
#महुआडांड़ #आवास_योजना : सरकारी लापरवाही से पीड़ित परिवार बेघर — दो साल से नहीं मिली सहायता।
लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड में एक गरीब परिवार को सरकारी आवास योजना का लाभ नहीं मिलने का मामला सामने आया है। जियो टैगिंग के दो साल बाद भी घर का निर्माण नहीं हुआ और अब कच्चा मकान ढह गया। पीड़ित जगदीश लकड़ा ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। यह घटना योजनाओं की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
- जगदीश लकड़ा का घर दो साल बाद भी नहीं बन पाया।
- जियो टैगिंग के बाद भी नहीं मिली कोई स्वीकृति या राशि।
- लगातार अनदेखी के कारण कच्चा घर गिरा।
- पीड़ित ने लातेहार डीसी से लगाई गुहार।
- मुखिया मगदली टोप्पो ने जल्द लाभ दिलाने का भरोसा दिया।
लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत सोहर पंचायत के आराहंस टोला केराखाड़ में सरकारी योजनाओं की जमीनी सच्चाई उजागर हुई है। यहां के निवासी जगदीश लकड़ा पिछले दो वर्षों से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर मिलने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उन्हें अब तक कोई लाभ नहीं मिला। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब उनका कच्चा मकान भी ढह गया, जिससे पूरा परिवार बेघर हो गया है।
जियो टैगिंग के बाद भी नहीं मिला लाभ
जानकारी के अनुसार, लगभग दो वर्ष पूर्व जगदीश लकड़ा के घर का जियो टैग किया गया था। यह प्रक्रिया आमतौर पर आवास योजना के तहत स्वीकृति की दिशा में पहला कदम होती है। लेकिन इसके बाद न तो उन्हें कोई स्वीकृति मिली और न ही निर्माण के लिए कोई आर्थिक सहायता दी गई।
हर बरसात में बढ़ती गई परेशानी
जगदीश लकड़ा का कच्चा मकान हर साल बरसात में पानी से घिर जाता था। धीरे-धीरे मकान की हालत खराब होती गई, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अंततः हालात इतने खराब हो गए कि उनका घर पूरी तरह गिर गया और परिवार को खुले आसमान के नीचे रहने की नौबत आ गई।
पीड़ित ने प्रशासन से लगाई गुहार
अपनी समस्या से परेशान जगदीश लकड़ा ने लातेहार के उपायुक्त से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि उन्हें जल्द से जल्द आवास योजना का लाभ दिया जाए ताकि वे अपने परिवार के साथ सुरक्षित रह सकें।
पंचायत प्रतिनिधि का आश्वासन
इस मामले में पंचायत की मुखिया मगदली टोप्पो ने कहा कि पीड़ित को जल्द ही योजना का लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
मुखिया मगदली टोप्पो ने कहा: “हम प्रयास कर रहे हैं कि जल्द से जल्द जगदीश लकड़ा को आवास योजना का लाभ मिले और उनकी समस्या का समाधान हो।”
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले दो वर्षों से केवल आश्वासन ही मिल रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
योजनाओं की पारदर्शिता पर उठे सवाल
यह मामला सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और कार्यान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जब जियो टैगिंग जैसी प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, तो इसके बाद लाभार्थी को योजना का फायदा क्यों नहीं मिला, यह एक बड़ा प्रश्न है।
न्यूज़ देखो: कागजों में योजनाएं, जमीनी हकीकत में लापरवाही
महुआडांड़ की यह घटना बताती है कि सरकारी योजनाएं कागजों पर तो प्रभावी दिखती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी स्थिति चिंताजनक है। जियो टैगिंग के बाद भी यदि लाभार्थी को मदद नहीं मिलती, तो यह व्यवस्था की बड़ी विफलता है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे मामलों की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करे और पीड़ित को तुरंत राहत दे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अब समय है जिम्मेदारी निभाने का
ऐसी घटनाएं हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हम सच में विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जरूरत है कि हम सभी जागरूक बनें और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं।
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