#गुमला #अंधविश्वास : मुरकुंडा में डायन के आरोप से हुई हत्या के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ।
गुमला जिले के मुरकुंडा पंचायत के कोटेगसेरा गांव में अंधविश्वास से जुड़ी दर्दनाक घटना सामने आई है। 65 वर्षीय पालू खड़िया की डायन बताकर कथित रूप से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकार की टीम ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर तत्काल सहायता उपलब्ध कराई। प्रशासन ने दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया है।
- कोटेगसेरा गांव, मुरकुंडा पंचायत में अंधविश्वास से जुड़ी घटना सामने आई।
- 65 वर्षीय पालू खड़िया की डायन बताकर कथित रूप से पीट-पीटकर हत्या।
- मृतक की पत्नी सुगी देवी पर भी हमला, किसी तरह बचाकर भागीं।
- जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गुमला ने पीड़िता को 20 हजार रुपये और खाद्यान्न सहायता दी।
- BDO, CO, पुलिस अधिकारी, PLV और पंचायत प्रतिनिधि रहे मौजूद।
गुमला जिले के ग्राम कोटेगसेरा, पंचायत मुरकुंडा में अंधविश्वास के कारण एक वृद्ध व्यक्ति की हत्या का मामला सामने आया है। घटना बीते बुधवार रात की बताई जा रही है, जहां 65 वर्षीय पालू खड़िया को कुछ लोगों द्वारा डायन बताकर बेरहमी से पीटा गया, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई और प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।
डायन के आरोप में हुई वृद्ध की हत्या
जानकारी के अनुसार, कोटेगसेरा गांव निवासी पालू खड़िया पर कुछ लोगों ने डायन होने का आरोप लगाकर हमला किया। आरोप है कि उनके साथ मारपीट की गई, जिसमें गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौत हो गई।
इस घटना में उनकी पत्नी सुगी देवी भी हमले की शिकार हुईं। आरोपियों ने उन पर भी हमला किया, लेकिन उन्होंने किसी तरह वहां से निकलकर अपनी जान बचाई। घटना ने एक बार फिर समाज में फैली अंधविश्वास और डायन प्रथा जैसी कुप्रथाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने पहुंचाई तत्काल मदद
घटना की जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), गुमला की टीम पीड़ित परिवार की सहायता के लिए आगे आई।
शुक्रवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गुमला के सचिव श्री रामकुमार लाल गुप्ता ने पीड़िता सुगी देवी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने तत्काल राहत के रूप में पीड़िता को 20 हजार रुपये का चेक और एक बोरी खाद्यान्न उपलब्ध कराया।
इस सहायता का उद्देश्य घटना से प्रभावित परिवार को तत्काल राहत देना और उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग करना है।
पीड़ित परिवार को सरकारी योजनाओं से जोड़ने का आश्वासन
पीड़िता सुगी देवी से बातचीत करते हुए सचिव रामकुमार लाल गुप्ता ने कहा कि यदि परिवार सरकार द्वारा संचालित किसी भी कल्याणकारी योजना से वंचित है, तो प्रशासन के सहयोग से उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाने की पहल की जाएगी।
उन्होंने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया कि उन्हें कानूनी सहायता और सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि किसी भी अफवाह या झूठे आरोप के आधार पर कानून अपने हाथ में न लें।
प्रशासन ने दोषियों पर कार्रवाई का दिया भरोसा
घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है। अधिकारियों ने कहा कि दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने ग्रामीणों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाह से बचने की अपील की है। साथ ही लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि डायन प्रथा जैसी कुरीतियां समाज के लिए गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं।
मौके पर मौजूद रहे अधिकारी और जनप्रतिनिधि
पीड़ित परिवार को सहायता प्रदान करने के दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), अंचल अधिकारी (CO), पुलिस प्रशासन के अधिकारी एवं कर्मी, पारा विधिक स्वयंसेवक (PLV) तथा पंचायत के मुखिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
सभी अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को हरसंभव सहयोग देने और क्षेत्र में सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता जरूरी
डायन के नाम पर हिंसा झारखंड के कई ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से सामाजिक समस्या बनी हुई है। विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए शिक्षा, जागरूकता और कानूनी जानकारी का प्रसार जरूरी है।
ग्रामीण समाज में किसी व्यक्ति पर बिना प्रमाण आरोप लगाकर हिंसा करना न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि कानूनन गंभीर अपराध भी है। ऐसे मामलों में समाज के हर वर्ग को जिम्मेदारी के साथ आगे आना होगा।
न्यूज़ देखो: अंधविश्वास के खिलाफ मजबूत सामाजिक चेतना की जरूरत
गुमला की यह घटना समाज में मौजूद अंधविश्वास की गंभीर चुनौती को सामने लाती है। प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा पीड़ित परिवार तक तत्काल सहायता पहुंचाना राहत भरा कदम है, लेकिन ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जमीनी स्तर पर जागरूकता अभियान और सामाजिक भागीदारी जरूरी है।
कानून व्यवस्था के साथ-साथ समाज की सोच में बदलाव भी आवश्यक है। सवाल यह भी है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डायन प्रथा जैसी कुरीतियों को खत्म करने के लिए चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रम कितने प्रभावी हैं और उन्हें और मजबूत कैसे बनाया जा सकता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अंधविश्वास छोड़ जागरूक समाज की ओर बढ़ने का संकल्प
समाज की असली ताकत आपसी विश्वास, सहयोग और मानवता में है। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अफवाह या अंधविश्वास के आधार पर हिंसा न केवल एक परिवार को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि पूरे समाज को कमजोर करती है।
जरूरत है कि हर नागरिक ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाए और कानून व सामाजिक जिम्मेदारी को समझे। जागरूकता ही वह माध्यम है जो कुरीतियों को समाप्त कर सकती है।
अपने आसपास होने वाली ऐसी घटनाओं की जानकारी संबंधित प्रशासन तक पहुंचाएं, पीड़ितों के सहयोग के लिए आगे आएं और समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा दें।
अपनी राय कमेंट करें, इस खबर को साझा करें और अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता फैलाने में सहयोग करें।

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