#गुमला #श्रमदान_अभियान : युवाओं ने खराब सड़क की मरम्मत कर पेश की मिसाल।
गुमला जिले के पालकोट प्रखंड अंतर्गत बाघिमा पंचायत के अंबा टोली गांव में युवाओं ने श्रमदान कर जर्जर सड़क की मरम्मत की। बरसात में सड़क की खराब स्थिति से परेशान ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से कई बार गुहार लगाई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद युवा जागृति क्लब अंबा टोली के युवाओं ने खुद आगे आकर सड़क को चलने योग्य बनाया। युवाओं के इस प्रयास की क्षेत्र में सराहना हो रही है।
- अंबा टोली गांव के युवाओं ने श्रमदान कर खराब सड़क की मरम्मत की।
- बरसात में सड़क की बदहाल स्थिति से ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो रहा था।
- ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की मांग की थी।
- युवा जागृति क्लब अंबा टोली के सदस्यों ने गड्ढों को भरकर सड़क को चलने योग्य बनाया।
- स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सड़क खराब होने से सबसे अधिक परेशानी हो रही थी।
- ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी सड़क निर्माण कराने की मांग दोहराई।
गुमला जिले के पालकोट प्रखंड स्थित बाघिमा पंचायत के अंबा टोली गांव में रविवार को युवाओं ने सामाजिक जिम्मेदारी का अनूठा उदाहरण पेश किया। गांव की जर्जर सड़क से परेशान ग्रामीणों ने जब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से उम्मीद छोड़ दी, तब गांव के युवाओं ने खुद ही श्रमदान कर सड़क की मरम्मत करने का निर्णय लिया।
बरसात के दिनों में सड़क की हालत बेहद खराब हो जाती है। कीचड़ और गहरे गड्ढों के कारण लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो जाता है। गांव के लोगों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।
बरसात में गांव का संपर्क हो जाता है प्रभावित
ग्रामीणों के अनुसार अंबा टोली गांव की सड़क लंबे समय से बदहाल स्थिति में है। बारिश होने पर सड़क पर पानी भर जाता है और जगह-जगह कीचड़ हो जाता है। ऐसे में सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को उठानी पड़ती है।
गांव के लोगों ने बताया कि कई बार मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी दिक्कत होती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या वर्षों से बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार लोग केवल चुनाव के समय गांव पहुंचते हैं।
युवाओं ने शुरू किया श्रमदान अभियान
गांव की समस्या को देखते हुए युवा जागृति क्लब अंबा टोली के युवाओं ने रविवार को श्रमदान अभियान चलाया। युवाओं ने सामूहिक रूप से सड़क के गड्ढों को भरा और रास्ते को चलने योग्य बनाया।
इस दौरान युवाओं ने फावड़ा, कुदाल और अन्य संसाधनों की मदद से सड़क की मरम्मत की। ग्रामीणों ने भी इस कार्य में सहयोग किया और युवाओं के प्रयास की सराहना की।
ग्रामीण युवाओं ने कहा: “जब जनप्रतिनिधि और प्रशासन गांव की मूलभूत समस्याओं पर ध्यान नहीं देते, तब गांव के युवाओं को ही आगे आकर जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।”
चुनावी वादों पर ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
ग्रामीणों ने नेताओं और राजनीतिक दलों पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान गांव में विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांव की समस्याओं को भुला दिया जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में गांव के लोगों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से जल्द स्थायी सड़क निर्माण कराने की मांग की है।
इन युवाओं ने निभाई अहम भूमिका
सड़क मरम्मत अभियान में गांव के कई युवाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इनमें प्रमुख रूप से मंगरू खड़िया, माठा खड़िया, ननकू चिक बड़ाईक, सावन लोहरा, कंपाल लोहरा, प्रदीप खड़िया, रंजीत चिक बड़ाईक, सनीम किड़ो और अंजुम खड़िया शामिल रहे।
ग्रामीणों ने कहा कि युवाओं की यह पहल पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक है और इससे सामूहिक सहयोग की भावना मजबूत होती है।
क्षेत्र में हो रही युवाओं की सराहना
अंबा टोली के युवाओं द्वारा किए गए इस श्रमदान अभियान की पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारी समय पर निभाते, तो ग्रामीणों को स्वयं सड़क मरम्मत के लिए आगे नहीं आना पड़ता।
इसके बावजूद युवाओं ने जिस एकजुटता और जिम्मेदारी का परिचय दिया है, वह समाज के लिए सकारात्मक संदेश है।

न्यूज़ देखो: जब व्यवस्था चुप हो जाए, तब समाज आगे आता है
अंबा टोली गांव के युवाओं ने यह साबित कर दिया कि सामूहिक प्रयास से बड़ी समस्याओं का समाधान संभव है। हालांकि सड़क निर्माण सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन युवाओं का यह श्रमदान समाज में जागरूकता और जिम्मेदारी का मजबूत संदेश देता है। अब जरूरत इस बात की है कि प्रशासन गांव की इस मूलभूत समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
बदलाव की शुरुआत समाज की भागीदारी से होती है
यदि युवा जागरूक हों, तो गांव और समाज की तस्वीर बदली जा सकती है।
सिर्फ शिकायत करने के बजाय समाधान के लिए आगे आना ही सच्ची जिम्मेदारी है।
सामूहिक श्रमदान और सहयोग की भावना समाज को मजबूत बनाती है।
आइए, अपने गांव और आसपास की समस्याओं के समाधान में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
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