विश्व पर्यावरण दिवस पर नावाडीह में चला हरित अभियान, पौधारोपण और सीड बॉल कार्यक्रम से दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश

विश्व पर्यावरण दिवस पर नावाडीह में चला हरित अभियान, पौधारोपण और सीड बॉल कार्यक्रम से दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश

author Akram Ansari
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#बरवाडीह #विश्वपर्यावरणदिवस : नावाडीह में पौधारोपण और सीड बॉल अभियान से पर्यावरण बचाने का संदेश दिया गया।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बरवाडीह प्रखंड के नावाडीह गांव में पौधारोपण एवं सीड बॉल अभियान चलाया गया। वाटरशेड ऑर्गेनाइजेशन ट्रस्ट (डब्ल्यूओटीआर) के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों, वसुंधरा सेवकों और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। अभियान के दौरान पर्यावरण संरक्षण, जल बचाव और वन्यजीव सुरक्षा को लेकर लोगों को जागरूक किया गया। कार्यक्रम में अधिक से अधिक पौधे लगाने और प्रकृति संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का संकल्प लिया गया।

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  • नावाडीह गांव में विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधारोपण एवं सीड बॉल अभियान आयोजित किया गया।
  • डब्ल्यूओटीआर एवं वसुंधरा सेवकों की पहल से विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए।
  • परती भूमि पर सीड बॉल छिड़काव कर हरियाली बढ़ाने का प्रयास किया गया।
  • मुखिया बलदेव परहिया ने जल, जंगल और जमीन बचाने का संदेश दिया।
  • ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण और अधिक पौधारोपण का सामूहिक संकल्प लिया।

बरवाडीह प्रखंड क्षेत्र में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। ग्राम नावाडीह स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर, पंचायत चुगरू में वाटरशेड ऑर्गेनाइजेशन ट्रस्ट (डब्ल्यूओटीआर) के तत्वावधान में पौधारोपण एवं सीड बॉल कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों, संस्था के सदस्यों, वसुंधरा सेवकों एवं ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस दौरान लोगों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व के साथ जल, जंगल और मिट्टी बचाने के प्रति जागरूक किया गया।

पौधारोपण और सीड बॉल अभियान से हरियाली बढ़ाने का प्रयास

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए। साथ ही बंजर एवं परती भूमि पर सीड बॉल का छिड़काव कर प्राकृतिक रूप से हरियाली बढ़ाने की पहल की गई। अभियान में शामिल लोगों ने कहा कि लगातार घटती हरियाली और बढ़ते पर्यावरणीय संकट को देखते हुए ऐसे कार्यक्रम समय की जरूरत बन चुके हैं।

सीड बॉल तकनीक के माध्यम से दूरस्थ एवं खाली भूमि पर भी पौधों के विकास की संभावना बढ़ती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रभावी मानी जा रही है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने पौधों की सुरक्षा एवं देखभाल का भी संकल्प लिया।

मुखिया बलदेव परहिया ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम की अध्यक्षता चुगरू पंचायत के मुखिया बलदेव परहिया ने की। उन्होंने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की।

मुखिया बलदेव परहिया ने कहा: “पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सभी का सामूहिक दायित्व है। यदि आज हम पेड़-पौधों और जल स्रोतों की रक्षा नहीं करेंगे तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा।”

उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने, जंगलों की सुरक्षा करने और जल संरक्षण के उपाय अपनाने की अपील की। साथ ही प्लास्टिक के कम उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी बल दिया।

ग्रामीणों और वसुंधरा सेवकों ने निभाई सक्रिय भूमिका

कार्यक्रम में संस्था के टीम सदस्यों एवं बरवाडीह प्रखंड के वसुंधरा सेवकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। अभियान में ग्रामीणों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर संस्था की संध्या, दिव्या, प्रदीप, अभिषेक सहित वसुंधरा सेवक सुरेंद्र, बिरेंद्र, उमाशंकर, सुमन, जितेंद्र, कालेश्वर, जितवाहन, जॉन तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान लोगों को बताया गया कि बढ़ता प्रदूषण, जल संकट और जंगलों की कटाई भविष्य के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। ऐसे में सामुदायिक भागीदारी से ही पर्यावरण संरक्षण संभव हो सकता है।

पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने पर जोर

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में लोगों ने पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने की आवश्यकता पर बल दिया। ग्रामीणों ने कहा कि गांव स्तर पर यदि हर परिवार साल में कम से कम एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे, तो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में बड़ी मदद मिल सकती है।

कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी महसूस किए जा रहे हैं। समय पर बारिश नहीं होना, बढ़ती गर्मी और जल स्रोतों का सूखना इसके उदाहरण हैं। ऐसे में वृक्षारोपण और जल संरक्षण जैसे प्रयास बेहद जरूरी हैं।

न्यूज़ देखो: पर्यावरण बचाने की मुहिम में ग्रामीणों की भागीदारी बनी मिसाल

नावाडीह में आयोजित यह कार्यक्रम केवल औपचारिक पौधारोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रभावी प्रयास बना। ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक भागीदारी के साथ चलाए जा रहे ऐसे अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक संकेत देते हैं। आज जरूरत केवल पौधे लगाने की नहीं, बल्कि उन्हें बचाने और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने की भी है। यदि समाज और प्रशासन मिलकर ऐसे प्रयास लगातार जारी रखें, तो आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती मिल सकती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

प्रकृति बचेगी तभी सुरक्षित रहेगा भविष्य

पेड़ केवल हरियाली नहीं देते, बल्कि जीवन, जल और स्वच्छ हवा का आधार होते हैं। आज पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आवश्यकता बन चुका है। यदि हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे और प्रकृति संरक्षण में योगदान दे, तो धरती को फिर से हरा-भरा बनाया जा सकता है।

आइए, इस विश्व पर्यावरण दिवस पर केवल संकल्प न लें, बल्कि उसे व्यवहार में भी उतारें। एक पौधा लगाएं, जल बचाएं और अपने आसपास स्वच्छ वातावरण बनाए रखें।
अपनी राय कमेंट में जरूर दें, इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें और पर्यावरण बचाने की मुहिम का हिस्सा बनें।

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Written by

बरवाडीह, लातेहार

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