सिमडेगा में महिला कांग्रेस का बड़ा आंदोलन: पीएम नरेंद्र मोदी को भेजे दो हजार से अधिक पोस्टकार्ड

सिमडेगा में महिला कांग्रेस का बड़ा आंदोलन: पीएम नरेंद्र मोदी को भेजे दो हजार से अधिक पोस्टकार्ड

author Birendra Tiwari
9 Views Download E-Paper (4)
#सिमडेगा #महिला_आरक्षण : महिला कांग्रेस ने पोस्टकार्ड अभियान चलाकर आरक्षण कानून तुरंत लागू करने की उठाई मांग।

सिमडेगा में महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष जोसिमा खाखा के नेतृत्व में एक विशाल पोस्टकार्ड अभियान चलाया गया। इसके तहत जिले भर से महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दो हजार से अधिक पोस्टकार्ड भेजे। महिलाओं ने वर्ष 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को देश में तुरंत धरातल पर लागू करने की पुरजोर मांग की है।

Join WhatsApp
  • महिला कांग्रेस की ओर से सोमवार को सिमडेगा जिले में पोस्टकार्ड अभियान का भव्य राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत आयोजन किया गया।
  • जिला अध्यक्ष सह जिप सदस्य जोसिमा खाखा के नेतृत्व में महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखे।
  • केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को देश में जल्द से जल्द लागू करने की मांग उठी।
  • जिले के सभी प्रखंडों से महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए दो हजार से अधिक पोस्टकार्ड डाक द्वारा भेजे।
  • महिलाओं का तर्क है कि पर्याप्त राजनीतिक भागीदारी के बिना देश और समाज का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।

झारखंड के सिमडेगा जिले में महिलाओं को राजनीति और नीति-निर्धारण में उनका उचित अधिकार दिलाने के उद्देश्य से एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन देखने को मिला है। महिला कांग्रेस की ओर से सोमवार को जिले भर में व्यापक स्तर पर पोस्टकार्ड अभियान चलाया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में पारित किए गए महिला आरक्षण कानून को अविलंब पूरे देश में प्रभावी ढंग से लागू कराना है। इस अभियान के जरिए सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं ने भी अपनी आवाज बुलंद की है और सीधे देश के शीर्ष नेतृत्व तक अपना कड़ा संदेश पहुंचाया है।

पोस्टकार्ड अभियान का नेतृत्व और आधी आबादी की आवाज

सिमडेगा जिला मुख्यालय सहित विभिन्न प्रखंडों में आयोजित इस अभियान का नेतृत्व महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष सह जिला परिषद सदस्य जोसिमा खाखा ने किया। सोमवार को आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण महिलाओं, बुद्धिजीवियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। महिलाओं ने सामूहिक रूप से पोस्टकार्ड लिखकर और उन पर हस्ताक्षर कर डाक के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय को प्रेषित किया। इस दौरान उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल राजनीतिक हिस्सेदारी की नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान और सामाजिक न्याय की है।

जोसिमा खाखा ने कहा: “देश की आधी आबादी को राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व दिलाना समय की मांग है। महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित की है, लेकिन राजनीति में अब भी उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहा है। महिला आरक्षण लागू होने से पंचायत से लेकर संसद तक महिलाओं की भागीदारी और मजबूत होगी तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की आवाज प्रभावी तरीके से सामने आएगी। केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण कानून 2023 में पारित किया है, लेकिन अब तक इसे धरातल पर लागू नहीं किया गया है। देशभर की महिलाएं इसके लागू होने का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। महिला कांग्रेस लगातार इस न्यायसंगत मुद्दे को उठाती रही है और महिलाओं के अधिकारों के लिए हमारा यह लोकतांत्रिक संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक अधिकार मिल नहीं जाता।”

जिले के सभी प्रखंडों से भेजी गईं दो हजार से अधिक प्रतियां

इस अभियान की सफलता और इसके व्यापक जनसमर्थन की जानकारी देते हुए जिला अध्यक्ष जोसिमा खाखा ने बताया कि जिले की महिलाओं में इस कानून को लेकर भारी उत्साह और जागरूकता देखी गई। सिमडेगा जिले के अंतर्गत आने वाले सभी प्रखंडों—चाहे वह सुदूर ग्रामीण क्षेत्र हों या शहरी इलाके—हर जगह से महिलाओं ने इसमें बढ़-चढ़कर अपनी हिस्सेदारी दर्ज कराई। ग्रामीण परिवेश की महिलाओं ने भी इस बात को समझा है कि उनकी समस्याओं का समाधान तब तक नहीं होगा जब तक वे खुद कानून बनाने वाली संस्थाओं में नहीं बैठेंगी।

महिलाओं ने अपने-अपने स्तर से पोस्टकार्ड खरीदे, उन पर अपनी मांगें लिखीं और सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए स्थानीय डाकघरों की डाक पेटी में डाला। जोसिमा खाखा ने बताया कि इस पूरे अभियान के दौरान पूरे जिले से कुल दो हजार से अधिक प्रतियां (पोस्टकार्ड) एकत्र कर प्रधानमंत्री को भेजी गई हैं। उन्होंने इस ऐतिहासिक भागीदारी के लिए जिले की समस्त जागरूक महिलाओं के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने आह्वान किया कि भविष्य में भी अपने हक, मान-सम्मान और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए सभी को इसी तरह एकजुट और संगठित होकर संघर्ष में शामिल होना होगा।

समग्र राष्ट्रीय विकास के लिए राजनीतिक भागीदारी अनिवार्य

अभियान में शामिल अन्य प्रबुद्ध महिलाओं और महिला कार्यकर्ताओं ने भी केंद्र सरकार की टालमटोल की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब देश की आर्थिक, सामाजिक, खेल और वैज्ञानिक प्रगति में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं, तो कानून बनाने वाली सर्वोच्च संस्थाओं में उन्हें पीछे क्यों रखा जा रहा है। महिलाओं ने इस बात पर जोर दिया कि केवल भाषणों, दावों और चुनावी वादों से महिलाओं का वास्तविक उत्थान नहीं होगा, इसके लिए संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटों पर महिलाओं का बैठना अनिवार्य है।

अभियान के दौरान सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया गया कि जब तक महिलाओं को पर्याप्त और आनुपातिक राजनीतिक भागीदारी नहीं मिलेगी, तब तक किसी भी समाज, राज्य या देश का वास्तविक और समग्र विकास संभव ही नहीं है। आधी आबादी को हाशिए पर रखकर एक विकसित राष्ट्र की कल्पना अधूरी है। महिलाओं ने कहा कि वे अब जाग चुकी हैं और अपने अधिकारों को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगी।

आंदोलन में शामिल प्रमुख महिला कार्यकर्ताओं एवं दिग्गजों की सूची

सिमडेगा के इस वृहद डाक अभियान को सफल बनाने में महिला कांग्रेस के जिला संगठन से जुड़ी कई प्रमुख महिला नेत्रियों और कार्यकर्ताओं ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। इस अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित रहने वाली महिलाओं में रोसा केरकेटा, उर्मिला केरकेट्टा, गीता देवी, ज्योति लकड़ा, रोशन्ति तिर्की, गीता कुमारी, सुषमा कुल्लू, पूनम देवी, सुनैना कुमारी, रेखा देवी, और सुमन देवी शामिल थीं। इन सभी नेत्रियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में महिलाओं को लामबंद किया और पोस्टकार्ड अभियान को घर-घर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इनके साथ ही दर्जनों अन्य स्थानीय महिलाएं भी इस ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन और मांग का हिस्सा बनीं।

न्यूज़ देखो: कानून पारित होने के बाद भी क्रियान्वयन में देरी पर बड़ा सवाल

महिला कांग्रेस का यह पोस्टकार्ड अभियान यह साफ दिखाता है कि भारतीय राजनीति में महिलाओं की चेतना और अधिकारों की समझ कितनी परिपक्व हो चुकी है। साल 2023 में संसद के विशेष सत्र के दौरान जिस ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को बड़े ही गाजे-बाजे के साथ पारित किया गया था, उसका तीन साल बाद यानी 2026 में भी लागू न होना प्रशासनिक और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी को दर्शाता है। जनगणना और परिसीमन जैसे तकनीकी पेंच फंसाकर आधी आबादी को उनके हक से दूर रखना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। सिमडेगा जैसी सुदूर जगहों से जब दो हजार से अधिक ग्रामीण महिलाएं सीधे देश के प्रधानमंत्री को पत्र लिखती हैं, तो यह दिल्ली के नीति-निर्धारकों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि अब वादों से काम नहीं चलेगा, धरातल पर अधिकार देने होंगे। सरकार को इस कानून को आगामी चुनाव से पहले ही पूरी तरह प्रभावी बनाना चाहिए ताकि महिलाओं को उनका वास्तविक प्रतिनिधित्व मिल सके।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

उठो द्रौपदी शस्त्र संभालो अब गोविंद न आएंगे आधी आबादी को अपना हक खुद पाना होगा

समाज और राष्ट्र का गौरव तभी स्थापित होता है जब उसकी आधी आबादी सुरक्षित, सशक्त और निर्णय लेने की भूमिका में हो। इतिहास गवाह है कि अधिकारों की लड़ाई कभी थाली में सजाकर नहीं मिलती, उसके लिए संगठित प्रयास और बुलंद आवाज की जरूरत होती है। सिमडेगा की इन जागरूक महिलाओं ने पोस्टकार्ड के जरिए जो अलख जगाई है, उसे देश के हर कोने तक पहुंचना चाहिए। जब देश की हर बेटी और महिला अपने राजनैतिक अधिकारों के प्रति सजग होगी, तभी संसद से लेकर सड़क तक एक वास्तविक और समावेशी लोकतंत्र का निर्माण हो सकेगा। आइए, हम सब मिलकर महिलाओं के इस वैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार का पुरजोर समर्थन करें और इस आवाज को कमजोर न होने दें।

यदि आप भी मानते हैं कि देश की वास्तविक तरक्की के लिए संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत मिलना चाहिए, तो इस लेख पर अपनी महत्वपूर्ण राय नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अवश्य साझा करें। इस खबर को अपने मित्रों, परिजनों और सभी सोशल मीडिया ग्रुप्स में ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि महिला सशक्तिकरण की यह गूंज हर घर तक पहुंचे और सोए हुए तंत्र को जगाया जा सके। आपकी एक शेयरिंग इस मुहिम को और मजबूत बना सकती है।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

Written by

सिमडेगा

🗣️ Join the Conversation!

What are your thoughts on this update? Read what others are saying below, or share your own perspective to keep the discussion going. (Please keep comments respectful and on-topic).

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

🔔

Notification Preferences

error: