बज्रपात से जला ट्रांसफार्मर सेंटर ग्राम में 10 दिनों से अंधेरा पानी और पढ़ाई का संकट गहराया

बज्रपात से जला ट्रांसफार्मर सेंटर ग्राम में 10 दिनों से अंधेरा पानी और पढ़ाई का संकट गहराया

author Rohit Kumar Sahu
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#पालकोट #बिजली_संकट : ट्रांसफार्मर जलने के बाद सेंटर ग्राम में बिजली बहाली नहीं होने से ग्रामीण परेशान हैं।

पालकोट प्रखंड के बाघिमा पंचायत स्थित सेंटर ग्राम में बज्रपात की चपेट में आने से 16 केवीए ट्रांसफार्मर जल गया, जिसके बाद पिछले 10 दिनों से गांव में बिजली आपूर्ति ठप है। बिजली नहीं रहने से ग्रामीणों को अंधेरे, पेयजल संकट और बच्चों की पढ़ाई बाधित होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने विद्युत विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जल्द नया ट्रांसफार्मर लगाने की मांग की है। समस्या का समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।

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  • बाघिमा पंचायत के सेंटर ग्राम में 16 केवीए ट्रांसफार्मर जल गया।
  • पिछले 10 दिनों से गांव की बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप।
  • बिजली नहीं रहने से पेयजल संकट और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित।
  • ग्रामीणों ने विद्युत विभाग पर लापरवाही का लगाया आरोप।
  • एसडीओ से संपर्क के बावजूद समाधान नहीं मिलने की शिकायत।
  • ग्रामीणों ने जल्द ट्रांसफार्मर नहीं बदलने पर आंदोलन की चेतावनी दी।

पालकोट प्रखंड अंतर्गत बाघिमा पंचायत के सेंटर ग्राम में पिछले 10 दिनों से बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। गांव में लगा 16 केवीए ट्रांसफार्मर बज्रपात की चपेट में आने से जल गया, जिसके बाद पूरे गांव में अंधेरा पसरा हुआ है। बिजली आपूर्ति बंद होने से ग्रामीणों को न केवल रात में अंधेरे का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि पेयजल संकट और बच्चों की पढ़ाई पर भी गंभीर असर पड़ा है। लगातार बढ़ती परेशानी के बावजूद अब तक नया ट्रांसफार्मर नहीं लगाए जाने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

बज्रपात के बाद पूरी तरह ठप हुई बिजली व्यवस्था

ग्रामीणों के अनुसार कुछ दिन पूर्व हुई तेज बारिश और बज्रपात के दौरान गांव में लगा 16 केवीए ट्रांसफार्मर पूरी तरह जल गया। इसके बाद से गांव की बिजली आपूर्ति बंद हो गई। गांव के लोगों का कहना है कि घटना के तुरंत बाद विद्युत विभाग को सूचना देकर नया ट्रांसफार्मर लगाने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में बिजली नहीं रहने के कारण शाम होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। गर्मी के मौसम में बिजली नहीं रहने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने कहा: “10 दिनों से गांव अंधेरे में डूबा है। बच्चों की पढ़ाई ठप हो गई है और पानी के लिए लोग परेशान हैं, लेकिन विभाग सुनने को तैयार नहीं है।”

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली जैसी बुनियादी सुविधा बाधित होने के बावजूद विभाग की उदासीनता लोगों की परेशानियों को और बढ़ा रही है।

पेयजल संकट ने बढ़ाई ग्रामीणों की मुश्किलें

बिजली आपूर्ति बंद होने का सबसे बड़ा असर गांव की पेयजल व्यवस्था पर पड़ा है। बिजली नहीं रहने के कारण मोटर और पानी की मशीनें बंद पड़ी हैं। इससे लोगों को पीने का पानी जुटाने के लिए काफी दूर जाना पड़ रहा है।

महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने बताया कि सुबह से ही पानी भरने के लिए लोगों की लंबी कतार लग जाती है। कई परिवारों को दूसरे गांवों या दूर स्थित चापाकलों का सहारा लेना पड़ रहा है।

गर्मी के मौसम में पानी की समस्या और अधिक गंभीर हो गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था करने की मांग की है ताकि लोगों को राहत मिल सके।

बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा असर

सेंटर ग्राम में बिजली नहीं रहने का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी साफ दिखाई दे रहा है। रात में अंधेरा रहने के कारण स्कूली बच्चों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि आज के समय में पढ़ाई के लिए बिजली बेहद जरूरी हो गई है। कई छात्र मोबाइल और ऑनलाइन माध्यमों से पढ़ाई करते हैं, लेकिन बिजली नहीं रहने से मोबाइल चार्ज करना भी मुश्किल हो गया है।

एक ग्रामीण अभिभावक ने कहा: “बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है। रात में अंधेरे के कारण पढ़ाई संभव नहीं हो पा रही।”

लोगों ने कहा कि शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात तो की जाती है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी बच्चों के भविष्य पर असर डाल रही है।

विभागीय लापरवाही से नाराज ग्रामीण

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ट्रांसफार्मर जलने के तुरंत बाद विद्युत विभाग के अभियंता कार्यालय में लिखित आवेदन दिया गया था। इसके बावजूद अब तक विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई।

गांव वालों का कहना है कि उन्होंने कई बार विद्युत विभाग के एसडीओ से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन हर बार “मीटिंग में हैं”, “देखते हैं” या “पूछकर बताते हैं” कहकर बात टाल दी गई।

ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समय पर कार्रवाई की जाती तो लोगों को इतनी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती।

आंदोलन की चेतावनी

बढ़ती समस्याओं के बीच अब ग्रामीणों का धैर्य टूटने लगा है। गांववासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द नया ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया और बिजली बहाल नहीं की गई, तो वे विद्युत विभाग के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

ग्रामीणों ने प्रशासन और बिजली विभाग से मांग की है कि जले हुए 16 केवीए ट्रांसफार्मर को तत्काल बदला जाए, गांव में जल्द बिजली आपूर्ति बहाल की जाए, पेयजल संकट को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए और विभागीय लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

  • जले हुए 16 केवीए ट्रांसफार्मर को तत्काल बदला जाए।
  • सेंटर ग्राम में जल्द बिजली आपूर्ति बहाल की जाए।
  • पेयजल संकट को देखते हुए वैकल्पिक पानी की व्यवस्था की जाए।
  • विभागीय लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

न्यूज़ देखो: बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी ग्रामीणों पर भारी

पालकोट के सेंटर ग्राम की स्थिति यह दिखाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता कितनी बड़ी चुनौती बनी हुई है। बिजली जैसी आवश्यक सेवा बाधित होने से केवल रोशनी ही नहीं जाती, बल्कि पानी, शिक्षा और दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। समय पर ट्रांसफार्मर बदलना और बिजली बहाल करना विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन लगातार देरी लोगों की परेशानियों को बढ़ा रही है। प्रशासन को चाहिए कि ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए त्वरित समाधान सुनिश्चित करे ताकि लोगों को राहत मिल सके। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

गांवों की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत बनाना समय की जरूरत

ग्रामीण क्षेत्रों का विकास तभी संभव है जब बिजली, पानी और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं सुचारू रूप से उपलब्ध हों। छोटी लापरवाही भी हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकती है। समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि गांवों में रहने वाले लोगों को भी सम्मानजनक और सुविधाजनक जीवन मिले।

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Written by

पालकोट, गुमला

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