#खलारी #संस्कार_उत्सव : ग्रैंडपेरेंट्स डे में बच्चों और बुजुर्गों के बीच स्नेह का अद्भुत दृश्य दिखा।
रांची जिले के खलारी स्थित डीएवी को-ऑपरेटिव सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्रैंडपेरेंट्स डे समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने दादा-दादी और नाना-नानी के प्रति सम्मान व्यक्त किया। प्राचार्य डॉ. कमलेश कुमार ने पारिवारिक मूल्यों और बुजुर्गों के महत्व पर जोर दिया। यह आयोजन पीढ़ियों के बीच स्नेह और जुड़ाव का प्रतीक बना।
- डीएवी खलारी में ग्रैंडपेरेंट्स डे का आयोजन।
- बच्चों ने गीत, नृत्य और नाटिका प्रस्तुत की।
- डॉ. कमलेश कुमार ने बुजुर्गों के सम्मान पर जोर दिया।
- दादा-दादी ने खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया।
- “टोकन ऑफ लव” के तहत पौधे भेंट किए गए।
- कार्यक्रम का समापन सामूहिक नाश्ते के साथ हुआ।
रांची जिले के खलारी स्थित डीएवी को-ऑपरेटिव सीनियर सेकेंडरी स्कूल में रविवार को “ग्रैंडपेरेंट्स डे सेलिब्रेशन 2026-27” का आयोजन बड़े ही उत्साह और भावनात्मक माहौल में किया गया। यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम था, बल्कि पीढ़ियों के बीच प्रेम, सम्मान और जुड़ाव का जीवंत उदाहरण भी बना।
पारंपरिक स्वागत के साथ हुआ शुभारंभ
सुबह 7:30 बजे कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद बालवाटिका, कक्षा प्रथम और द्वितीय के बच्चों ने मधुर स्वागत गीत प्रस्तुत कर अपने दादा-दादी और नाना-नानी के प्रति स्नेह व्यक्त किया।
बच्चों की मासूम और मनमोहक प्रस्तुतियों ने सभी उपस्थित लोगों का दिल जीत लिया और पूरे वातावरण को भावनात्मक बना दिया।
रंगारंग कार्यक्रमों ने बांधा समां
कार्यक्रम के दौरान कक्षा प्रथम और द्वितीय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पारंपरिक और आधुनिक गीतों के मिश्रण ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण जोड़ा।
वहीं कक्षा द्वितीय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत लघु नाटिका ने बुजुर्गों की भूमिका और उनके महत्व को बेहद संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया।
एक अभिभावक ने कहा: “इस नाटिका ने हमें हमारे परिवार और बुजुर्गों की अहमियत का एहसास कराया।”
प्राचार्य ने दिया प्रेरणादायक संदेश
विद्यालय के प्राचार्य डॉ. कमलेश कुमार ने अपने संबोधन में बुजुर्गों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा:
डॉ. कमलेश कुमार ने कहा: “दादा-दादी और नाना-नानी परिवार की जड़ों के समान होते हैं, जो बच्चों को संस्कार और जीवन की दिशा देते हैं।”
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे परिवार के साथ समय बिताएं और बच्चों को पारिवारिक मूल्यों से जोड़कर रखें।
खेल और गतिविधियों में बुजुर्गों की भागीदारी
कार्यक्रम में आयोजित विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में दादा-दादी और नाना-नानी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उनकी भागीदारी ने कार्यक्रम को और भी जीवंत बना दिया।
इस दौरान “टोकन ऑफ लव” के तहत शिक्षकों द्वारा बुजुर्गों को पौधे भेंट कर सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की गई।
भावनात्मक माहौल में हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में कंचन सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इसके बाद सभी ने सामूहिक नाश्ते का आनंद लिया, जहां पीढ़ियों के बीच स्नेह और आत्मीयता का सुंदर दृश्य देखने को मिला।
यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम था, बल्कि परिवार और समाज में बुजुर्गों के महत्व को समझाने का एक सशक्त माध्यम भी बना।
संस्कार और परंपरा का जीवंत उदाहरण
डीएवी खलारी का यह आयोजन यह दर्शाता है कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों को भी सिखाती है। इस तरह के कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं।

न्यूज़ देखो: रिश्तों की मजबूती का संदेश
ग्रैंडपेरेंट्स डे जैसे आयोजन हमें यह याद दिलाते हैं कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में भी परिवार और बुजुर्गों का महत्व कम नहीं होना चाहिए। डीएवी खलारी का यह प्रयास सराहनीय है, लेकिन जरूरी है कि ऐसे मूल्यों को रोजमर्रा की जिंदगी में भी अपनाया जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
रिश्तों को संजोएं, संस्कारों को आगे बढ़ाएं
परिवार हमारी सबसे बड़ी ताकत है और बुजुर्ग हमारे अनुभवों का खजाना। हमें उनके साथ समय बिताकर उनसे सीखना चाहिए।
आइए हम भी अपने परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करें और उनके अनुभवों को अपने जीवन में उतारें।
अगर यह खबर आपको भावुक और प्रेरित करती है, तो इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें। अपनी राय कमेंट में दें और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत बनाने में योगदान दें।

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