#हुसैनाबाद #पारिवारिक_मूल्य : पूर्व मुखिया की दूरदर्शिता और संस्कारों को परिजन आज भी याद करते हैं।
पलामू जिले के हैदरनगर प्रखंड स्थित भाई बिगहा गांव के पूर्व मुखिया स्वर्गीय हाजी अब्दुल समद खान को उनके सामाजिक योगदान, पारिवारिक मूल्यों और दूरदर्शी निर्णयों के लिए आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है। वर्ष 2010 में उन्होंने अपनी संपत्ति का विधिसम्मत बंटवारा कर पारिवारिक एकता का संदेश दिया था। परिजनों का कहना है कि उनके द्वारा स्थापित आदर्श और संस्कार आज भी परिवार को मार्गदर्शन दे रहे हैं। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उनके जीवन मूल्यों और समाज के प्रति योगदान को स्मरण किया गया।
- स्व. हाजी अब्दुल समद खान को सामाजिक योगदान और पारिवारिक मूल्यों के लिए याद किया गया।
- वर्ष 2010 में पंजीकृत वसीयतनामा के माध्यम से संपत्ति का बंटवारा किया था।
- तीनों पुत्रों अब्दुल हक खान, वसी आलम खान और महबूब आलम खान के बीच संपत्ति विभाजित की गई थी।
- परिजनों ने उनके एकता, भाईचारे और संस्कारों को प्रेरणादायक बताया।
- श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पुत्रों ने तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर नमन किया।
- वर्ष 2017 में निधन के बाद भी उनके विचार परिवार का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
पलामू जिले के हुसैनाबाद अनुमंडल अंतर्गत हैदरनगर प्रखंड के भाई बिगहा गांव के पूर्व मुखिया स्वर्गीय हाजी अब्दुल समद खान को उनके सामाजिक सरोकारों, दूरदर्शी सोच और पारिवारिक मूल्यों के लिए आज भी सम्मानपूर्वक याद किया जाता है। परिवार और गांव के लोगों का मानना है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में जो आदर्श स्थापित किए, वे आज भी समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का विषय बने हुए हैं।
हाल ही में आयोजित एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उनके परिजनों ने उनके जीवन, कार्यों और विचारों को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम के दौरान उनके द्वारा स्थापित पारिवारिक एकता, जिम्मेदारी और सामाजिक सद्भाव के मूल्यों पर विशेष चर्चा की गई।
दूरदर्शी निर्णय ने दिया एकता का संदेश
परिजनों के अनुसार स्वर्गीय हाजी अब्दुल समद खान ने वर्ष 2010 में अपनी निजी संपत्ति का विधिसम्मत पंजीकृत वसीयतनामा तैयार कर अपने तीनों पुत्रों—अब्दुल हक खान, वसी आलम खान और महबूब आलम खान उर्फ सज्जू खान—के बीच संपत्ति का स्पष्ट बंटवारा कर दिया था।
परिवार का कहना है कि यह निर्णय केवल संपत्ति के बंटवारे तक सीमित नहीं था, बल्कि भविष्य में किसी भी प्रकार के पारिवारिक विवाद और मतभेद की संभावनाओं को समाप्त करने की दूरदर्शी सोच का परिचायक था। इससे परिवार में आपसी विश्वास और सौहार्द बनाए रखने में मदद मिली।
प्रेम, भाईचारे और संस्कारों को दी प्राथमिकता
स्वर्गीय हाजी अब्दुल समद खान हमेशा परिवार में प्रेम, एकता और भाईचारे के पक्षधर रहे। उन्होंने अपने बच्चों को केवल शिक्षा ही नहीं दी, बल्कि जीवन के नैतिक मूल्यों, जिम्मेदारियों और सामाजिक दायित्वों का भी बोध कराया।
परिजनों ने बताया कि वे समाज में सौहार्दपूर्ण वातावरण और पारिवारिक समरसता को सबसे अधिक महत्व देते थे। उनके जीवन का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उन्नति नहीं, बल्कि परिवार और समाज को साथ लेकर आगे बढ़ना था।
2017 में हुआ निधन, लेकिन विचार आज भी जीवित
वर्ष 2017 में उनके निधन के बाद परिवार को एक अपूरणीय क्षति हुई, लेकिन उनके विचार और सिद्धांत आज भी परिवार के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं।
परिवार के सदस्यों का कहना है कि कठिन परिस्थितियों में भी वे उनके बताए रास्तों और मूल्यों का अनुसरण करते हैं। यही कारण है कि आज भी उनके व्यक्तित्व की चर्चा सम्मान के साथ की जाती है।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में किया गया नमन
पिता की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान उनके पुत्रों ने उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पिता केवल परिवार के मुखिया नहीं होते, बल्कि बच्चों के जीवन के पहले शिक्षक, मार्गदर्शक और संरक्षक भी होते हैं।
उन्होंने कहा कि पिता अपने बच्चों को जीवन की चुनौतियों का सामना करना, जिम्मेदारियों का निर्वहन करना और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना सिखाते हैं।
परिजनों ने कहा: “पिता केवल परिवार का नेतृत्व नहीं करते, बल्कि अपने अनुभव, संस्कार और मार्गदर्शन से आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी संवारते हैं।”
चरित्र निर्माण में पिता की भूमिका महत्वपूर्ण
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि एक पुत्र अपने पिता के व्यक्तित्व, संघर्ष और कार्यशैली से प्रेरणा लेकर अपना चरित्र निर्माण करता है। पिता की उपस्थिति बच्चों को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सुरक्षा का एहसास कराती है।
उनके मार्गदर्शन से ही बच्चे आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बन पाते हैं। पिता द्वारा दिए गए संस्कार और जीवन मूल्य जीवनभर व्यक्ति के साथ रहते हैं।
भौतिक नहीं, नैतिक जिम्मेदारियों का भी निर्वहन
परिजनों ने कहा कि बच्चों के प्रति पिता का दायित्व केवल उनकी भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति तक सीमित नहीं होता। उन्हें नैतिक मूल्य, अच्छे संस्कार और भावनात्मक संबल प्रदान करना भी उतना ही आवश्यक है।
स्वर्गीय हाजी अब्दुल समद खान ने अपने जीवन में इन सभी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया और अपने परिवार को एकजुट रखने का उदाहरण प्रस्तुत किया।
समाज के लिए बने प्रेरणा स्रोत
स्थानीय लोगों का मानना है कि स्वर्गीय हाजी अब्दुल समद खान का जीवन केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं था। एक जनप्रतिनिधि और समाजसेवी के रूप में उन्होंने समाज में सकारात्मक सोच, आपसी सौहार्द और जिम्मेदारी का संदेश दिया।
उनके जीवन से यह सीख मिलती है कि दूरदर्शी निर्णय और मजबूत पारिवारिक मूल्य आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी विरासत बन सकते हैं।
न्यूज़ देखो: परिवार की मजबूती की असली पहचान हैं संस्कार और दूरदर्शिता
आज के समय में जब पारिवारिक विवाद और सामाजिक विघटन की घटनाएं बढ़ती दिखाई देती हैं, ऐसे में स्वर्गीय हाजी अब्दुल समद खान का जीवन एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने समय रहते पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर यह संदेश दिया कि दूरदर्शी सोच और पारदर्शिता परिवार को मजबूत बनाती है। संपत्ति से अधिक महत्वपूर्ण परिवार की एकता, विश्वास और संस्कार होते हैं। यही मूल्य किसी व्यक्ति को समाज में लंबे समय तक सम्मान और पहचान दिलाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
विरासत केवल संपत्ति नहीं, संस्कार भी होती है
जीवन में अर्जित धन-संपत्ति एक पीढ़ी को सहारा दे सकती है, लेकिन अच्छे संस्कार और आदर्श कई पीढ़ियों का भविष्य संवारते हैं। परिवार में प्रेम, विश्वास और आपसी सम्मान ही वास्तविक समृद्धि की पहचान है।
अपने बुजुर्गों के अनुभवों और मूल्यों को सम्मान दें, क्योंकि वही जीवन की सबसे बड़ी सीख होते हैं। इस प्रेरक खबर को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें, अपनी राय कमेंट में लिखें और परिवार में एकता व सद्भाव के मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लें।

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