#गुमला #पुस्तक_मेला : चार दिवसीय ज्ञानोत्सव में साहित्य, संस्कृति और अध्ययन को मिला नया मंच।
गुमला टाउन हॉल में शुक्रवार से चार दिवसीय “गुमला पुस्तक मेला 2026” का भव्य शुभारंभ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक, साहित्यकार और पुस्तक प्रेमी शामिल हुए। उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो ने दीप प्रज्वलित कर मेले का उद्घाटन करते हुए युवाओं से पुस्तकों से जुड़ने की अपील की। 15 मई से 18 मई तक चलने वाले इस मेले में साहित्यिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिला प्रशासन और विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से आयोजित यह मेला गुमला में अध्ययन संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
- गुमला टाउन हॉल में चार दिवसीय गुमला पुस्तक मेला 2026 का शुभारंभ।
- उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
- मेला 15 मई से 18 मई 2026 तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक चलेगा।
- मेले में चित्रकला, कविता वाचन, नृत्य एवं कवि सम्मेलन जैसे कार्यक्रम होंगे।
- बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक, साहित्यकार और पुस्तक प्रेमी पहुंचे।
- आयोजन में जिला प्रशासन, समय इंडिया ट्रस्ट और अन्य संस्थाओं की सहभागिता रही।
गुमला की सांस्कृतिक और शैक्षणिक पहचान को नई ऊर्जा देने के उद्देश्य से आयोजित “गुमला पुस्तक मेला 2026” का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। टाउन हॉल परिसर में आयोजित इस मेले में पहले ही दिन पुस्तक प्रेमियों की अच्छी भीड़ देखने को मिली। मेले का उद्घाटन उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने पुस्तकों के महत्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए युवाओं और विद्यार्थियों को अध्ययन की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
चार दिनों तक चलने वाला यह पुस्तक मेला प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक आम लोगों के लिए खुला रहेगा। आयोजन का उद्देश्य युवाओं और समाज के बीच पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देना तथा साहित्य और ज्ञान के प्रति रुचि विकसित करना है।
इंटरनेट युग में भी पुस्तकों का महत्व बरकरार
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो ने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल माध्यमों का प्रभाव तेजी से बढ़ा है, लेकिन पुस्तकों का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पुस्तकें केवल जानकारी का माध्यम नहीं, बल्कि चिंतन और व्यक्तित्व विकास की आधारशिला हैं।
उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो ने कहा: “पुस्तकों के अध्ययन से ही महान साहित्यकारों, विद्वानों और विशेषज्ञों ने ज्ञान अर्जित किया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी पुस्तकों का कोई विकल्प नहीं है।”
उन्होंने यह भी कहा कि मोबाइल और इंटरनेट तत्काल जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं, लेकिन गहराई और व्यापक समझ केवल पुस्तकों के माध्यम से ही प्राप्त की जा सकती है। उपायुक्त ने विद्यार्थियों और युवाओं से मेले में पहुंचकर विभिन्न विषयों की पुस्तकों का अध्ययन करने और उन्हें अपने जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।
18 मई तक चलेगा ज्ञान और संस्कृति का महोत्सव
चार दिवसीय इस पुस्तक मेले में साहित्य और संस्कृति से जुड़े कई विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, हर दिन अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों और युवाओं को मंच प्रदान किया जाएगा।
निर्धारित कार्यक्रम इस प्रकार हैं
16 मई
चित्रकला प्रतियोगिता, कविता एवं कहानी वाचन, गायन और नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन।
17 मई
कवि-कवयित्री सम्मेलन का आयोजन, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के साहित्यकार अपनी रचनाएं प्रस्तुत करेंगे।
18 मई
समापन समारोह के साथ प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा।
इन आयोजनों के माध्यम से जिले के प्रतिभाशाली युवाओं और बच्चों को अपनी कला एवं साहित्यिक क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
कई संस्थाओं के सहयोग से आयोजित हो रहा मेला
इस पुस्तक मेले का आयोजन समय इंडिया (ट्रस्ट), नई दिल्ली द्वारा प्रज्ञा रिसर्च एसोसिएशन (प्राण), रांची एवं जिला प्रशासन, गुमला के सहयोग से किया जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि इस प्रकार के आयोजन समाज में बौद्धिक वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला योजना पदाधिकारी रमण कुमार, कमल किशोर मिश्रा (सीनियर प्रोग्राम लीड, पिरामल फाउंडेशन), सोनालिका कुमारी (अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, गुमला), प्रमोद कुमार जायसवाल (प्रोग्राम लीड, पिरामल फाउंडेशन), एकांश सोमानी (पीपीआईए फेलो, गुमला), शिवानी चौहान (प्रोग्राम लीड, पिरामल फाउंडेशन), अवधेश कुमार (प्रैक्सिस पीपीआईए फेलो, गुमला) एवं मंटू रजक (एसोसिएट/फेलो, एवीए, गुमला) सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इसके अलावा बड़ी संख्या में शिक्षक, पत्रकार, साहित्यकार, विद्यार्थी और पुस्तक प्रेमी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
विद्यार्थियों और युवाओं में दिखा उत्साह
मेले में पहुंचे विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों की पुस्तकों का अवलोकन किया और कई किताबें खरीदीं। प्रतियोगी परीक्षाओं, साहित्य, विज्ञान, इतिहास, प्रेरणादायक व्यक्तित्व और बच्चों की पुस्तकों के स्टॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे।
कई विद्यार्थियों ने कहा कि डिजिटल युग में इस तरह का पुस्तक मेला उन्हें पढ़ाई के प्रति नई प्रेरणा देता है। वहीं शिक्षकों ने इसे विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया।
लिट-फेस्ट की सफलता के बाद नई पहल
कार्यक्रम के दौरान पिछले वर्ष आयोजित जिला स्तरीय लिट-फेस्ट का भी उल्लेख किया गया, जिसे व्यापक सराहना मिली थी। आयोजकों ने कहा कि उसी प्रयास को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष पुस्तक मेले का आयोजन किया गया है ताकि जिले में साहित्यिक और शैक्षणिक माहौल को और मजबूत किया जा सके।
न्यूज़ देखो: गुमला में पढ़ने की संस्कृति को नई दिशा देने वाली पहल
गुमला पुस्तक मेला 2026 केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को पुस्तकों और ज्ञान से जोड़ने का गंभीर प्रयास है। ऐसे समय में जब युवा तेजी से डिजिटल दुनिया में सीमित होते जा रहे हैं, पुस्तक मेले जैसे आयोजन अध्ययन और चिंतन की संस्कृति को पुनर्जीवित करने का कार्य करते हैं। जिला प्रशासन और आयोजक संस्थाओं की यह पहल सराहनीय है, लेकिन अब जरूरत इस बात की है कि ऐसे कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजन बनकर न रह जाएं, बल्कि गांव-गांव तक अध्ययन संस्कृति को मजबूत करने का अभियान बनें। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
पढ़ने की आदत ही बनाती है मजबूत समाज
पुस्तकें केवल परीक्षा पास करने का साधन नहीं, बल्कि बेहतर सोच और जागरूक समाज की नींव होती हैं।
यदि युवा पढ़ने की आदत अपनाएं, तो समाज में जागरूकता, संवेदनशीलता और सकारात्मक बदलाव स्वतः दिखाई देगा।
गुमला पुस्तक मेला जैसे आयोजन नई पीढ़ी को ज्ञान और रचनात्मकता की ओर प्रेरित करने का अवसर देते हैं।
आइए, हम सभी पुस्तकों से जुड़ने और दूसरों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लें।
आप भी इस पुस्तक मेले में जाएं, अपनी पसंदीदा किताबें चुनें और बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करें।
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