
#मेदिनीनगर #प्राण_प्रतिष्ठा : रेडमा मथुराबाड़ी में परशुराम मंदिर का भव्य अनुष्ठान संपन्न।
मेदिनीनगर के रेडमा मथुराबाड़ी में नवनिर्मित भगवान परशुराम मंदिर में शुक्रवार को विधिवत प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। राष्ट्रीय परशुराम सेना भार्गव के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। काशी से आए संत विमल दास जी महाराज के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अनुष्ठान हुआ। शिव पुराण महायज्ञ 2 से 8 फरवरी तक चलेगा।
- रेडमा मथुराबाड़ी, मेदिनीनगर में नवनिर्मित मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा।
- संत विमल दास जी महाराज (काशी) के सान्निध्य में वैदिक अनुष्ठान।
- 11 विद्वान पंडितों द्वारा मंत्रोच्चार और हवन-पूजन।
- 2 से 8 फरवरी तक शिव पुराण महायज्ञ का आयोजन।
- वृंदावन की कथा वाचिका देवी कृष्णा प्रिया जी का प्रवचन।
मेदिनीनगर स्थित रेडमा मथुराबाड़ी में वर्षों के इंतजार के बाद भगवान श्री परशुराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा शुक्रवार को भव्य धार्मिक वातावरण में संपन्न हुई। राष्ट्रीय परशुराम सेना भार्गव के तत्वावधान में आयोजित इस ऐतिहासिक अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। सुबह से ही मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, हवन-पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों की गूंज सुनाई देती रही।
इस अवसर पर काशी (वाराणसी) से पधारे विख्यात संत विमल दास जी महाराज के सान्निध्य में 11 विद्वान पंडितों द्वारा विधिवत प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य अनुष्ठान संपन्न कराया गया। श्रद्धालुओं की उपस्थिति और आस्था ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ अनुष्ठान
प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दौरान सुबह से ही पूजा-अर्चना, हवन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम चलता रहा। मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। श्रद्धालु भक्ति भाव से भगवान परशुराम के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते रहे।
विमल दास जी महाराज ने कहा:
“प्राण प्रतिष्ठा केवल मूर्ति स्थापना नहीं, बल्कि आस्था और ऊर्जा का जागरण है। जब श्रद्धा से अनुष्ठान होता है तो वह समाज को एक नई दिशा देता है।”
उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, संयम और सेवा के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
शिव पुराण महायज्ञ का आयोजन 8 फरवरी तक
मंदिर प्राण प्रतिष्ठा सह शिव पुराण महायज्ञ का आयोजन 2 फरवरी से प्रारंभ होकर 8 फरवरी तक चलेगा। दोपहर बाद तीन बजे से वृंदावन से पधारी प्रसिद्ध कथा वाचिका देवी कृष्णा प्रिया जी ने शिव कथा का रसपान कराया।
शिव कथा के पांचवें दिन उन्होंने जीवन दर्शन और आचरण की शुद्धता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
देवी कृष्णा प्रिया जी ने कहा:
“सच्चे संत दुख मिटाने का दावा नहीं करते, वे जीवन जीने का मार्ग बताते हैं और भगवान पर विश्वास रखने की प्रेरणा देते हैं।”
उन्होंने आगे कहा:
“जो राम के आचरण को अपनाएगा वही राम कथा कहने का अधिकारी होगा, जो नारायण के गुणों को अपने जीवन में उतारेगा वही उनकी कथा कहेगा और जो शिव तत्व को आत्मसात करेगा वही शिव महापुराण का सार समझ सकेगा।”
उनके प्रवचन से उपस्थित जनसमूह भावविभोर हो उठा और पूरे परिसर में भक्ति का वातावरण बना रहा।
धार्मिक जागरूकता और सामाजिक एकता का संदेश
आयोजन ने क्षेत्र में धार्मिक जागरूकता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह मंदिर आने वाले समय में पलामू जिले का प्रमुख धार्मिक केंद्र बनेगा और क्षेत्र की आस्था का प्रमुख धाम बनेगा।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय परशुराम सेना भार्गव के जिला अध्यक्ष मधुकर शुक्ला, संस्थापक सदस्य अमित तिवारी, अजय तिवारी, मुकेश तिवारी, अभिषेक तिवारी, अरविंद पांडे, संजित पांडे, आशुतोष तिवारी ब्राह्मण, यजमान कमलेश शुक्ला, सुनील तिवारी, अमित शुक्ला, अप्पू तिवारी, शशि तिवारी, बसंत तिवारी, अनिमेष शुक्ला, रंजीत तिवारी, अंकित पांडेय, मीडिया प्रभारी नीतेश तिवारी, हर्ष पांडे, चंचल तिवारी, आशुतोष शुक्ला सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
आयोजन की व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रहीं और श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया।
न्यूज़ देखो: आस्था का केंद्र बना रेडमा
रेडमा में भगवान परशुराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बनकर उभरी है। हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी यह दर्शाती है कि समाज अपनी परंपराओं से गहराई से जुड़ा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह धार्मिक केंद्र भविष्य में किस प्रकार सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरण को आगे बढ़ाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था के साथ जिम्मेदारी भी निभाएँ
धार्मिक आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम होते हैं। हमें मंदिर, समाज और संस्कृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझना होगा।
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