
#मैकलुस्कीगंज #मकरसंक्रांति_मेला : पारंपरिक पूजा, सांस्कृतिक नृत्य और जनभागीदारी के साथ डेगाडेगी मेला उत्साहपूर्वक संपन्न।
रांची जिले के मैकलुस्कीगंज अंतर्गत डेगाडेगी में मकर संक्रांति के अवसर पर पारंपरिक मेले का आयोजन किया गया, जिसमें आसपास के गांवों से हजारों ग्रामीण शामिल हुए। हरि पाहन और लालचंद मुंडा द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के साथ मेले की शुरुआत हुई। जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में मेले का उद्घाटन किया गया। यह मेला स्थानीय संस्कृति, पर्यटन और सामुदायिक एकता का महत्वपूर्ण प्रतीक बनकर उभरा।
- डेगाडेगी, मैकलुस्कीगंज में मकर संक्रांति पर पारंपरिक मेला आयोजित।
- हरि पाहन एवं लालचंद मुंडा ने विधिवत पूजा-अर्चना की।
- शेखर बोस सहित जनप्रतिनिधियों ने फीता काटकर मेला उद्घाटन किया।
- हजारों ग्रामीणों की सहभागिता, सांस्कृतिक नृत्य और मांदर की थाप।
- मैकलुस्कीगंज थाना पुलिस सुरक्षा व्यवस्था में तैनात।
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर मैकलुस्कीगंज प्रखंड के डेगाडेगी गांव में आयोजित मेला इस वर्ष भी जनआस्था, परंपरा और सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण बना। सुबह से ही मेला स्थल पर ग्रामीणों की भीड़ उमड़ने लगी थी। आसपास के गांवों से लोग परिवार के साथ पहुंचे और पर्व का आनंद लिया।
मेले की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार हरि पाहन और लालचंद मुंडा द्वारा पूजा-अर्चना से की गई। इसके बाद मुख्य अतिथि शेखर बोस एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने फीता काटकर विधिवत मेले का उद्घाटन किया।
जनप्रतिनिधियों और अतिथियों की रही खास मौजूदगी
इस अवसर पर कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से खलारी पश्चिमी जिला परिषद सदस्य सरस्वती देवी, वाईबीएन गुरुकुलम के प्रिंसिपल चमन सिंह ठाकुर, लपरा मुखिया पुतुल देवी, डुमारो मुखिया सुनीता खलखो, विश्रामपुर मुखिया दीपमाला कुमारी, विधायक प्रतिनिधि शशि मुंडा, भोला साहू सहित कई गणमान्य लोग मंच पर मौजूद थे।
कार्यक्रम के दौरान मेला समिति की ओर से सुशील तिवारी ने मेले के इतिहास और महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसके विकास के लिए सभी से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि यह मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपरा की पहचान है।
डेगाडेगी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने पर जोर
मुख्य अतिथि शेखर बोस ने अपने संबोधन में कहा:
शेखर बोस ने कहा: “डेगाडेगी मैकलुस्कीगंज का एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है। इसे और विकसित करने तथा मेले को बृहद रूप देने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।”
उन्होंने मेला स्थल के सुंदरीकरण और आधारभूत सुविधाओं के विकास पर विशेष बल दिया। वहीं जिला परिषद सदस्य सरस्वती देवी और लपरा पंचायत की मुखिया पुतुल देवी ने भी आश्वासन दिया कि पंचायत प्रतिनिधि मिलकर इस स्थल के विकास के लिए हरसंभव पहल करेंगे।
सांस्कृतिक रंग में रंगा रहा मेला परिसर
मेले में पारंपरिक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। खोड़हा टीमों के साथ मांदर की थाप पर अतिथियों और ग्रामीणों ने नृत्य किया, जिससे माहौल पूरी तरह उत्सवमय हो गया। समिति की ओर से श्रद्धालुओं और आगंतुकों के लिए चूड़ा-गुड़ और खिचड़ी की व्यवस्था की गई थी।
मेले में लगी दुकानों पर ग्रामीणों ने जमकर खरीदारी की। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए यह मेला मनोरंजन और सामाजिक मेल-जोल का केंद्र बना रहा।
सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
मेले में उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। मैकलुस्कीगंज थाना के एएसआई डेगन कुमार पुलिस बल के साथ पूरे समय तैनात रहे, जिससे मेला शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
इस अवसर पर शशि प्रसाद साहू, संजय सिंह, बसंत मिस्त्री, सुशील उरांव, रमेश्वर भोगता, बिरजा उरांव, महादेव राणा, हरेंद्र उरांव, श्रवण भोगता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

न्यूज़ देखो: परंपरा और विकास का संगम
डेगाडेगी मेला यह दिखाता है कि लोक परंपराएं आज भी ग्रामीण समाज को जोड़ने का काम कर रही हैं। जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से इसके विकास की उम्मीद और मजबूत हुई है। यदि इसे पर्यटन से जोड़ा जाए, तो क्षेत्र को नई पहचान मिल सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
लोक संस्कृति को सहेजने की जिम्मेदारी हम सबकी
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