पीवीटीजी परिवारों के आजीविका सशक्तिकरण की पहल, हुटाप गांव में बकरी पालन इकाइयों का वितरण

पीवीटीजी परिवारों के आजीविका सशक्तिकरण की पहल, हुटाप गांव में बकरी पालन इकाइयों का वितरण

author Aditya Kumar
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#डुमरी #पीवीटीजी_परिवार : नीति आयोग पोषित परियोजना के तहत परिवारों को दिया गया आजीविका का साधन

डुमरी प्रखंड के हुटाप गांव स्थित औरापाठ टोला में पीवीटीजी परिवारों के आजीविका सशक्तिकरण के लिए बकरी पालन इकाइयों का वितरण किया गया। नीति आयोग द्वारा पोषित पहल परियोजना के तहत जिला प्रशासन गुमला के मार्गदर्शन में आईएसडीजी रिसर्च फाउंडेशन द्वारा यह कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आदिम जनजातीय परिवारों को स्थायी आजीविका से जोड़ना है।

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  • औरापाठ टोला में पीवीटीजी परिवारों को दी गई बकरी पालन इकाइयाँ
  • आठ चयनित परिवारों को मिला आजीविका का नया साधन
  • पहले ही नौ परिवारों को मिल चुका है योजना का लाभ
  • कुल 34 परिवारों को लाभान्वित करने का रखा गया लक्ष्य
  • नुक्कड़ नाटक के माध्यम से पलायन रोकने का दिया गया संदेश

डुमरी (गुमला) प्रखंड के हुटाप ग्राम स्थित औरापाठ टोला में पीवीटीजी परिवारों के आजीविका सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई।

नीति आयोग द्वारा पोषित पहल परियोजना के अंतर्गत जिला प्रशासन गुमला के मार्गदर्शन में आईएसडीजी रिसर्च फाउंडेशन, रांची द्वारा चयनित परिवारों को बकरी पालन इकाइयों का वितरण किया गया।

आठ परिवारों को मिला लाभ

कार्यक्रम के दौरान चयनित आठ पीवीटीजी परिवारों को बकरी पालन इकाइयाँ प्रदान की गईं। बताया गया कि इससे पहले नौ परिवारों को भी इस योजना का लाभ दिया जा चुका है।

इस योजना के तहत कुल 34 परिवारों को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि आदिम जनजातीय परिवारों को स्थायी आजीविका के साधन उपलब्ध कराए जा सकें।

बकरी पालन का दिया गया प्रशिक्षण

इस अवसर पर लाभार्थियों को बकरी पालन से संबंधित आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया गया। उन्हें पशुओं की देखभाल, समय-समय पर टीकाकरण, पोषण और बेहतर प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य यह है कि लाभार्थी बकरी पालन के माध्यम से अपनी आय बढ़ा सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जागरूकता

कार्यक्रम के दौरान नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ग्रामीणों को कृषि और पशुपालन को मजबूत आजीविका का साधन बनाने का संदेश दिया गया। साथ ही अनावश्यक पलायन को रोकने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

इस मौके पर आईएसडीजी रिसर्च फाउंडेशन के कार्यकर्ता नीरज गोप, आलोक मिश्रा, वार्ड सदस्य प्रेम कोरवा सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे।

न्यूज़ देखो : आजीविका से जुड़ेगा विकास

ग्रामीण और आदिम जनजातीय परिवारों को आजीविका के स्थायी साधन उपलब्ध कराना विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बकरी पालन जैसे छोटे व्यवसाय ग्रामीण परिवारों के लिए आय का मजबूत स्रोत बन सकते हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

आत्मनिर्भर गांव की ओर बढ़ता कदम

स्थानीय संसाधनों से रोजगार
पलायन पर लगेगा विराम
और मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था।

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Written by

डुमरी, गुमला

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