मेदिनीनगर में बिना नक्शा बने घरों को मिलेगी राहत, हेमंत सरकार के फैसले पर झामुमो नेता सन्नी शुक्ला ने जताया आभार

मेदिनीनगर में बिना नक्शा बने घरों को मिलेगी राहत, हेमंत सरकार के फैसले पर झामुमो नेता सन्नी शुक्ला ने जताया आभार

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#पलामू #भवन_नियमितीकरण : हेमंत सरकार के फैसले से मेदिनीनगर के हजारों लोगों को बड़ी राहत मिली।

झारखंड सरकार द्वारा लागू किए गए झारखंड रेगुलराइजेशन ऑफ अनऑथराइज कंस्ट्रक्टेड बिल्डिंग रूल्स 2026 से पलामू मुख्यालय मेदिनीनगर के हजारों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। अब 31 दिसंबर 2024 से पहले बिना नक्शा बने भवनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियमित कराया जा सकेगा। इस फैसले पर झामुमो नेता सन्नी शुक्ला ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का आभार जताया है। उन्होंने इसे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के हित में लिया गया बड़ा निर्णय बताया।

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  • झारखंड सरकार ने बिना नक्शा बने भवनों को नियमित करने के लिए नया नियम लागू किया।
  • 31 दिसंबर 2024 से पहले बने भवनों को निर्धारित शुल्क देकर वैध कराया जा सकेगा।
  • झामुमो नेता सन्नी शुक्ला ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू को धन्यवाद दिया।
  • आवासीय भवन के लिए 10 हजार रुपए और व्यावसायिक भवन के लिए 20 हजार रुपए शुल्क तय।
  • भवन मालिकों को BPAMS पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
  • फैसले से मेदिनीनगर समेत पलामू क्षेत्र के हजारों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद।

झारखंड सरकार द्वारा लागू किए गए झारखंड रेगुलराइजेशन ऑफ अनऑथराइज कंस्ट्रक्टेड बिल्डिंग रूल्स 2026 को लेकर पलामू में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। इस नियम के तहत अब उन भवनों को भी नियमित कराने का अवसर मिलेगा, जो बिना नक्शा पास कराए बनाए गए थे। सरकार के इस फैसले को पलामू प्रमंडलीय मुख्यालय मेदिनीनगर के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने वर्षों पहले सीमित संसाधनों के सहारे अपने मकान और दुकानें बनवाई थीं।

झामुमो नेता सन्नी शुक्ला और उनकी युवा टीम ने इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के प्रति आभार प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जनता को राहत देने वाला ऐतिहासिक कदम उठाया है।

बिना नक्शा बने भवनों को मिलेगा कानूनी दर्जा

झारखंड सरकार की नई अधिसूचना के अनुसार 31 दिसंबर 2024 से पहले निर्मित ऐसे भवन, जिनका नक्शा पास नहीं कराया गया था, उन्हें अब निर्धारित शुल्क जमा कर नियमित कराया जा सकेगा। यह नियम आवासीय और व्यावसायिक दोनों प्रकार के भवनों पर लागू होगा।

सरकार द्वारा जारी नियम के अनुसार आवासीय भवन के लिए 10 हजार रुपए तथा व्यावसायिक भवन के लिए 20 हजार रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त लेबर सेस भी देना होगा, जिसकी दर 17.22 रुपए प्रति वर्गफीट तय की गई है।

बताया गया कि आवेदन करते समय भवन मालिकों को कम से कम 50 प्रतिशत शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा, जबकि शेष राशि तीन किस्तों में जमा की जा सकेगी।

ऑनलाइन आवेदन की होगी व्यवस्था

नियमितीकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था की है। भवन मालिकों को बिल्डिंग प्लान एप्रूवल मैनेजमेंट सिस्टम यानी BPAMS पोर्टल पर आवेदन करना होगा।

इसके लिए नगर परिषद से निबंधित आर्किटेक्ट या लाइसेंसधारी टेक्निकल पर्सन द्वारा भवन का वास्तविक नक्शा तैयार कराया जाएगा। उसी आधार पर भवन को नियमित करने की प्रक्रिया पूरी होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से वर्षों से कानूनी जटिलताओं में फंसे हजारों लोगों को राहत मिलेगी और नगर निकायों को भी राजस्व प्राप्त होगा।

सन्नी शुक्ला ने सरकार को बताया जनहितकारी

झामुमो नेता सन्नी शुक्ला ने कहा कि राज्य सरकार ने जनता की वास्तविक समस्याओं को समझते हुए यह फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार वर्षों से अपने मकानों को लेकर असमंजस की स्थिति में थे।

सन्नी शुक्ला ने कहा: “हेमंत सरकार ने जनता को डराने या परेशान करने के बजाय उन्हें राहत देने का काम किया है। मेदिनीनगर की जनता इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री और मंत्री जी को जोहार एवं आभार प्रकट करती है।”

उन्होंने कहा कि नगर निकायों को मजबूत बनाने के नाम पर सिर्फ कार्रवाई करने से बेहतर है कि सरकार जनता को वैधानिक समाधान दे। यह फैसला उसी दिशा में एक सकारात्मक पहल है।

मेदिनीनगर को सबसे अधिक मिलेगा लाभ

पलामू मुख्यालय मेदिनीनगर को इस योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी माना जा रहा है। यहां बड़ी संख्या में ऐसे मकान और दुकानें हैं, जिनका निर्माण वर्षों पहले हुआ लेकिन किसी कारणवश उनका नक्शा पास नहीं कराया जा सका।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अब उन्हें अपने घरों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर कानूनी सुरक्षा मिलेगी। इससे भविष्य में किसी तरह की कार्रवाई या विवाद की आशंका भी कम होगी।

साथ ही नगर परिषद को भी भवनों का सही रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी, जिससे शहरी विकास योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू किया जा सकेगा।

सरकार की योजना से बढ़ेगा भरोसा

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार का यह निर्णय आम लोगों के बीच सकारात्मक संदेश देने वाला है। खासकर उन परिवारों के लिए यह राहत भरा कदम है जिन्होंने जीवनभर की कमाई लगाकर अपना घर बनाया लेकिन तकनीकी कारणों से वैधता नहीं मिल सकी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों के तहत ही भवनों का नियमितीकरण होगा और प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन एवं पारदर्शी रहेगी।

न्यूज़ देखो: जनता को राहत देने वाला बड़ा प्रशासनिक फैसला

न्यूज़ देखो: मेदिनीनगर के हजारों परिवारों को मिली कानूनी सुरक्षा की उम्मीद

झारखंड सरकार का यह फैसला केवल एक प्रशासनिक अधिसूचना नहीं बल्कि हजारों परिवारों को राहत देने वाला कदम माना जा रहा है। वर्षों से बिना नक्शा बने मकानों को लेकर लोग मानसिक दबाव में जी रहे थे। ऐसे में नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू होना आम जनता के लिए बड़ी राहत है।

हालांकि अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि आवेदन प्रक्रिया सरल और भ्रष्टाचार मुक्त तरीके से लागू हो। यदि सरकार ऑनलाइन व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करती है, तो यह योजना शहरी विकास और राजस्व दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।

इसके साथ ही प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि आम लोगों को योजना की सही जानकारी मिले और बिचौलियों की भूमिका खत्म हो। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अपने अधिकारों को समझें, जागरूक बनें और योजनाओं का लाभ उठाएं

सरकारी योजनाएं तभी सफल होती हैं जब आम लोग उनकी जानकारी लेकर सही समय पर उसका लाभ उठाते हैं। अपने घर और संपत्ति को कानूनी सुरक्षा दिलाना हर नागरिक के लिए महत्वपूर्ण है।

यदि आपके आसपास भी ऐसे लोग हैं जिन्हें इस नई व्यवस्था की जानकारी नहीं है, तो उन्हें जरूर जागरूक करें। सही जानकारी ही भविष्य की परेशानियों से बचा सकती है।

अपनी राय कमेंट में जरूर दें, खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक साझा करें और जनहित से जुड़ी ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियों को समाज तक पहुंचाने में सहयोग करें।

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