#हुसैनाबाद #कुपोषण_मुक्ति : एमटीसी में कम भर्ती पर स्वास्थ्य विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए।
हुसैनाबाद अनुमंडलीय अस्पताल में आयोजित समीक्षा बैठक में कुपोषण उपचार केंद्र (एमटीसी) में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की कम भर्ती पर चिंता जताई गई। उपाधीक्षक डॉ. एसके. रवि ने बीटीटी और सहिया साथियों को तीन दिनों के भीतर पात्र बच्चों की पहचान कर उन्हें केंद्र में भर्ती कराने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि में प्रगति नहीं होने पर संबंधित कर्मियों का मानदेय स्थगित किया जा सकता है। बैठक में कुपोषण मुक्त हुसैनाबाद के लक्ष्य को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई।
- अनुमंडलीय अस्पताल हुसैनाबाद में कुपोषण को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित।
- एमटीसी में गंभीर कुपोषित बच्चों की कम भर्ती पर चिंता व्यक्त की गई।
- सहियाओं को 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों की जांच का निर्देश।
- 11.5 सेंटीमीटर से कम बांह परिधि वाले बच्चों की पहचान कर भर्ती कराने को कहा गया।
- तीन दिनों में प्रगति नहीं होने पर बीटीटी और सहिया का मानदेय स्थगित करने की चेतावनी।
- बैठक में डॉ. एसके. रवि, विभूति कुमार गुप्ता और बीरेंद्र पासवान सहित कई स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।
हुसैनाबाद अनुमंडलीय अस्पताल में कुपोषण के खिलाफ अभियान को तेज करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। उपाधीक्षक डॉ. एसके. रवि की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में सभी बीटीटी (ब्लॉक प्रशिक्षण दल) और सहिया साथियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें समय पर कुपोषण उपचार केंद्र (एमटीसी) तक पहुंचाना और भर्ती प्रक्रिया को गति देना था।
बैठक के दौरान एमटीसी में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की बेहद कम संख्या में भर्ती होने पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। अधिकारियों ने कहा कि यह स्थिति इस बात का संकेत है कि कई जरूरतमंद बच्चे उपचार से वंचित रह जा रहे हैं, जो स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है।
एमटीसी में कम भर्ती पर जताई चिंता
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि कुपोषण उपचार केंद्र बच्चों के उपचार और पोषण सुधार के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बावजूद यदि पात्र बच्चे केंद्र तक नहीं पहुंच रहे हैं तो इसके कारणों की पहचान कर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि क्षेत्र स्तर पर सक्रिय निगरानी और जागरूकता अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक बच्चों को उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
घर-घर जांच कर बच्चों की पहचान का निर्देश
उपाधीक्षक डॉ. एसके. रवि ने सभी सहिया साथियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में छह माह से पांच वर्ष तक के बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करें।
उन्होंने कहा कि म्यूएक (MUAC) फीता के माध्यम से बच्चों की बांह की परिधि मापी जाए और गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान की जाए।
उपाधीक्षक डॉ. एसके. रवि ने कहा: “गंभीर कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करना हम सभी की प्राथमिक जिम्मेदारी है।”
किन बच्चों को माना जाएगा गंभीर कुपोषित
बैठक में बताया गया कि जिन बच्चों की बांह की परिधि 11.5 सेंटीमीटर से कम हो अथवा जिनके दोनों पैरों में सूजन दिखाई दे, उन्हें गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) की श्रेणी में माना जाएगा।
ऐसे बच्चों को तत्काल चिन्हित कर कुपोषण उपचार केंद्र में भर्ती कराने की प्रक्रिया सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
अभिभावकों को जागरूक करने पर जोर
स्वास्थ्य विभाग ने माना कि कई मामलों में अभिभावक बच्चों को 14 दिनों तक अस्पताल में रखने को लेकर संकोच करते हैं, जिसके कारण भर्ती प्रक्रिया प्रभावित होती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए सहिया साथियों और बीटीटी को निर्देश दिया गया कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाएं और अभिभावकों को एमटीसी की सुविधाओं के बारे में जानकारी दें।
उपचार और सुविधाएं पूरी तरह निःशुल्क
बैठक में बताया गया कि कुपोषण उपचार केंद्र में भर्ती बच्चों को विशेष पौष्टिक आहार, दवाइयां और चिकित्सा सुविधाएं पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।
इसके साथ ही बच्चे के साथ रहने वाले अभिभावक को भोजन, आवास तथा मजदूरी हानि के लिए निर्धारित सहायता भी प्रदान की जाती है।
अधिकारियों ने कहा: “एमटीसी में उपचार के दौरान बच्चे और अभिभावक दोनों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, इसलिए लोगों को बिना संकोच उपचार के लिए आगे आना चाहिए।”
साप्ताहिक निगरानी और समीक्षा के निर्देश
बैठक में बीटीटी और सहिया साथियों को नियमित निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्हें प्रत्येक सप्ताह यह समीक्षा करने का निर्देश दिया गया कि कितने बच्चों की पहचान की गई और उनमें से कितनों को एमटीसी भेजा गया।
इसके अलावा जिन परिवारों ने बच्चों को भर्ती कराने से इनकार किया है, उनके घर जाकर विशेष परामर्श और जागरूकता अभियान चलाने को कहा गया।
मानदेय स्थगित करने की चेतावनी
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु उपाधीक्षक द्वारा जारी की गई सख्त चेतावनी रही। डॉ. एसके. रवि ने स्पष्ट कहा कि यदि आगामी तीन दिनों के भीतर एमटीसी में पात्र बच्चों की भर्ती सुनिश्चित नहीं होती है, तो संबंधित बीटीटी और सहिया साथियों का मानदेय स्थगित कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कुपोषण के खिलाफ अभियान को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जा सकता और सभी कर्मियों को पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करना होगा।
कई अधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी रहे उपस्थित
बैठक में प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक विभूति कुमार गुप्ता, एसटीटी सदस्य बीरेंद्र पासवान, क्षेत्रीय समन्वयक, बीटीटी के सदस्य तथा बड़ी संख्या में सहिया साथी उपस्थित रहे।
सभी स्वास्थ्यकर्मियों से हुसैनाबाद को कुपोषण मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया गया।
न्यूज़ देखो: कुपोषण के खिलाफ जमीनी कार्रवाई ही लाएगी बदलाव
कुपोषण केवल स्वास्थ्य का नहीं बल्कि सामाजिक और विकास से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। समय पर पहचान और उपचार से बच्चों का जीवन बचाया जा सकता है और उनका भविष्य बेहतर बनाया जा सकता है। हुसैनाबाद में स्वास्थ्य विभाग की सख्ती यह दर्शाती है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से ले रहा है। हालांकि लक्ष्य की वास्तविक सफलता तभी संभव होगी जब स्वास्थ्यकर्मी, अभिभावक और समुदाय मिलकर इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
स्वस्थ बचपन ही मजबूत समाज की पहचान
हर बच्चे को बेहतर पोषण और स्वस्थ जीवन का अधिकार है। कुपोषण के खिलाफ लड़ाई केवल स्वास्थ्य विभाग की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। जागरूकता, समय पर जांच और उपचार से कई बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।
अपने आसपास के बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर ध्यान दें, जरूरतमंद परिवारों को जागरूक करें और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करें। इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में दें और कुपोषण मुक्त समाज बनाने के अभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

🗣️ Join the Conversation!
What are your thoughts on this update? Read what others are saying below, or share your own perspective to keep the discussion going. (Please keep comments respectful and on-topic).