#महुआडांड़ #महिला_सशक्तिकरण : संघर्ष और मेहनत से बेटी के सपनों को दी नई उड़ान।
लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड स्थित रामपुर गांव की सुमन शालिनी तिर्की आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं। मजदूरी कर परिवार चलाने वाली सुमन ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी बेटी की पढ़ाई जारी रखी और उसे उच्च शिक्षा दिलाने का संकल्प पूरा किया। मनरेगा महिला मेट के रूप में जुड़ने के बाद उन्होंने डिजिटल कार्यों में दक्षता हासिल कर ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना शुरू किया। उनकी मेहनत और आत्मनिर्भरता अब पूरे क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन रही है।
- रामपुर गांव की सुमन शालिनी तिर्की बनीं ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा।
- मजदूरी कर बेटी को दिला रहीं रांची में बीएससी नर्सिंग की शिक्षा।
- मनरेगा महिला मेट बनकर ग्रामीण मजदूरों का कर रहीं ई-केवाईसी।
- अब तक करीब 50 मजदूरों को योजनाओं से जोड़ चुकी हैं सुमन।
- बकरी पालन और व्यापार से परिवार की आर्थिक स्थिति हुई मजबूत।
- रंजीत भेंगरा ने सुमन को महिला सशक्तिकरण की मिसाल बताया।
महुआडांड़ प्रखंड के रामपुर गांव की रहने वाली सुमन शालिनी तिर्की आज ग्रामीण क्षेत्र की उन महिलाओं में शामिल हो चुकी हैं, जिन्होंने संघर्षों के बीच अपने सपनों और जिम्मेदारियों दोनों को मजबूती से निभाया। आर्थिक तंगी, सीमित संसाधन और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने परिवार के साथ-साथ समाज के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया।
मजदूरी कर बेटी को दिला रहीं उच्च शिक्षा
सुमन शालिनी तिर्की का जीवन कभी बेहद साधारण और संघर्षों से भरा हुआ था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें पति कुलदीप लकड़ा के साथ मजदूरी करनी पड़ती थी। लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई को कभी बाधित नहीं होने दिया।
पति-पत्नी ने दिन-रात मेहनत कर अपनी बेटी को अंग्रेज़ी माध्यम विद्यालय में शिक्षा दिलाई। वर्तमान में उनकी बेटी रांची में बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है। गांव की महिलाओं के लिए यह उदाहरण बेहद प्रेरणादायक माना जा रहा है कि सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा के प्रति समर्पण कैसे भविष्य बदल सकता है।
मनरेगा महिला मेट बनने से बदली जिंदगी
सुमन के जीवन में बड़ा बदलाव तब आया जब वे लीड्स संस्था के सहयोग से मनरेगा महिला मेट के रूप में जुड़ीं। शुरुआत में उन्हें मोबाइल चलाने तक की जानकारी नहीं थी, लेकिन सीखने की इच्छा और मेहनत ने उन्हें डिजिटल कार्यों में दक्ष बना दिया।
आज वही सुमन मनरेगा मजदूरों का ई-केवाईसी कर रही हैं और ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने का काम कर रही हैं। अब तक वे लगभग 50 मजदूरों का ई-केवाईसी सफलतापूर्वक कर चुकी हैं।
सुमन शालिनी तिर्की ने कहा: “शुरुआत में मुझे बहुत डर लगता था, लेकिन सीखने की इच्छा ने मुझे आगे बढ़ाया। आज मैं चाहती हूं कि गांव की हर महिला आत्मनिर्भर बने।”
बकरी पालन से मजबूत हुई आर्थिक स्थिति
सिर्फ मनरेगा कार्य तक सीमित न रहकर सुमन और उनके पति ने बकरी पालन और बकरा व्यापार को भी आजीविका का माध्यम बनाया। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कहीं बेहतर हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि सुमन ने यह साबित किया है कि मेहनत और सही दिशा में प्रयास से गांव में रहकर भी आत्मनिर्भर बना जा सकता है। उनकी सफलता से आसपास की महिलाएं भी स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक हो रही हैं।
ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
सुमन की कहानी अब महुआडांड़ क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल बन चुकी है। गांव की कई महिलाएं उनसे प्रेरित होकर स्वयं सहायता समूह, सरकारी योजनाओं और स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़ने लगी हैं।
राज्य परियोजना समन्वयक रंजीत भेंगरा ने भी सुमन के कार्यों की सराहना की।
रंजीत भेंगरा ने कहा: “सुमन शालिनी तिर्की जैसी महिलाएं ग्रामीण समाज में बदलाव की नई मिसाल हैं। उनका संघर्ष, आत्मविश्वास और मेहनत दूसरी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देता है।”
उन्होंने कहा कि ऐसी महिलाएं न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गांव और समाज के विकास की मजबूत कड़ी बनती हैं।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
सुमन शालिनी तिर्की की कहानी यह दिखाती है कि संसाधनों की कमी किसी इंसान के सपनों को रोक नहीं सकती। यदि मेहनत, धैर्य और सीखने की इच्छा हो तो गांव की एक साधारण महिला भी समाज में बदलाव की मिसाल बन सकती है।
उनकी यात्रा केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास और सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुकी है।
न्यूज़ देखो: गांव की महिलाओं के लिए उम्मीद की नई रोशनी
सुमन शालिनी तिर्की जैसी महिलाएं यह साबित करती हैं कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ और आत्मविश्वास मिल जाए तो ग्रामीण समाज में बड़ा बदलाव संभव है। शिक्षा, आत्मनिर्भरता और तकनीकी जागरूकता के माध्यम से महिलाएं अब परिवार की जिम्मेदारी के साथ समाज का नेतृत्व भी कर रही हैं। ऐसी प्रेरक कहानियां ग्रामीण भारत की नई तस्वीर पेश करती हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सपनों को उड़ान देने के लिए हौसला सबसे जरूरी है
परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मेहनत और विश्वास इंसान को नई पहचान दिला सकते हैं।
गांव की हर बेटी को शिक्षा और हर महिला को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलना चाहिए।
यदि आपके आसपास भी कोई ऐसी प्रेरणादायक महिला है, तो उसकी कहानी लोगों तक पहुंचाइए।
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