
#लातेहार #नक्सल_समर्पण : जेजेएमपी सब-जोनल कमांडर ने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
लातेहार में झारखंड जनमुक्ति परिषद के सब-जोनल कमांडर सुरेंद्र लोहरा उर्फ टाइगर ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पांच लाख रुपये के इनामी इस नक्सली ने पलामू आईजी शैलेंद्र कुमार सिन्हा और एसपी कुमार गौरव के सामने हथियार डाले। पुलिस अभियान और सरकार की नीति को इस सफलता का प्रमुख कारण बताया गया है।
- सुरेंद्र लोहरा उर्फ टाइगर ने किया आत्मसमर्पण।
- ₹5 लाख का इनामी नक्सली, 20 वर्षों से सक्रिय था।
- आत्मसमर्पण आईजी शैलेंद्र कुमार सिन्हा और एसपी कुमार गौरव के सामने।
- पुलिस के छापेमारी अभियान और नीति का पड़ा असर।
- पिछले डेढ़ वर्ष में 28 से अधिक नक्सलियों ने किया समर्पण।
लातेहार। झारखंड जनमुक्ति परिषद (जेजेएमपी) के सब-जोनल कमांडर सुरेंद्र लोहरा उर्फ टाइगर ने गुरुवार को लातेहार पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पांच लाख रुपये के इनामी इस नक्सली ने पलामू आईजी शैलेंद्र कुमार सिन्हा और लातेहार एसपी कुमार गौरव के सामने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
सुरेंद्र लोहरा लातेहार सदर थाना क्षेत्र के मांजर गांव का निवासी है और वह पिछले करीब 20 वर्षों से विभिन्न नक्सली संगठनों में सक्रिय था। आत्मसमर्पण के दौरान पुलिस अधिकारियों ने उसे माला पहनाकर स्वागत किया।
पुलिस अभियान का दिखा असर
लातेहार एसपी कुमार गौरव के नेतृत्व में पुलिस द्वारा लगातार नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा था। कई दिनों से चल रही छापेमारी और दबाव के कारण नक्सली संगठन कमजोर हो चुके थे।
इसी बीच झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण नीति की जानकारी मिलने के बाद सुरेंद्र लोहरा ने पुलिस से संपर्क किया।
पुलिस अधिकारियों ने उसे नीति के तहत मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी दी और भरोसा दिलाया कि आत्मसमर्पण के बाद उसे सभी लाभ दिए जाएंगे।
आईजी और एसपी का बयान
पलामू आईजी शैलेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा:
“झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण नीति का लाभ उठाकर बचे हुए नक्सली अपने जीवन को सुरक्षित बनाएं। लातेहार एसपी कुमार गौरव के डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में 28 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।”
उन्होंने अन्य नक्सलियों से भी अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट आएं।
वहीं लातेहार एसपी कुमार गौरव ने बताया:
“सुरेंद्र उर्फ टाइगर पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण नीति के तहत सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। लातेहार जिला अब नक्सलमुक्त होने के कगार पर है।”
उन्होंने कहा कि शेष नक्सलियों के पास आत्मसमर्पण के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
अधिकारियों की रही मौजूदगी
आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान डीएसपी विनोद रवानी, इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार, थाना प्रभारी कृष्ण पाल सिंह पवैया सहित बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और जवान उपस्थित रहे।
पुलिस का दावा है कि निरंतर अभियान और सरकारी नीति के कारण लातेहार जल्द ही पूरी तरह नक्सलमुक्त क्षेत्र बन सकता है।
न्यूज़ देखो: नीति और कार्रवाई का संयुक्त असर
नक्सल समस्या के समाधान में सख्त कार्रवाई के साथ पुनर्वास नीति की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। लातेहार में लगातार हो रहे आत्मसमर्पण इस बात का संकेत हैं कि दोनों रणनीतियां प्रभावी साबित हो रही हैं। क्या आने वाले समय में यह जिला पूरी तरह नक्सलमुक्त हो पाएगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मुख्यधारा में लौटना ही सुरक्षित भविष्य
हिंसा से किसी का भला नहीं होता, शांति ही स्थायी समाधान है।
सरकार की नीतियों का लाभ उठाकर जीवन को नई दिशा दी जा सकती है।
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