बालमुकुंद फैक्ट्री के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू, छंटनीग्रस्त मजदूरों की बहाली की मांग तेज

बालमुकुंद फैक्ट्री के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू, छंटनीग्रस्त मजदूरों की बहाली की मांग तेज

author News देखो Team
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#गिरिडीह #मजदूर_धरना : चार मजदूरों की छंटनी के विरोध में असंगठित मजदूर मोर्चा और माले का प्रदर्शन शुरू।

गिरिडीह के टुंडी रोड स्थित बालमुकुंद फैक्ट्री के बाहर गुरुवार से चार छंटनीग्रस्त मजदूरों की बहाली को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो गया। असंगठित मजदूर मोर्चा और भाकपा माले के समर्थन से मजदूर फैक्ट्री गेट के पास शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बिना कारण मजदूरों को काम से हटा दिया गया और प्रशासन से शिकायत के बावजूद कोई समाधान नहीं हुआ। मजदूरों ने बहाली के साथ श्रम कानूनों और स्थानीय रोजगार से जुड़ी कई मांगें भी उठाई हैं।

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  • बालमुकुंद फैक्ट्री के बाहर मजदूरों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू।
  • दिलीप राय, वीरेंद्र चौधरी, महताब अंसारी और मोहम्मद मिनहाज की बहाली की मांग।
  • धरने को असंगठित मजदूर मोर्चा और भाकपा माले का समर्थन।
  • मजदूरों ने 8 घंटे कार्य अवधि और न्यूनतम मजदूरी लागू करने की मांग उठाई।
  • स्थानीय लोगों को 75 प्रतिशत रोजगार देने की भी मांग।
  • फैक्ट्री से निकलने वाले प्रदूषण और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल।

गिरिडीह के टुंडी रोड, चतरो स्थित बालमुकुंद फैक्ट्री के बाहर गुरुवार सुबह से मजदूरों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो गया। धरने का नेतृत्व असंगठित मजदूर मोर्चा और भाकपा माले के स्थानीय नेताओं द्वारा किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी मजदूरों का आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन ने चार मजदूरों को बिना किसी स्पष्ट कारण के काम से निकाल दिया, जिसके बाद से वे लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं।

धरने पर बैठे मजदूरों में दिलीप राय, वीरेंद्र चौधरी, महताब अंसारी और मोहम्मद मिनहाज शामिल हैं। मजदूरों का कहना है कि उन्होंने फैक्ट्री प्रबंधन से दोबारा काम पर रखने की अपील की और प्रशासनिक अधिकारियों को भी पत्र दिया, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।

बहाली तक जारी रहेगा आंदोलन

धरना पर बैठे मजदूरों और संगठनों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक छंटनीग्रस्त मजदूरों को वापस काम पर नहीं रखा जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारी फैक्ट्री गेट के पास शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे हैं।

धरना स्थल पर असंगठित मजदूर मोर्चा के सचिव कन्हाई पांडे, अध्यक्ष किशोरी राय, कोषाध्यक्ष लखन कोल, दीपक गोस्वामी, सुनील ठाकुर, हुबलाल राय, तुलसी तुरी, प्रशादी राय, गुलाब कोल, भीम कोल, भिखारी राय, चंदन टुडू, लूटन दास, मोहन कोल, अरबिंद टुडू सहित कई लोग मौजूद रहे।

महिला प्रदर्शनकारियों में निमिया देवी, परवतिया देवी, करमी देवी, करनी देवी, सरिता, ललिता और लीला देवी भी धरने में शामिल रहीं।

मजदूरों ने रखीं सात प्रमुख मांगें

धरना पर बैठे मजदूरों ने केवल बहाली ही नहीं, बल्कि श्रमिक अधिकारों और क्षेत्रीय विकास से जुड़ी कई मांगें भी उठाईं। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि फैक्ट्री में काम के घंटे आठ किए जाएं और सभी मजदूरों को ईएसआई एवं पीएफ जैसी सुविधाएं दी जाएं।

मजदूरों ने झारखंड सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी लागू करने, 75 प्रतिशत स्थानीय मजदूरों को रोजगार देने और कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी की।

इसके अलावा फैक्ट्री से निकलने वाले कथित विषैले धुएं पर रोक लगाने तथा आसपास के आठ किलोमीटर क्षेत्र में स्कूल, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था करने की मांग उठाई गई।

मजदूर संगठनों ने दिया समर्थन

भाकपा माले और असंगठित मजदूर मोर्चा के नेताओं ने धरने को मजदूर अधिकारों की लड़ाई बताया। नेताओं का कहना है कि बिना उचित कारण मजदूरों को हटाना श्रमिक हितों के खिलाफ है।

माले नेता राजेश सिन्हा ने कहा: “सभी मजदूरों को एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना होगा। माले का संगठन हमेशा मजदूरों के साथ खड़ा रहेगा।”

उन्होंने बताया कि रांची में रहने के कारण वे पहले दिन धरना स्थल पर नहीं पहुंच सके, लेकिन अगले दिन से आंदोलन में शामिल होंगे।

फैक्ट्री प्रबंधन पर उठे सवाल

धरना के दौरान प्रदर्शनकारियों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर श्रम कानूनों की अनदेखी का आरोप लगाया। मजदूरों का कहना है कि क्षेत्र के लोगों को रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के नाम पर पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा है।

स्थानीय लोगों ने भी कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक सुरक्षा, पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारी के मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।

न्यूज़ देखो: मजदूर अधिकारों को लेकर बढ़ती आवाज

बालमुकुंद फैक्ट्री के बाहर शुरू हुआ यह धरना क्षेत्र में मजदूर अधिकारों और श्रम कानूनों को लेकर बढ़ती असंतोष की भावना को दर्शाता है। रोजगार, सुरक्षा और न्यूनतम मजदूरी जैसे मुद्दे लंबे समय से असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की प्रमुख मांग रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रबंधन और प्रशासन इस विवाद का समाधान किस तरह निकालते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अधिकारों की लड़ाई में एकजुटता सबसे बड़ी ताकत

मजदूर किसी भी उद्योग और समाज की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति होते हैं।
सम्मानजनक रोजगार, सुरक्षित कार्यस्थल और न्यायपूर्ण व्यवहार हर श्रमिक का अधिकार है।
जागरूक बनें, अपने अधिकारों को समझें और सकारात्मक बदलाव के लिए संगठित प्रयास करें।
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