#केरसई #कानूनी_जागरूकता : 90 दिवसीय विशेष अभियान के तहत नवा टोली में ग्रामीणों को कानून और अधिकारों के प्रति किया गया जागरूक।
सिमडेगा जिले के केरसई प्रखंड अंतर्गत नवा टोली में एक महत्वपूर्ण विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में पैरा लीगल वालंटियर्स (PLV) ने ग्रामीणों को निःशुल्क विधिक सहायता, सुलभ न्याय और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी देकर जागरूक किया।
- केरसई प्रखंड के सदर पंचायत स्थित नवा टोली गांव में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का हुआ सफल आयोजन।
- 90 दिवसीय गहन जागरूकता एवं जनसंपर्क अभियान के तहत प्रधान जिला जज के निर्देश पर आयोजित हुआ कार्यक्रम।
- पीएलवी विष्णु प्रसाद एवं उपेंद्र कुमार ने ग्रामीणों को निःशुल्क विधिक सहायता और सुलभ न्याय की जानकारी दी।
- ग्रामीणों को सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने तथा शिक्षा व कानूनी अधिकारों को अपनाने का दिया गया संदेश।
- कार्यक्रम में ग्रामीणों ने अपने विवादों के समाधान के लिए सवाल पूछे, जिनका मौके पर ही विधिक जवाब दिया गया।
झारखंड के सिमडेगा जिले में आम नागरिकों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को कानून के प्रति सचेत करने तथा उन्हें उनके मौलिक अधिकारों की जानकारी देने के उद्देश्य से एक बेहतरीन पहल की गई है। जिले के केरसई प्रखंड अंतर्गत सदर पंचायत के नवा टोली गांव में विधिक (कानूनी) जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा), रांची एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए), सिमडेगा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन गरीब और वंचित लोगों तक न्याय की पहुंच बनाना है, जो जानकारी के अभाव में अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं।
प्रधान जिला जज के निर्देश पर 90 दिवसीय सघन अभियान
नवा टोली में आयोजित इस विधिक साक्षरता शिविर की रूपरेखा बेहद सुनियोजित थी। यह कार्यक्रम सिमडेगा के प्रधान जिला जज सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के विशेष निर्देश पर संचालित किया जा रहा है। जिले भर में न्याय तंत्र को आम जनता से जोड़ने के लिए एक 90 दिवसीय गहन जागरूकता एवं जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत प्रतिदिन विभिन्न पंचायतों और गांवों में विधिक शिविर लगाए जा रहे हैं।
इसी अभियान के तहत केरसई के नवा टोली गांव के सामुदायिक स्थल पर इस कार्यक्रम की शुरुआत की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में कानून की जटिलताओं को सरल भाषा में समझाने के लिए प्राधिकार द्वारा प्रशिक्षित पैरा लीगल वालंटियर्स को भेजा गया था, ताकि ग्रामीण बिना किसी झिझक के अपनी बात रख सकें।
निःशुल्क विधिक सहायता और सुलभ न्याय व्यवस्था पर चर्चा
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के पैरा लीगल वालंटियर (PLV) विष्णु प्रसाद एवं उपेंद्र कुमार ने संयुक्त रूप से ग्रामीणों को संबोधित किया। उन्होंने भारतीय संविधान और विधिक सेवा प्राधिकार अधिनियम के तहत मिलने वाले अधिकारों के बारे में विस्तार से बताया। पीएलवी ने ग्रामीणों को जानकारी दी कि देश का कोई भी नागरिक जो आर्थिक रूप से कमजोर है, वह अदालत में न्याय पाने के लिए निःशुल्क विधिक सहायता (Free Legal Aid) का हकदार है। सरकार की ओर से ऐसे लोगों को मुफ्त वकील और कानूनी सलाह मुहैया कराई जाती है।
इसके अलावा, उन्होंने लोक अदालत और मध्यस्थता (Mediation) जैसी सुलभ व त्वरित न्याय व्यवस्था के बारे में भी बताया, जहां बिना किसी कोर्ट फीस और लंबे इंतजार के आपसी विवादों को सुलझाया जा सकता है। पीएलवी द्वय ने केवल अदालती प्रक्रियाओं की ही जानकारी नहीं दी, बल्कि ग्रामीणों को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़ने के तरीके भी बताए।
सामाजिक कुरीतियों को मिटाने और शिक्षा अपनाने की अपील
विधिक चर्चा के साथ-साथ पीएलवी ने ग्रामीण समाज में पैर पसार चुकी विभिन्न सामाजिक बुराइयों और कुरीतियों पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे डायन प्रथा, बाल विवाह, घरेलू हिंसा और नशाखोरी जैसी कुरीतियों से पूरी तरह दूर रहें, क्योंकि ये न केवल कानूनी रूप से दंडनीय अपराध हैं, बल्कि समाज के विकास में सबसे बड़ी बाधा भी हैं।
पीएलवी विष्णु प्रसाद एवं उपेंद्र कुमार ने कहा: “ग्रामीणों को अपने अधिकारों के प्रति हमेशा जागरूक रहना चाहिए। सामाजिक कुरीतियों से दूर रहकर ही हम एक सभ्य समाज बना सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि हर परिवार शिक्षा और जागरूकता को अपनाए, क्योंकि शिक्षित नागरिक ही अपने अधिकारों की रक्षा सही ढंग से कर सकता है।”
कार्यक्रम के अंतिम चरण में एक संवाद सत्र का आयोजन किया गया, जहां नवा टोली के ग्रामीणों ने खुलकर अपनी व्यक्तिगत और सामाजिक समस्याओं, भूमि विवादों तथा स्थानीय झगड़ों के समाधान को लेकर पीएलवी से सवाल पूछे। दोनों पीएलवी ने बेहद सरल और कानूनी प्रक्रिया के दायरे में रहकर ग्रामीणों की जिज्ञासाओं का समाधान किया और उन्हें सही मंच पर जाने की सलाह दी। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान नवा टोली के दर्जनों ग्रामीण, वार्ड सदस्य और महिला-पुरुष उपस्थित रहे, जिन्होंने विधिक साक्षरता की इस अनूठी पहल की सराहना की।
न्यूज़ देखो: न्याय को आम आदमी के द्वार तक पहुंचाने की सराहनीय कोशिश
केरसई के नवा टोली में आयोजित यह विधिक जागरूकता कार्यक्रम ग्रामीण भारत की एक बड़ी आवश्यकता को पूरा करता है। आज भी हमारे देश के सुदूर गांवों में लोग कानूनी प्रक्रियाओं से डरते हैं और वकीलों की भारी-भरकम फीस के डर से न्याय की गुहार लगाने से कतराते हैं। ऐसे में ‘झालसा’ और ‘डीएलएसए’ द्वारा चलाया जा रहा यह 90 दिवसीय अभियान न्याय को सचमुच ‘आम आदमी के द्वार’ तक पहुंचा रहा है। पीएलवी के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता और लोक अदालतों की जानकारी देना ग्रामीण जनता को बिचौलियों के शोषण से बचाने में मील का पत्थर साबित होगा। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे शिविरों में सरकारी विभागों के काउंटरों को भी शामिल करे, ताकि योजनाओं का लाभ भी हाथों-हाथ मिल सके।
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अधिकारों को जानें, कानून को पहचानें विधिक साक्षरता से ही सशक्त बनेगा हमारा ग्रामीण समाज
एक मजबूत और आदर्श लोकतंत्र की नींव इस बात पर टिकी है कि उसके नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति कितने सजग हैं। अज्ञानता और अशिक्षा ही वह अंधकार है जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों के सीधे-साधे लोग ठगी और अन्याय का शिकार होते हैं। केरसई के ग्रामीणों ने विधिक साक्षरता के इस मंच से जो ज्ञान अर्जित किया है, वह उन्हें समाज में सिर उठाकर जीने का संबल देगा। जब गांव का हर नागरिक कानून की बुनियादी समझ रखेगा, तभी डायन बिसाही और बाल विवाह जैसी अमानवीय कुप्रथाओं का जड़ से खात्मा हो सकेगा। आइए, हम सब मिलकर शिक्षा और विधिक साक्षरता की इस अलख को घर-घर तक पहुंचाएं।
क्या आपके गांव या पंचायत में कभी इस तरह का कानूनी जागरूकता शिविर आयोजित किया गया है? निःशुल्क विधिक सहायता को लेकर यदि आपका कोई अनुभव या सवाल है, तो नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर हमसे जरूर साझा करें। इस अत्यंत महत्वपूर्ण और सूचनात्मक खबर को अपने सिमडेगा और केरसई के सभी मित्रों, परिवारजनों और वाट्सएप ग्रुप्स में ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, ताकि सुदूर क्षेत्र के हर एक भाई-बहन तक उनके कानूनी अधिकारों की यह मूल्यवान जानकारी पहुंच सके।

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