बार लिखित आवेदन दिए गए। उन्होंने कहा:
विलियम लुगुन और राजेंद्र सिंह ने कहा: “हम लोगों ने कई बार आवेदन दिया, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सिर्फ आश्वासन मिला, समाधान नहीं।”
ग्रामीणों का कहना है कि हर बार उन्हें इंतजार करने को कहा गया, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी बिजली बहाल नहीं हो सकी।
हाथी प्रभावित क्षेत्र में अंधेरे का खतरा
ग्रामीण सुरेश जोजो, सुजीत जोजो, सुमन लोमगा, चंद्रनाथ सिंह, डायलेंन लुगुन, सीता राम भुइयाँ सहित अन्य लोगों ने बताया कि पांगुर गढ़ा टोली चारों ओर से जंगल और पहाड़ों से घिरा हुआ है। यह इलाका हाथी प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता है।
उन्होंने बताया:
ग्रामीणों ने कहा: “रात में अंधेरा रहने से हाथियों और जंगली जानवरों का डर बना रहता है। बच्चों और परिवार की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता रहती है।”
बिजली नहीं होने से न तो सड़क और घरों के आसपास रोशनी रहती है और न ही किसी तरह का सुरक्षा इंतजाम संभव हो पाता है।
बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर असर
बिजली संकट का सबसे बड़ा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। अंधेरे में बच्चों के लिए पढ़ाई करना लगभग असंभव हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बच्चे स्कूल से लौटने के बाद शाम को पढ़ नहीं पाते, जिससे उनकी शिक्षा प्रभावित हो रही है। मोबाइल चार्जिंग जैसी बुनियादी सुविधा नहीं होने से ऑनलाइन पढ़ाई और शैक्षणिक सामग्री तक पहुंच भी सीमित हो गई है।
जेएलकेएम प्रखंड अध्यक्ष ने उठाई आवाज
इस मामले पर जेएलकेएम के प्रखंड अध्यक्ष रविन्द्र सिंह ने भी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा:
रविन्द्र सिंह ने कहा: “गांव में पिछले चार वर्षों से ट्रांसफार्मर जला होने की जानकारी बिजली विभाग और जनप्रतिनिधियों को दी जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक ट्रांसफार्मर नहीं लगाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”
उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही बिजली अभियंता से मिलकर गांव में ट्रांसफार्मर लगवाने की पहल की जाएगी, ताकि ग्रामीणों को अंधेरे से राहत मिल सके।
प्रशासन और विभाग से ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और बिजली विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द नया ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराकर गांव में बिजली बहाल की जाए। उनका कहना है कि चार साल का इंतजार किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
बुनियादी सुविधा की अनदेखी पर सवाल
पांगुर गढ़ा टोली का यह मामला केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। सरकार की योजनाओं और दावों के बावजूद यदि चार वर्षों तक ट्रांसफार्मर नहीं बदला जा सका, तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी को दर्शाता है।
न्यूज़ देखो: चार साल का अंधेरा सिस्टम की असफलता का आईना
पांगुर गढ़ा टोली में चार वर्षों से जला ट्रांसफार्मर यह साबित करता है कि ग्रामीण इलाकों में समस्याएं कितनी उपेक्षित रह जाती हैं। बिजली जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव सुरक्षा, शिक्षा और जीवन स्तर पर सीधा असर डालता है। जनप्रतिनिधियों और विभाग की जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। अब सवाल यह है कि दिए गए आश्वासन कब हकीकत में बदलेंगे।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अंधेरे से उजाले तक की लड़ाई में प्रशासन की भूमिका अहम
बिजली केवल सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा और विकास का आधार है। पांगुर गढ़ा टोली के ग्रामीण चार वर्षों से जिस अंधेरे में जी रहे हैं, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए चिंताजनक है। यदि समय रहते कार्रवाई की जाए, तो न केवल गांव रोशन होगा बल्कि प्रशासन पर भरोसा भी मजबूत होगा।
आप भी इस मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद करें और जिम्मेदार तंत्र को जगाने में भूमिका निभाएं।
इस खबर पर अपनी राय कमेंट में साझा करें, इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और ग्रामीणों को अंधेरे से मुक्ति दिलाने की इस मांग को मजबूती दें।





