उंटारी रोड में खरीफ कर्मशाला आयोजित, किसानों को वैज्ञानिक और जैविक खेती के दिए गए सुझाव

उंटारी रोड में खरीफ कर्मशाला आयोजित, किसानों को वैज्ञानिक और जैविक खेती के दिए गए सुझाव

author Samim Ansari
6 Views Download E-Paper (3)
#उंटारीरोड #खरीफकृषि : प्रशिक्षण शिविर में किसानों को आधुनिक खेती और फसल प्रबंधन की जानकारी दी गई।

उंटारी रोड प्रखंड कार्यालय परिसर में शुक्रवार को प्रखंड स्तरीय खरीफ कर्मशाला एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों को खरीफ फसलों की वैज्ञानिक खेती, रोग प्रबंधन और जैविक उर्वरकों के उपयोग की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने कम लागत में बेहतर उत्पादन और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के उपाय बताए। कर्मशाला में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर खेती से जुड़ी तकनीकी जानकारियां प्राप्त कीं।

Join WhatsApp
  • उंटारी रोड प्रखंड कार्यालय में खरीफ कर्मशाला का आयोजन।
  • किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की दी गई सलाह।
  • धान, मक्का, अरहर और मूंगफली की खेती पर विशेष चर्चा।
  • जैविक उर्वरक उपयोग कर मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर।
  • फसल रोग और कीट नियंत्रण की जानकारी दी गई।
  • बड़ी संख्या में किसान और कृषि कर्मी रहे उपस्थित।

उंटारी रोड प्रखंड कार्यालय परिसर में शुक्रवार को प्रखंड स्तरीय खरीफ कर्मशाला एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों को खरीफ फसलों की उन्नत खेती, रोग नियंत्रण और आधुनिक कृषि तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई।

कर्मशाला का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करना और कम लागत में बेहतर उत्पादन के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों, कृषि कर्मियों और बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।

वैज्ञानिक खेती पर दिया गया जोर

कार्यक्रम की शुरुआत किसान शंकर मेहता द्वारा किसानों को खेती से संबंधित अनुभव साझा करने के साथ हुई।

इसके बाद बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित बीडीओ श्रवण कुमार भगत ने वर्ष 2025-26 के दौरान जून-जुलाई माह में होने वाली खरीफ खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की सलाह देते हुए कहा कि सही समय पर फसल प्रबंधन से उत्पादन में वृद्धि संभव है।

बीडीओ श्रवण कुमार भगत ने कहा: “समय के अनुसार नियमित देखभाल और वैज्ञानिक तरीके अपनाने से फसल उत्पादन बढ़ता है और किसानों के घर खुशहाली आती है।”

खरीफ फसलों की दी गई जानकारी

बीडीओ ने बताया कि प्रखंड क्षेत्र में खरीफ मौसम की मुख्य फसलें धान, मक्का, अरहर और मूंगफली हैं।

उन्होंने धान की नर्सरी तैयार करने, रोपाई, सिंचाई, कीटनाशक उपयोग, रोग नियंत्रण और कटाई तक की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।

कीट और रोग नियंत्रण पर चर्चा

कर्मशाला में किसानों को फसल में लगने वाले कीट और रोगों से बचाव के उपाय भी बताए गए।

अधिकारियों ने कहा कि समय पर कीटनाशकों और उचित प्रबंधन तकनीकों का उपयोग कर फसलों को नुकसान से बचाया जा सकता है।

जैविक खेती को बढ़ावा देने की अपील

प्रखंड कृषि पदाधिकारी (बीएओ) अनुज कुमार ने सब्जी और फल फसलों में लगने वाले रोगों तथा उनके उपचार की जानकारी किसानों को दी।

उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अधिक उपयोग से होने वाले नुकसान के बारे में बताते हुए जैविक उर्वरकों को अपनाने पर जोर दिया।

मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर

बीएओ अनुज कुमार ने कहा कि जैविक खाद के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता और पोषक तत्वों की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है।

उन्होंने किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाकर दीर्घकालीन लाभ प्राप्त करने की सलाह दी।

बीएओ अनुज कुमार ने कहा: “जैविक उर्वरकों के उपयोग से फसल उत्पादन के साथ मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।”

बड़ी संख्या में किसान हुए शामिल

कर्मशाला में कृषि विभाग के कई कर्मियों और किसानों की सक्रिय भागीदारी देखी गई।

इस दौरान एटीएम रंजीत कुमार, जनसेवक अरविंद सिंह, शीला कुमारी, कृषि मित्र अखिलेश दीक्षित, महेंद्र शर्मा, राम शरण मेहता समेत अन्य किसान उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान किसानों ने खेती से जुड़ी समस्याओं और सवालों को अधिकारियों के समक्ष रखा, जिनका समाधान भी किया गया।

न्यूज़ देखो: वैज्ञानिक और जैविक खेती ही भविष्य की जरूरत

बदलते मौसम और कम होती प्राकृतिक संसाधनों के बीच किसानों के लिए वैज्ञानिक और जैविक खेती बेहद जरूरी हो गई है। इस तरह की कर्मशालाएं किसानों को नई तकनीक और बेहतर कृषि प्रबंधन से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही हैं। यदि किसान समय के अनुसार आधुनिक तकनीकों को अपनाएं और मिट्टी की गुणवत्ता पर ध्यान दें, तो कम लागत में बेहतर उत्पादन संभव है। प्रशासन और कृषि विभाग को ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार आयोजित करने चाहिए ताकि किसानों की आय और कृषि व्यवस्था दोनों मजबूत हो सकें। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक किसान ही समृद्ध गांव और मजबूत कृषि की पहचान

खेती सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि गांव और देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
नई तकनीक और वैज्ञानिक सोच अपनाकर किसान बेहतर भविष्य बना सकते हैं।
जैविक खेती और संतुलित कृषि से मिट्टी, पर्यावरण और स्वास्थ्य तीनों सुरक्षित रहते हैं।
समय के साथ बदलती खेती पद्धति को अपनाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

कृषि से जुड़ी नई जानकारियां अपने आसपास के किसानों तक जरूर पहुंचाएं।
इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में दें और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने में अपनी भागीदारी निभाएं।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

Written by

उंटारी रोड, पलामू

🗣️ Join the Conversation!

What are your thoughts on this update? Read what others are saying below, or share your own perspective to keep the discussion going. (Please keep comments respectful and on-topic).

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

🔔

Notification Preferences

error: