अनाथ बच्चों को मिला नया जीवन सहारा, आर पी एस सेवा संस्थान ने पेश की मानवता की मिसाल

अनाथ बच्चों को मिला नया जीवन सहारा, आर पी एस सेवा संस्थान ने पेश की मानवता की मिसाल

author News देखो Team
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#महुआडांड़ #मानवता_पहल : तीन अनाथ बच्चों को आश्रय देकर शिक्षा और भविष्य का मार्ग खोला।

लातेहार जिले के महुआडांड़ क्षेत्र में आर पी एस सेवा संस्थान ने तीन अनाथ बच्चों को आश्रय देकर मानवीय पहल की मिसाल पेश की है। बच्चों के माता-पिता के निधन के बाद वे असहाय हो गए थे। संस्थान ने उन्हें शिक्षा, भोजन और देखभाल की जिम्मेदारी ली है। इस कदम से समाज में सकारात्मक संदेश गया है।

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  • मायापुर गांव (बारेसांड थाना क्षेत्र) के तीन अनाथ बच्चों को मिला सहारा।
  • राज दीप बिरजिया, अनु दीप बिरजिया, आशिक बिरजिया को संस्थान ने लिया संरक्षण में।
  • पिता की मृत्यु और मां के छोड़ने के बाद बच्चे हुए थे बेसहारा।
  • दादा लालसाय बिरजिया ने एक वर्ष तक किया पालन-पोषण।
  • आर पी एस सेवा संस्थान देगा शिक्षा, भोजन और आवास की सुविधा।
  • जयवंत यादव ने बच्चों की देखभाल का भरोसा दिलाया।

लातेहार जिले के महुआडांड़ क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश करती है। आर पी एस सेवा संस्थान ने तीन अनाथ बच्चों को अपने संरक्षण में लेकर उनके जीवन को नई दिशा देने का कार्य किया है। इस पहल ने न केवल तीन मासूमों को नया सहारा दिया है, बल्कि समाज में भी सकारात्मक संदेश फैलाया है।

दर्दनाक परिस्थिति में बेसहारा हुए बच्चे

जानकारी के अनुसार, बारेसांड थाना क्षेत्र के मायापुर गांव निवासी लालसाय बिरजिया के बेटे का बीमारी के कारण निधन हो गया। इस दुखद घटना के बाद बच्चों की मां भी उन्हें छोड़कर चली गई, जिससे तीनों बच्चे पूरी तरह असहाय हो गए।

इन बच्चों—राज दीप बिरजिया, अनु दीप बिरजिया और आशिक बिरजिया—का सहारा केवल उनके दादा ही बचे थे, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद लगभग एक वर्ष तक उनका पालन-पोषण किया।

लालसाय बिरजिया ने कहा: “मैंने अपनी पूरी कोशिश की, लेकिन अब मेरी उम्र और स्थिति मुझे बच्चों की देखभाल करने से रोक रही है।”

समाजसेवी की पहल से मिला नया रास्ता

बढ़ती उम्र और आर्थिक तंगी के कारण जब स्थिति और कठिन हो गई, तब मायापुर के मुखिया एवं समाजसेवी सुभाष सिंह ने परिवार को महुआडांड़ स्थित आर पी एस सेवा संस्थान के बारे में जानकारी दी।

यह संस्थान बेसहारा और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा, आवास और देखभाल की सुविधा प्रदान करता है। परिस्थिति को देखते हुए दादा ने अपने तीनों पौत्रों को संस्थान के सुपुर्द करने का निर्णय लिया।

सुभाष सिंह ने कहा: “इन बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है, इसलिए उन्हें सही जगह पहुंचाना जरूरी था।”

संस्थान ने बढ़ाया मदद का हाथ

आर पी एस सेवा संस्थान के प्रतिनिधि जयवंत यादव ने बताया कि बच्चों की स्थिति बेहद दयनीय थी, जिसे देखते हुए उन्हें तुरंत आश्रय दिया गया।

जयवंत यादव ने कहा: “संस्थान में बच्चों के रहने, खाने, शिक्षा और देखभाल की पूरी व्यवस्था की जाएगी, ताकि वे आगे चलकर आत्मनिर्भर बन सकें।”

संस्थान ने यह भी आश्वस्त किया कि बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाएगा, जिससे उनका भविष्य उज्ज्वल हो सके।

समाज में सराहना और प्रेरणा

इस मानवीय पहल की जानकारी मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों ने संस्थान की सराहना की। लोगों का कहना है कि ऐसे संस्थान समाज के कमजोर वर्ग के लिए उम्मीद की किरण होते हैं।

यह पहल न केवल तीन बच्चों के जीवन को संवारने का प्रयास है, बल्कि समाज को भी यह संदेश देती है कि जरूरतमंदों की मदद करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

न्यूज़ देखो: संवेदनशील समाज की पहचान ऐसी पहल से

महुआडांड़ की यह घटना दिखाती है कि समाज में आज भी इंसानियत जिंदा है। आर पी एस सेवा संस्थान का यह कदम न सिर्फ बच्चों के भविष्य को संवारने वाला है, बल्कि यह अन्य लोगों और संस्थाओं के लिए भी प्रेरणा है। सवाल यह भी है कि क्या ऐसे प्रयासों को और बड़े स्तर पर बढ़ाया जा सकता है ताकि कोई भी बच्चा बेसहारा न रहे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

इंसानियत जिंदा है एक कदम आपका भी बदल सकता है जीवन

किसी जरूरतमंद की मदद करना केवल दान नहीं, बल्कि मानवता का सबसे बड़ा धर्म है। ये तीन बच्चे आज सुरक्षित हैं क्योंकि किसी ने जिम्मेदारी ली।

आप भी अपने आसपास ऐसे बच्चों या जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आएं।
इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं, अपनी राय कमेंट में साझा करें और इंसानियत की इस पहल को आगे बढ़ाने में भागीदार बनें।

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