#बरवाडीह #पुल_निर्माण : डायवर्सन नहीं बनने से ग्रामीणों में दुर्घटना का डर बढ़ा।
बरवाडीह प्रखंड के बेतला पंचायत स्थित कुटमू–सरईडीह मुख्य मार्ग पर पुल निर्माण कार्य के दौरान डायवर्सन नहीं बनाए जाने से ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था की कमी के कारण राहगीरों और वाहन चालकों में दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। इस मार्ग से कई गांवों का प्रतिदिन संपर्क होता है, जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों ने लातेहार उपायुक्त से तत्काल हस्तक्षेप कर वैकल्पिक मार्ग बनवाने की मांग की है।
- कुटमू–सरईडीह मुख्य मार्ग पर पुल निर्माण के दौरान डायवर्सन नहीं बनाया गया।
- बड़का पुल स्थित शिव मंदिर के समीप राहगीरों को दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
- पोखरी कलां, पोखरी खुर्द और कुलसा पठान समेत कई गांवों के लोग इसी मार्ग पर निर्भर हैं।
- ग्रामीणों ने लातेहार उपायुक्त को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
- निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी से लोगों में नाराजगी बढ़ी।
- कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी।
बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत पंचायत बेतला के कुटमू–सरईडीह मुख्य मार्ग पर इन दिनों पुल निर्माण कार्य चल रहा है। बड़का पुल स्थित शिव मंदिर के समीप हो रहे इस निर्माण कार्य के कारण स्थानीय लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी द्वारा अब तक किसी प्रकार का डायवर्सन नहीं बनाया गया है, जिससे आम लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीर और वाहन चालक भय के माहौल में सफर करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई लोग दुर्घटना का शिकार होते-होते बच चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक प्रशासन या निर्माण एजेंसी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
प्रमुख संपर्क मार्ग होने से बढ़ी चिंता
ग्रामीणों ने बताया कि कुटमू–सरईडीह मार्ग क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इसी सड़क से होकर पोखरी कलां, पोखरी खुर्द, कुलसा पठान सहित दर्जनों गांवों के लोग प्रतिदिन आवाजाही करते हैं। ग्रामीणों के अनुसार यह सड़क न केवल गांवों को जोड़ती है, बल्कि बाजार, स्कूल, अस्पताल और सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने का भी मुख्य साधन है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर दिन इस मार्ग से छोटी-बड़ी गाड़ियों का आवागमन होता है। ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग नहीं बनाए जाने से लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ गई है। बारिश के मौसम में स्थिति और अधिक खतरनाक हो सकती है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप
ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि निर्माण स्थल के आसपास न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और न ही बैरिकेडिंग की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। रात के समय अंधेरे में वाहन चालकों को रास्ता समझने में भारी कठिनाई होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते उचित इंतजाम नहीं किए गए तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने बताया कि कई बाइक सवार और पैदल राहगीर असंतुलित होकर गिर चुके हैं। हालांकि अब तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई है, लेकिन खतरा लगातार बना हुआ है।
ग्रामीणों ने कहा: “जब तक पुल निर्माण कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक सुरक्षित डायवर्सन बनाना बेहद जरूरी है, ताकि लोगों की जान जोखिम में न पड़े।”
उपायुक्त को सौंपा गया मांग पत्र
ग्रामीणों ने लातेहार उपायुक्त को पत्र लिखकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में निर्माण स्थल पर अविलंब डायवर्सन निर्माण, पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और चेतावनी संकेत लगाने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को आम लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि निर्माण कार्य की नियमित निगरानी की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।
आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि यदि जल्द कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। लोगों का कहना है कि कई बार मौखिक शिकायत करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों का मानना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन लोगों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाना उचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन से संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द समाधान निकालने की अपील की है।
ग्रामीणों की बढ़ती परेशानी
स्थानीय लोगों के अनुसार पुल निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। स्कूली बच्चों, मरीजों और बुजुर्गों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार वाहन चालकों को लंबा चक्कर लगाकर दूसरे रास्तों से जाना पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क पर निर्माण सामग्री बिखरी रहने और रास्ता संकरा होने के कारण वाहनों का आवागमन जोखिम भरा हो गया है। खासकर रात के समय दुर्घटना की आशंका अधिक रहती है।
न्यूज़ देखो: विकास कार्यों में सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं?
किसी भी विकास कार्य का उद्देश्य लोगों को सुविधा देना होता है, लेकिन यदि निर्माण के दौरान ही लोगों की जान खतरे में पड़ जाए तो यह गंभीर चिंता का विषय बन जाता है। बरवाडीह के इस मामले ने निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की पोल खोल दी है। प्रशासन और निर्माण एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि विकास के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा भी प्राथमिकता में रहे। अब देखना होगा कि ग्रामीणों की मांग पर प्रशासन कितनी तेजी से कार्रवाई करता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सुरक्षित रास्ता हर नागरिक का अधिकार
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पुल जैसी परियोजनाएं विकास की पहचान होती हैं, लेकिन इन कार्यों में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। स्थानीय लोगों की समस्याओं को समय रहते सुनना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि छोटी लापरवाही को नजरअंदाज किया गया तो आगे बड़ी दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
अपने क्षेत्र की समस्याओं के प्रति जागरूक रहें और प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाएं। आपकी सक्रियता ही बदलाव की सबसे बड़ी ताकत है। इस खबर पर अपनी राय जरूर दें, इसे अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने में अपनी भागीदारी निभाएं।

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