#गुमला #जनजातीय_विकास : वन उत्पादों के बेहतर विपणन हेतु सदस्यों को आधुनिक तकनीक की दी गई जानकारी।
गुमला समाहरणालय सभाकक्ष में “जनजातीय गरिमा उत्सव 2026” के तहत वन धन विकास केंद्रों के सदस्यों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। ट्राईफेड और जेएसएलपीएस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में डिजिटल मार्केटिंग, ब्रांडिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में 12 वन धन विकास केंद्रों के सदस्य और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रशिक्षण का उद्देश्य जनजातीय उत्पादों को आधुनिक बाजार से जोड़कर आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना था।
- गुमला समाहरणालय सभाकक्ष में आयोजित हुआ एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम।
- 12 वन धन विकास केंद्रों के सदस्यों ने प्रशिक्षण में भाग लिया।
- प्रतिभागियों को डिजिटल मार्केटिंग, ब्रांडिंग और एआई तकनीक की जानकारी दी गई।
- कार्यक्रम का आयोजन ट्राईफेड और जेएसएलपीएस के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
- प्रतिभागियों को गुमला हाट का एक्सपोजर विजिट भी कराया गया।
- कार्यक्रम में कृषि विभाग, JTDS और बैंकिंग क्षेत्र के अधिकारियों ने भी योजनाओं की जानकारी दी।
गुमला जिला समाहरणालय के सभाकक्ष में शुक्रवार को जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित “जनजातीय गरिमा उत्सव 2026” के अंतर्गत एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। “TECHNOLOGY AS A DEVELOPMENT DRIVER” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय समुदायों को आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों से जोड़ते हुए आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था।
कार्यक्रम का आयोजन ट्राईफेड क्षेत्रीय कार्यालय बिहार-झारखंड और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) गुमला के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन के तहत गठित 2 वन धन विकास केंद्र तथा PM-JANMAN योजना के तहत गठित 10 PVTG वन धन विकास केंद्रों के सदस्य शामिल हुए।
तकनीक के माध्यम से बाजार तक पहुंच बनाने पर जोर
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने वन धन विकास केंद्रों के सदस्यों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विशेष रूप से यह बताया गया कि किस प्रकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन ब्रांडिंग के जरिए ग्रामीण और जनजातीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा सकता है।
प्रतिभागियों को यह भी समझाया गया कि आज के दौर में केवल उत्पाद तैयार करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी प्रभावी पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रचार-प्रसार भी बेहद आवश्यक है।
वन उत्पादों के डिजिटल विक्रय पर मिला प्रशिक्षण
कार्यक्रम के दौरान वन धन विकास केंद्रों द्वारा तैयार किए जाने वाले उत्पादों जैसे जंगली फल, बीज, हस्तशिल्प और अन्य वनोपज आधारित सामग्रियों के विपणन के आधुनिक तरीकों पर विशेष चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि मोबाइल एप, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्रामीण उत्पादों की बिक्री को कैसे बढ़ाया जा सकता है।
ट्राईफेड के अधिकारियों ने कहा: “जनजातीय समुदायों को तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है। डिजिटल माध्यमों से उनके उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा सकता है।”
प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि सही ब्रांडिंग और गुणवत्ता नियंत्रण से उनके उत्पादों की मांग और कीमत दोनों बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव और जानकारी
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में ट्राईफेड रांची के क्षेत्रीय प्रबंधक राज कुमार, उप प्रबंधक शैलेन्द्र राजू, दिनेश रंजन तथा इंद्रजीत सिंह उपस्थित रहे। सभी विशेषज्ञों ने तकनीक आधारित विकास और स्वरोजगार के नए अवसरों पर विस्तार से चर्चा की।
इसके अलावा जिला कृषि विभाग, JTDS तथा एलडीएम गुमला पवन कुमार द्वारा भी विभिन्न सरकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता संबंधी जानकारियां दी गईं। अधिकारियों ने प्रतिभागियों को बताया कि सरकार द्वारा जनजातीय समुदायों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका लाभ उठाकर वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
गुमला हाट का कराया गया एक्सपोजर विजिट
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को समाहरणालय परिसर स्थित “गुमला हाट” का भ्रमण भी कराया गया। यह केंद्र ग्रामीण और जनजातीय उत्पादों के विक्रय के लिए स्थापित किया गया है। एक्सपोजर विजिट के माध्यम से प्रतिभागियों को उत्पाद प्रदर्शन, पैकेजिंग और बिक्री प्रबंधन की व्यवहारिक जानकारी दी गई।
इस दौरान सदस्यों ने विभिन्न उत्पादों के प्रदर्शन और ग्राहकों तक पहुंच बनाने की प्रक्रिया को करीब से समझा।
जनजातीय समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास
कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें अपने उत्पादों को बेहतर तरीके से बाजार तक पहुंचाने की नई जानकारी मिली है। कई सदस्यों ने पहली बार डिजिटल मार्केटिंग और एआई तकनीक के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को समूह आधारित कार्य और सामूहिक ब्रांडिंग पर भी जोर देने की सलाह दी, ताकि छोटे उत्पादकों को भी बड़ा बाजार मिल सके।
धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का समापन जेएसएलपीएस गुमला के DPM शैलेन्द्र जारिका के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी प्रतिभागियों, अधिकारियों और विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम जनजातीय समुदायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
न्यूज़ देखो: तकनीक से जुड़ेंगे जनजातीय उत्पाद, तभी बढ़ेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
गुमला में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इस बात का संकेत है कि अब ग्रामीण और जनजातीय अर्थव्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में गंभीर प्रयास हो रहे हैं। यदि वन धन विकास केंद्रों को डिजिटल प्लेटफॉर्म, ब्रांडिंग और बाजार की सही जानकारी मिले, तो स्थानीय उत्पाद राष्ट्रीय पहचान बना सकते हैं। सरकार और संस्थाओं की यह पहल सराहनीय है, लेकिन जरूरी है कि प्रशिक्षण केवल कार्यक्रमों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर निरंतर सहयोग और बाजार उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
तकनीक और परंपरा का संगम ही बनेगा आत्मनिर्भर गांवों की ताकत
ग्रामीण और जनजातीय उत्पादों में अपार संभावनाएं छिपी हैं, जरूरत है उन्हें सही दिशा और बाजार देने की।
यदि गांव के युवा और महिलाएं तकनीक से जुड़ें, तो स्थानीय संसाधन ही रोजगार और आत्मनिर्भरता का बड़ा माध्यम बन सकते हैं।
डिजिटल ज्ञान और पारंपरिक कौशल का मेल गांवों की आर्थिक तस्वीर बदल सकता है।
आइए, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दें और जनजातीय समुदायों के प्रयासों का सम्मान करें।
आप भी स्थानीय और जनजातीय उत्पादों को प्राथमिकता दें।
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