
#जलडेगा #शिक्षा_बैठक : प्रखंड सभागार में आयोजित गुरुगोष्ठी में शिक्षा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।
सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड सभागार में मंगलवार को मासिक गुरुगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी मनमोहन कुमार गोस्वामी ने की। बैठक में शिक्षा विभाग से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की समीक्षा करते हुए शिक्षकों को कई आवश्यक निर्देश दिए गए। विशेष रूप से उल्लास कार्यक्रम, मध्याह्न भोजन योजना और ड्रॉपआउट बच्चों को पुनः विद्यालय से जोड़ने पर चर्चा हुई। बैठक में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।
- जलडेगा प्रखंड सभागार में मासिक गुरुगोष्ठी का आयोजन किया गया।
- बैठक की अध्यक्षता प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी मनमोहन कुमार गोस्वामी ने की।
- उल्लास कार्यक्रम के तहत नवसाक्षरों को 15 मार्च 2026 के मूल्यांकन में उपस्थित कराने का निर्देश।
- मध्याह्न भोजन योजना के एसएमएस को प्रतिदिन ऑनलाइन करने का निर्देश दिया गया।
- स्कूलों में ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान कर पुनः नामांकन कराने पर जोर।
सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को प्रखंड सभागार में मासिक गुरुगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी मनमोहन कुमार गोस्वामी ने की। बैठक में शिक्षा विभाग से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई और शिक्षकों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। इस दौरान शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
उल्लास कार्यक्रम के तहत नवसाक्षरों को मूल्यांकन में लाने का निर्देश
गुरुगोष्ठी के दौरान उल्लास कार्यक्रम को लेकर विशेष चर्चा की गई। प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी मनमोहन कुमार गोस्वामी ने शिक्षकों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने विद्यालयों के पोषक क्षेत्र से नवसाक्षरों को 15 मार्च 2026 को होने वाले मूल्यांकन में अनिवार्य रूप से उपस्थित कराएं।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम वयस्क शिक्षा को बढ़ावा देने और समाज के अधिक से अधिक लोगों को साक्षर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
मनमोहन कुमार गोस्वामी ने कहा: “उल्लास कार्यक्रम के अंतर्गत नवसाक्षरों की भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है। सभी शिक्षक अपने क्षेत्र के लोगों को प्रेरित करें ताकि वे मूल्यांकन में शामिल होकर साक्षरता अभियान को सफल बना सकें।”
मध्याह्न भोजन योजना की निगरानी पर जोर
बैठक में मध्याह्न भोजन योजना के संचालन को लेकर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने निर्देश दिया कि विद्यालयों में प्रतिदिन मध्याह्न भोजन से संबंधित एसएमएस को ऑनलाइन करना सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से योजना की निगरानी बेहतर ढंग से की जा सकेगी और बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और नियमितता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
मनमोहन कुमार गोस्वामी ने कहा: “मध्याह्न भोजन योजना बच्चों के पोषण और विद्यालय में उपस्थिति बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए इसकी नियमित निगरानी जरूरी है।”
ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान कर विद्यालय से जोड़ने का निर्देश
गुरुगोष्ठी में स्कूल छोड़ चुके बच्चों यानी ड्रॉपआउट बच्चों की समस्या पर भी गंभीरता से चर्चा की गई। अधिकारियों ने शिक्षकों को निर्देश दिया कि वे अपने क्षेत्र में ऐसे बच्चों की पहचान करें और उन्हें पुनः विद्यालय से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास करें।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षक की जिम्मेदारी है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
अधिकारियों ने कहा: “ड्रॉपआउट बच्चों को फिर से स्कूल से जोड़ना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि शिक्षा ही उनके भविष्य को बेहतर बना सकती है।”
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में नामांकन बढ़ाने पर चर्चा
बैठक के दौरान कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में छात्राओं के नामांकन बढ़ाने को लेकर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की अधिक से अधिक बालिकाओं को इस योजना का लाभ दिलाना जरूरी है।
शिक्षकों से अपील की गई कि वे अभिभावकों को जागरूक करें और बालिकाओं को विद्यालय में नामांकन के लिए प्रेरित करें।
शिक्षक और शिक्षा कर्मी रहे उपस्थित
इस गुरुगोष्ठी में शिक्षा विभाग से जुड़े कई शिक्षक और कर्मी उपस्थित रहे। बैठक में रॉबर्ट समद, राजेश कुमार, सत्यवान साहू, भरत महतो, विद्याधर सिंह, जयप्रकाश सिंह, भूपेंद्र बड़ाइक और शमीम अंसारी सहित अन्य शिक्षक और शिक्षा विभाग के कर्मचारी मौजूद थे।
बैठक में सभी शिक्षकों ने शिक्षा योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए मिलकर कार्य करने की बात कही।
न्यूज़ देखो: शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में जरूरी पहल
जलडेगा में आयोजित मासिक गुरुगोष्ठी यह दर्शाती है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नियमित समीक्षा और संवाद कितना जरूरी है। योजनाओं की सही निगरानी और शिक्षकों की सक्रिय भूमिका से ही सरकारी शिक्षा कार्यक्रमों का वास्तविक लाभ समाज तक पहुंच सकता है। खासकर ड्रॉपआउट बच्चों को फिर से स्कूल से जोड़ने और बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने जैसे प्रयास बेहद महत्वपूर्ण हैं। अब यह देखना होगा कि इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है।
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शिक्षा से ही बदलेगा समाज का भविष्य
जब शिक्षक, अभिभावक और समाज मिलकर शिक्षा के लिए काम करते हैं, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव होता है। हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार मिले और कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे, यह हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
यदि हम आज बच्चों को बेहतर शिक्षा देंगे, तो वही बच्चे कल समाज और देश के विकास की मजबूत नींव बनेंगे। इसलिए शिक्षा के प्रति जागरूकता और सहयोग बेहद जरूरी है।






