#खलारी #विस्थापन_आंदोलन : रैयतों ने रोजगार नहीं मिलने पर रेल फेज-वन बाधित करने का ऐलान किया।
खलारी क्षेत्र के हेसालोंग गंझु टोला में रैयत विस्थापित मोर्चा की बैठक में जमीन के बदले नौकरी की लंबित मांग को लेकर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई। ग्रामीणों का आरोप है कि सीसीएल प्रबंधन द्वारा बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद प्रभावित परिवारों को रोजगार नहीं मिला। बैठक में सर्वसम्मति से 22 जून 2026 से मैक्लुस्कीगंज–पिपरवार रेल फेज-वन बाधित करने की चेतावनी दी गई। इस निर्णय से क्षेत्र में आंदोलन की संभावनाएं तेज हो गई हैं।
- हेसालोंग गंझु टोला में रैयत विस्थापित मोर्चा की बैठक आयोजित हुई।
- जमीन के बदले नौकरी की मांग पूरी नहीं होने पर 22 जून से रेल फेज-वन बाधित करने की चेतावनी दी गई।
- ग्रामीणों ने सीसीएल प्रबंधन पर केवल आश्वासन देने और कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया।
- प्रभावित परिवारों ने कहा कि वर्षों से कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद समाधान नहीं मिला।
- आंदोलन के दौरान मैक्लुस्कीगंज–पिपरवार रेल लाइन से कोयला ढुलाई रोकने की बात कही गई।
- बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों एवं विस्थापित परिवारों ने भाग लिया।
खलारी क्षेत्र में एक बार फिर जमीन के बदले नौकरी का मुद्दा गरमा गया है। रैयत विस्थापित मोर्चा के बैनर तले आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने सीसीएल प्रबंधन के खिलाफ खुलकर नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना है कि भूमि अधिग्रहण के बाद प्रभावित परिवारों को रोजगार देने का वादा किया गया था, लेकिन लंबे समय बाद भी यह वादा पूरा नहीं हुआ। इसी कारण अब आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया गया है।
रोजगार के वादे पर फिर उठा सवाल
बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि भूमि अधिग्रहण के दौरान प्रभावित परिवारों को रोजगार देने का भरोसा दिलाया गया था। इसी भरोसे के आधार पर लोगों ने अपनी जमीनें परियोजना के लिए उपलब्ध कराई थीं। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी बड़ी संख्या में रैयत परिवार रोजगार से वंचित हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार ज्ञापन सौंपने, धरना-प्रदर्शन करने और अधिकारियों से मुलाकात करने के बावजूद कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। इससे प्रभावित परिवारों में निराशा और असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
आंदोलन की चेतावनी, रेल फेज-वन होगा निशाने पर
बैठक को संबोधित करते हुए रैयत विस्थापित मोर्चा के रोहिणी करकट्टा ओसीपी शाखा अध्यक्ष शिवनारायण लोहरा ने कहा कि प्रबंधन द्वारा लगातार आश्वासन दिए गए, लेकिन रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में गंभीर पहल नहीं हुई।
शिवनारायण लोहरा ने कहा: “जमीन अधिग्रहण के बाद प्रभावित परिवारों ने कई बार आंदोलन किया। हर बार प्रबंधन ने जल्द नौकरी देने का भरोसा दिया, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।”
उन्होंने कहा कि अब विस्थापित परिवार केवल आश्वासन सुनने को तैयार नहीं हैं। यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
कोयला ढुलाई रोकने की चेतावनी
बैठक में उपस्थित ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि रोजगार संबंधी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो 22 जून से मैक्लुस्कीगंज–पिपरवार रेल फेज-वन पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक प्रभावित परिवारों को नौकरी नहीं मिलेगी, तब तक रेल लाइन से कोयला ढुलाई का संचालन नहीं होने दिया जाएगा।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि उनकी मांगें नई नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से लंबित हैं। कई परिवार ऐसे हैं जो आज भी रोजगार और पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका मानना है कि परियोजनाओं से उत्पादन और राजस्व बढ़ा है, लेकिन प्रभावित परिवारों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया।
वर्षों से समाधान की प्रतीक्षा में विस्थापित परिवार
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि रैयत और विस्थापित परिवार लगातार सीसीएल तथा अन्य संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। ग्रामीणों ने कहा कि यदि समय रहते प्रबंधन ने पहल नहीं की तो आंदोलन के कारण क्षेत्र में कोयला परिवहन प्रभावित हो सकता है।
बैठक में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि रोजगार उनकी प्राथमिक मांग है और इसे लेकर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन और प्रबंधन से शीघ्र वार्ता कर समाधान निकालने की अपील भी की।
बड़ी संख्या में ग्रामीण हुए शामिल
बैठक में कृष्णा भोगता, हेमलाल गंझू, रमेश साव, ताहिर अंसारी, सुनील मुंडा, विनय टोप्पो, सुकरा गंझू, भोला गंझू, सीता देवी, राधिका कुमारी, अरविंद गंझू, दक्ष भोगता, चुलबुल गंझू, रूपना गंझू, सुलेन्द्र गंझू और तपन भोगता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं विस्थापित परिवारों के सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान सभी ने एकजुटता दिखाते हुए मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की और आंदोलन की रणनीति पर सहमति जताई।
न्यूज़ देखो: रोजगार और पुनर्वास के सवाल का इंतजार कब तक?
जमीन अधिग्रहण और विस्थापन से जुड़े मामलों में रोजगार का मुद्दा अक्सर सबसे संवेदनशील रहता है। यदि प्रभावित परिवारों को समय पर रोजगार और पुनर्वास नहीं मिलता, तो असंतोष आंदोलन का रूप ले लेता है। खलारी क्षेत्र में उभरता यह विवाद भी इसी दिशा की ओर संकेत कर रहा है। अब नजर इस बात पर होगी कि सीसीएल प्रबंधन और प्रशासन आंदोलन की चेतावनी से पहले समाधान की दिशा में क्या कदम उठाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संवाद और समाधान से ही निकलेगा रास्ता
विकास परियोजनाओं की सफलता तभी सार्थक होती है जब उससे प्रभावित लोगों को भी न्याय मिले।
रोजगार, पुनर्वास और अधिकारों से जुड़े मुद्दों का समय पर समाधान आवश्यक है।
सकारात्मक संवाद किसी भी बड़े टकराव को रोक सकता है और क्षेत्र में विकास की गति बनाए रख सकता है।
यदि आप भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखते हैं, तो उसे खुलकर साझा करें।
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