चंदवा में घास और बांस शिल्प प्रशिक्षण से महिलाओं को मिला रोजगार का नया रास्ता, 30 दिन का कार्यक्रम संपन्न

चंदवा में घास और बांस शिल्प प्रशिक्षण से महिलाओं को मिला रोजगार का नया रास्ता, 30 दिन का कार्यक्रम संपन्न

author Ravikant Kumar Thakur
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#चंदवा #महिला_सशक्तिकरण : हस्तशिल्प प्रशिक्षण—घास और बांस से स्वरोजगार की दिशा में पहल।

लातेहार के चंदवा में 30 दिवसीय घास और बांस शिल्प प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसमें 50 महिलाओं को हस्तशिल्प बनाने की तकनीक सिखाई गई। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना था। प्रशिक्षण के बाद महिलाएं स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

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  • 50 महिलाओं को शिल्प प्रशिक्षण दिया गया।
  • कार्यक्रम 30 दिनों तक चला
  • घास और बांस से पर्यावरण अनुकूल उत्पाद बनाए गए
  • महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर मिले
  • स्थानीय कला को संरक्षित करने की पहल

लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत घास और बांस शिल्प का 30 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। हिंडाल्को चाकला कोल माइन परियोजना क्षेत्र के अंतर्गत आयोजित इस प्रशिक्षण में पांच गांवों की महिलाओं ने भाग लिया।

इस कार्यक्रम ने न केवल महिलाओं को कौशल प्रदान किया, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित किया।

पांच गांवों की महिलाओं ने लिया प्रशिक्षण

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में अरंडिया टांड़, चकला, अंबाटांड़, नवाटोली और पड़वा हरैया गांवों की कुल 50 महिलाओं को शामिल किया गया।

एक प्रतिभागी महिला ने कहा: “अब हम अपने हाथों से कुछ बनाकर कमाई कर सकते हैं।”

पारंपरिक कला को आधुनिक रूप

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को घास और बांस जैसे स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर आकर्षक और उपयोगी उत्पाद बनाने की आधुनिक तकनीक सिखाई गई।

इससे पारंपरिक कला को नया स्वरूप मिला।

पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद

कार्यक्रम में तैयार किए गए उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल हैं, जो वर्तमान समय में काफी मांग में हैं।

स्वरोजगार के नए अवसर

प्रशिक्षण के बाद महिलाएं अब इन उत्पादों को बनाकर बाजार में बेच सकती हैं, जिससे उनके लिए स्वरोजगार के नए अवसर खुल गए हैं।

एक प्रशिक्षक ने कहा: “यह प्रशिक्षण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का मजबूत माध्यम है।”

आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम

यह पहल महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण

इस प्रशिक्षण के माध्यम से स्थानीय हस्तशिल्प कला और सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करने का प्रयास किया गया है।

सतत विकास को बढ़ावा

यह कार्यक्रम न केवल रोजगार प्रदान कर रहा है, बल्कि क्षेत्र में सतत विकास को भी बढ़ावा दे रहा है।

महिलाओं में बढ़ा आत्मविश्वास

प्रशिक्षण के बाद महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अब अपने भविष्य को लेकर सकारात्मक सोच रख रही हैं।

न्यूज़ देखो: कौशल से आत्मनिर्भरता

चंदवा की यह पहल दिखाती है कि यदि सही प्रशिक्षण और अवसर मिले, तो महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं। यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक हो सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सीखें, कमाएं और आगे बढ़ें

कौशल ही आत्मनिर्भरता की कुंजी है।
जरूरी है कि हम अपने हुनर को पहचानें।
छोटे प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
आइए, हम भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाएं।

इस पहल को आगे बढ़ाएं, महिलाओं को प्रेरित करें और खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं।
अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें।

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Written by

चंदवा, लातेहार

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