
#गुमला #सुरक्षित_इंटरनेट : डिजिटल युग में बढ़ते साइबर खतरों पर अधिकारियों और नागरिकों को किया गया जागरूक।
गुमला जिले में सुरक्षित इंटरनेट उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र गुमला में सुरक्षित इंटरनेट दिवस के अवसर पर एक विशेष जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला सूचना विज्ञान अधिकारी राधे गोविंद ठाकुर ने की। कार्यशाला में साइबर अपराधों के नए तरीकों, डिजिटल सुरक्षा और बचाव उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों के साथ-साथ आम नागरिकों को डिजिटल खतरों के प्रति सतर्क करना रहा।
- एनआईसी गुमला में सुरक्षित इंटरनेट दिवस पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित।
- डीआईओ राधे गोविंद ठाकुर ने की कार्यक्रम की अध्यक्षता।
- AI, डीपफेक और सोशल इंजीनियरिंग से जुड़े खतरों पर चर्चा।
- साइबर हेल्पलाइन 1930 और पोर्टल के प्रचार का संकल्प।
- पुलिस, CSC और साइबर सेल के समन्वय पर दिया गया जोर।
- ग्रामीण क्षेत्रों तक जागरूकता पहुंचाने की बनाई गई रणनीति।
डिजिटल युग में इंटरनेट का बढ़ता उपयोग जहां सुविधाएं प्रदान कर रहा है, वहीं साइबर अपराधों का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए गुमला में सुरक्षित इंटरनेट दिवस के अवसर पर यह विशेष कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और साइबर सुरक्षा से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
डिजिटल खतरों पर तकनीकी प्रस्तुति
कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में DRM (NIC गुमला) रामानंद महाराज ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि किस तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक तकनीक और सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर आम लोगों को ठगा जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज के समय में तकनीकी रूप से सतर्क रहना बेहद जरूरी हो गया है, क्योंकि साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं।
साइबर सुरक्षा में समन्वय की जरूरत
कार्यक्रम में उपस्थित साइबर सुरक्षा सेल के हेड निखिल आनंद ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समय पर सूचना और सही कार्रवाई से साइबर अपराधों को रोका जा सकता है।
वहीं सीएससी स्टेट हेड शंभू कुमार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित प्रज्ञा केंद्रों के माध्यम से साइबर सुरक्षा संबंधी जागरूकता को गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा, ताकि ग्रामीण नागरिक भी डिजिटल ठगी से सुरक्षित रह सकें।
गोपनीयता और मजबूत पासवर्ड पर जोर
कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे जिला सूचना विज्ञान अधिकारी राधे गोविंद ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा:
राधे गोविंद ठाकुर ने कहा: “इंटरनेट का उपयोग करते समय गोपनीयता सर्वोपरि है। नागरिकों को मजबूत पासवर्ड, नियमित पासवर्ड परिवर्तन और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसे सुरक्षा उपायों को अपनाना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि छोटी-सी लापरवाही भी बड़े आर्थिक और मानसिक नुकसान का कारण बन सकती है।
साइबर अपराध की तुरंत शिकायत का संदेश
कार्यक्रम के दौरान साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल के व्यापक प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया गया। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी या अपराध की स्थिति में तुरंत रिपोर्ट दर्ज कराना जरूरी है, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
न्यूज़ देखो: डिजिटल सशक्तिकरण के साथ सुरक्षा भी जरूरी
गुमला में आयोजित यह कार्यशाला बताती है कि प्रशासन डिजिटल सशक्तिकरण के साथ-साथ साइबर सुरक्षा को भी गंभीरता से ले रहा है। तकनीक का सही और सुरक्षित उपयोग ही डिजिटल इंडिया की सफलता की कुंजी है। अब आवश्यकता है कि आम नागरिक भी जागरूक बनें और साइबर सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाएं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सुरक्षित इंटरनेट, सुरक्षित भविष्य
आज इंटरनेट हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन सुरक्षा के बिना यह खतरा भी बन सकता है।
सजग रहें, जानकारी साझा करने से पहले सोचें और संदिग्ध लिंक से बचें।
साइबर अपराध होने पर चुप न रहें, तुरंत शिकायत दर्ज करें।
इस खबर को साझा करें, लोगों को जागरूक करें और सुरक्षित डिजिटल समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।







