जमीन के बदले नौकरी और मुआवजे की मांग को लेकर 22 जून से मैक्लुस्कीगंज रेल फेज-वन बाधित करने की चेतावनी

जमीन के बदले नौकरी और मुआवजे की मांग को लेकर 22 जून से मैक्लुस्कीगंज रेल फेज-वन बाधित करने की चेतावनी

author Jitendra Giri
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#मैक्लुस्कीगंज #विस्थापित_मांग : 36 वर्षों से लंबित नौकरी और मुआवजे की मांग को लेकर रैयत विस्थापित मोर्चा ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया।

मैक्लुस्कीगंज क्षेत्र में जमीन के बदले नौकरी और उचित मुआवजे की मांग को लेकर रैयत विस्थापित मोर्चा ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। महुलिया में आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने सीसीएल प्रबंधन पर वर्षों से मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। रैयतों ने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो 22 जून से रेल फेज-वन में कोयला ढुलाई बाधित की जाएगी।

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  • रैयत विस्थापित मोर्चा ने आंदोलन तेज करने का लिया निर्णय।
  • 36 वर्षों से लंबित नौकरी और मुआवजे की मांग को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश।
  • 22 जून से मैक्लुस्कीगंज-पिपरवार रेल फेज-वन बाधित करने की चेतावनी।
  • सीसीएल प्रबंधन और प्रशासन से जल्द समाधान की मांग।
  • बैठक में दर्जनों रैयत, विस्थापित और ग्रामीण रहे मौजूद।

खलारी, रांची के मैक्लुस्कीगंज क्षेत्र में जमीन के बदले नौकरी और मुआवजे की मांग को लेकर विस्थापितों का आंदोलन एक बार फिर तेज होने जा रहा है। रैयत विस्थापित मोर्चा के बैनर तले शुक्रवार को महुलिया में रैयतों और ग्रामीणों की आवश्यक बैठक आयोजित की गई, जिसमें वर्षों से लंबित मांगों को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।

बैठक में ग्रामीणों ने सीसीएल प्रबंधन के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रभावित परिवार पिछले 36 वर्षों से नौकरी और मुआवजे की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

आश्वासन से आगे बढ़कर समाधान की मांग

बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि हर बार प्रबंधन की ओर से मांगों के समाधान का आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे प्रभावित रैयतों और विस्थापित परिवारों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

वक्ताओं ने कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। प्रभावित परिवार अपनी मांगों को लेकर निर्णायक आंदोलन के लिए तैयार हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वे सीसीएल प्रबंधन, अंचल कार्यालय और संबंधित विभागों के लगातार चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है।

रेल लाइन से कोयला ढुलाई रोकने की चेतावनी

बैठक में रैयतों ने स्पष्ट किया कि जब तक जमीन के बदले नौकरी और उचित मुआवजा नहीं दिया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

विस्थापित रमेश साहू ने बताया कि यदि अगले 10 दिनों के भीतर प्रबंधन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की जाती है तो 22 जून से मैक्लुस्कीगंज-पिपरवार रेल फेज-वन को बाधित करने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी पूरी जिम्मेदारी सीसीएल प्रबंधन और अंचल प्रशासन की होगी।

रोजगार और अधिकार के लिए संघर्ष जारी

ग्रामीणों ने कहा कि जमीन अधिग्रहण के बाद प्रभावित परिवारों को रोजगार और उचित मुआवजा मिलना उनका अधिकार है। उन्होंने सीसीएल प्रबंधन से जल्द सकारात्मक पहल करते हुए लंबित मामलों का निपटारा करने की मांग की।

रैयतों का कहना है कि वर्षों से संघर्ष के बावजूद समाधान नहीं मिलने के कारण अब आंदोलन को मजबूती से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

बैठक में ये रहे उपस्थित

बैठक में कृष्णा भोगता, ताहिर अंसारी, सुनील मुंडा, विनय टोप्पो, सुकरा गंझू, जबीरण खातून, साहिना खातून, असरुद्दीन अंसारी, नसीबा खातून सहित दर्जनों ग्रामीण और विस्थापित परिवार के सदस्य उपस्थित थे।

न्यूज़ देखो: विकास और विस्थापन के बीच संतुलन जरूरी

बड़े औद्योगिक और खनन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के बाद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, रोजगार और मुआवजे का मुद्दा लंबे समय से महत्वपूर्ण विषय रहा है। विकास कार्यों के साथ विस्थापितों के अधिकारों का संरक्षण भी जरूरी है।

मैक्लुस्कीगंज क्षेत्र में उठी यह मांग बताती है कि लंबित मामलों का समय पर समाधान नहीं होने से असंतोष बढ़ सकता है। अब प्रशासन और प्रबंधन के सामने चुनौती है कि संवाद के माध्यम से समाधान निकालकर क्षेत्र में शांति और विश्वास कायम रखा जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अधिकार और सम्मान के लिए संघर्ष की आवाज

जमीन देने वाले परिवारों को न्याय और सम्मान मिलना जरूरी है।
विकास तभी सार्थक होता है जब उसका लाभ प्रभावित लोगों तक भी पहुंचे।
संवाद और समाधान ही स्थायी रास्ता है।

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Written by

खलारी, रांची

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