#रांची #पेसा_नियमावली : राज्य में ग्राम स्वराज और अधिकार सशक्तिकरण की पहल।
रांची में आयोजित राज्य स्तरीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में पेसा नियमावली 2025 के शुभारंभ को लेकर चर्चा हुई। इस पहल में के. राजू और ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की सक्रिय भूमिका रही। कार्यक्रम में पंचायती राज विभाग के अधिकारियों की भागीदारी भी रही। यह पहल अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अधिकार देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
- रांची में पेसा नियमावली 2025 को लेकर राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित।
- के. राजू और दीपिका पांडेय सिंह की भूमिका प्रमुख।
- बी. राजेश्वरी और मनोज कुमार सहित अधिकारियों की भागीदारी।
- ग्राम सभाओं को जल, जंगल, जमीन पर अधिकार देने पर जोर।
- क्रियान्वयन की चुनौतियों पर भी गंभीर मंथन।
रांची में आयोजित राज्य स्तरीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस को लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। इस आयोजन में पेसा नियमावली 2025 के माध्यम से अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने पर जोर दिया गया। राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति ने इस पहल को व्यापक महत्व दिया।
पेसा: अधिकार का कागज़ नहीं, जीवन का आधार
पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) यानी PESA कानून का मूल उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को वास्तविक अधिकार देना है—जल, जंगल और जमीन पर समुदाय का स्वामित्व सुनिश्चित करना। हालांकि, 1996 से अब तक इसका प्रभावी क्रियान्वयन कई राज्यों में अधूरा ही रहा है। नियमावली का अभाव, विभागीय टकराव और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी इसके प्रमुख कारण रहे हैं।
ऐसे में झारखंड पेसा नियमावली 2025 का आगमन एक उम्मीद की किरण के रूप में देखा जा रहा है—एक ऐसा ढांचा, जो अधिकारों को स्पष्ट करने के साथ-साथ जवाबदेही भी तय कर सकता है।
नेतृत्व और नीति निर्माण का संकेत
इस पहल में के. राजू (प्रभारी, झारखंड प्रदेश कांग्रेस) और दीपिका पांडेय सिंह (ग्रामीण विकास मंत्री, झारखंड सरकार) की सक्रिय भूमिका यह संकेत देती है कि सरकार अब जमीनी स्तर पर संवाद और सहभागिता को प्राथमिकता दे रही है।
साथ ही, पंचायती राज विभाग के निदेशक बी. राजेश्वरी एवं सचिव मनोज कुमार की उपस्थिति ने इस प्रक्रिया को प्रशासनिक मजबूती प्रदान की।
चुनौतियाँ: कागज़ से ज़मीन तक
किसी भी नियमावली की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। पंचायत स्तर पर संसाधनों की कमी, प्रशासनिक समन्वय का अभाव और जागरूकता की कमी जैसी चुनौतियाँ अभी भी सामने हैं।
यदि ग्राम सभाओं को सशक्त बनाना है, तो केवल अधिकार देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें उन अधिकारों के उपयोग के लिए सक्षम बनाना भी उतना ही आवश्यक है। डिजिटल माध्यमों का उपयोग, सामाजिक अंकेक्षण और स्थानीय नेतृत्व का विकास इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
सामाजिक बदलाव की ओर बढ़ता कदम
रांची में आयोजित यह पहल केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का संकेत भी है। यह उस ग्राम स्वराज की दिशा में एक कदम माना जा रहा है, जिसकी परिकल्पना महात्मा गांधी ने की थी।
यह भी स्पष्ट होता है कि अब विकास की धारा को केवल ऊपर से नीचे नहीं, बल्कि नीचे से ऊपर की ओर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें ग्राम सभाओं की भूमिका केंद्रीय होगी।
न्यूज़ देखो: क्या पेसा बनेगा जमीनी बदलाव का असली आधार
पेसा नियमावली 2025 को झारखंड में सामाजिक न्याय और विकेंद्रीकरण की दिशा में एक अहम पहल माना जा सकता है। लेकिन असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन की होगी। क्या यह नियमावली वास्तव में ग्राम सभाओं को सशक्त बना पाएगी, या केवल कागजी पहल बनकर रह जाएगी—यह देखना महत्वपूर्ण होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अब ग्राम स्वराज को धरातल पर उतारने का समय
आज जरूरत है कि गांव-गांव तक इस नियमावली की जानकारी पहुंचे और लोग अपने अधिकारों को समझें। केवल नीतियां बनाने से बदलाव नहीं आता, बल्कि उन्हें लागू करना और समाज की भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी होता है।
यदि हर नागरिक जागरूक होकर अपनी भूमिका निभाए, तो यह पहल वास्तव में सामाजिक परिवर्तन का आधार बन सकती है।
आइए, अपने अधिकारों को जानें, उन्हें मजबूत करें और एक सशक्त समाज के निर्माण में अपनी भागीदारी निभाएं। अपनी राय कमेंट करें, खबर को साझा करें और जागरूकता फैलाएं।

