
#पलामू #मनरेगा_विरोध : वीबी–जी राम जी बिल 2025 के खिलाफ झामुमो ने समाहरणालय के समक्ष एकदिवसीय धरना दिया।
केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना को समाप्त कर वीबी–जी राम जी बिल 2025 लागू किए जाने के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पलामू समाहरणालय के समक्ष एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। इस आंदोलन का नेतृत्व झामुमो पलामू जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद सिन्हा ने किया, जिसमें बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। धरना के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने पलामू उपायुक्त श्रीमती समीरा एस को मांगपत्र सौंपा। यह प्रदर्शन ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और महिलाओं के रोजगार अधिकारों की रक्षा को लेकर आयोजित किया गया।
- झामुमो पलामू जिला समिति द्वारा समाहरणालय के समक्ष एकदिवसीय धरना।
- मनरेगा समाप्ति और वीबी–जी राम जी बिल 2025 के विरोध में प्रदर्शन।
- धरना का नेतृत्व जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद सिन्हा ने किया।
- प्रदर्शन के बाद उपायुक्त समीरा एस को सौंपा गया मांगपत्र।
- ग्रामीण मजदूरों, महिलाओं, दलितों और आदिवासियों के अधिकारों का मुद्दा प्रमुख।
पलामू में आयोजित यह धरना-प्रदर्शन ग्रामीण रोजगार नीति में प्रस्तावित बदलावों के खिलाफ एक संगठित विरोध के रूप में सामने आया। झामुमो नेताओं ने इसे केवल एक कानून का नहीं, बल्कि करोड़ों ग्रामीण नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा सवाल बताया। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और मनरेगा को कमजोर करने के प्रयासों पर तीखी आपत्ति जताई गई।
धरना का नेतृत्व और संचालन
धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व झामुमो पलामू जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद सिन्हा ने किया। कार्यक्रम का संचालन केंद्रीय समिति सदस्य सह उपाध्यक्ष सन्नू सिद्दीकी एवं सचिव रंजन चंद्रवंशी ने संयुक्त रूप से किया।
धरना के समापन के बाद पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने पलामू उपायुक्त श्रीमती समीरा एस से मुलाकात कर केंद्र सरकार के निर्णय के विरोध में तैयार मांगपत्र सौंपा।
मनरेगा को बताया गया ग्रामीण भारत की रीढ़
धरना को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद सिन्हा ने कहा:
राजेंद्र प्रसाद सिन्हा ने कहा: “यह मुद्दा केवल किसी बिल का नहीं, बल्कि करोड़ों ग्रामीण गरीबों, मजदूरों, महिलाओं, दलितों और आदिवासियों के संवैधानिक रोजगार अधिकार का सवाल है। ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।”
उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में लागू मनरेगा अधिनियम ग्रामीण भारत के लिए एक क्रांतिकारी कदम था, जिसने पहली बार गांवों में काम की कानूनी गारंटी सुनिश्चित की। इस योजना के तहत ग्रामीण नागरिक वर्ष के किसी भी समय काम मांग सकते हैं और 15 दिनों में काम नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान है।
गांधी के आदर्शों से जोड़कर उठाया मुद्दा
श्री सिन्हा ने आरोप लगाया कि मनरेगा का नाम बदलना और उसे कमजोर करना महात्मा गांधी के आदर्शों को मिटाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि गांधी केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा हैं और उनके नाम से जुड़ी योजना को समाप्त करना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि मनरेगा से सबसे अधिक लाभ महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और गरीब तबकों को मिला है, जबकि नया वीबी–जी राम जी बिल इन वर्गों के हितों के खिलाफ है।
वीबी–जी राम जी बिल 2025 पर गंभीर आपत्तियां
धरना में वक्ताओं ने कहा कि वीबी–जी राम जी बिल 2025 में रोजगार को मांग-आधारित कानूनी अधिकार से हटाकर केंद्र सरकार की अधिसूचना पर निर्भर कर दिया गया है। इससे कई क्षेत्रों के ग्रामीणों का रोजगार अधिकार समाप्त हो जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि नए बिल में बजट की सीमा तय कर दी गई है, जिससे काम के दिनों पर सीधा असर पड़ेगा।
“पीक सीज़न” में 60 दिनों की ब्लॉक्ड आउट अवधि को महिलाओं, कृषि मजदूरों और प्रवासी श्रमिकों के लिए बेहद नुकसानदायक बताया गया। साथ ही वित्तीय बोझ राज्यों पर डालने से गरीब और संसाधनविहीन राज्य सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
मांगें और चेतावनी
झामुमो ने केंद्र सरकार से मांग की कि वीबी–जी राम जी बिल 2025 को मौजूदा स्वरूप में तुरंत वापस लिया जाए, मनरेगा की मांग-आधारित और कानूनी गारंटी को कमजोर न किया जाए तथा ग्रामीण गरीबों के हित में योजना को और मजबूत किया जाए।
अंत में जिलाध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा:
राजेंद्र प्रसाद सिन्हा ने कहा: “अगर रोजगार छीना गया, तो संघर्ष होगा। यह आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा।”
विभिन्न संगठनों और नेताओं की भागीदारी
इस धरना-प्रदर्शन में राजद के पूर्व जिलाध्यक्ष रामनाथ चंद्रवंशी के नेतृत्व में उनके समर्थक, किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ईश्वरी महतो, मोमिन कांफ्रेंस झारखंड जनता दल के सदस्य सुलेमान अंसारी शामिल हुए।
कार्यक्रम में केंद्रीय समिति सदस्य संजीव कुमार तिवारी, चंदन प्रकाश सिंहा, सुशीला मिश्रा, सलोनी टोप्पो, जिला उपाध्यक्ष राकेश सिन्हा, बालकिशन उरांव, संतोष मिश्रा, संगठन सचिव देवानंद भारद्वाज, अनुराग सिंह, अखिलेश सिंह, रंजीत सिंह, कोषाध्यक्ष विशाल सिंहा, वरिष्ठ नेता सुनील तिवारी, गोपाल सिन्हा, अविनाश देव, एजाज आलम, नेहाल असगर, विवेकानंद सिंह, इकबाल अहमद, प्रदीप सिंह, सनी शुक्ला, आशुतोष विनायक सहित बड़ी संख्या में नेता मौजूद रहे।
महानगर अध्यक्ष रणजीत जायसवाल, मोहम्मद इलताफ, मन्नत सिंह बग्गा, युवा मोर्चा अध्यक्ष सूरज कुमार, रिशु अग्रवाल, रजनीश सिंह, कौशल किशोर, अरविन्द चौधरी, बबलू चौधरी, सुनील कुमार, शाकिब सिद्दीकी, संजय चंद्रवंशी, महिला मोर्चा से संजू कुमारी, मंजू कुमारी, रजिया नियाजी, अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष फाजियल अहमद, नन्हे खान, व्यवसाय मोर्चा अध्यक्ष दीपू चौरसिया, दिनेश सोनी, अशोक गुप्ता, छात्र मोर्चा से सैयद फैजल, आर्यन कुमार, किसान मोर्चा से संतोष उपाध्याय सहित चैनपुर, रामगढ़, पाटन, लेस्लीगंज, छतरपुर, पड़वा, नवाबाजार और तरहसी प्रखंडों से सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

न्यूज़ देखो: ग्रामीण रोजगार पर बड़ा सियासी टकराव
पलामू का यह धरना संकेत देता है कि मनरेगा और नए रोजगार बिल को लेकर केंद्र और विपक्षी दलों के बीच टकराव तेज होने वाला है। ग्रामीण रोजगार जैसे संवेदनशील मुद्दे पर उठी यह आवाज आने वाले दिनों में राज्यव्यापी आंदोलन का रूप ले सकती है। अब यह देखना अहम होगा कि केंद्र सरकार इन आपत्तियों पर क्या रुख अपनाती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
रोजगार का सवाल, गांव का भविष्य
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