#सिसई #कौशल_विकास : जूट और बांस से हस्तशिल्प बनाकर स्वरोजगार की दिशा में पहल।
गुमला जिले के सिसई प्रखंड के सैंदा गांव में 35 दिवसीय जूट हैंडीक्राफ्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। नेशनल जूट बोर्ड और जन सहभागी विकास केंद्र के सहयोग से यह पहल की गई है। प्रशिक्षण में जूट और बांस से विभिन्न उत्पाद बनाना सिखाया जाएगा। इससे ग्रामीणों को रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
- सैंदा गांव (सिसई) में 35 दिवसीय जूट प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू।
- नेशनल जूट बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से आयोजन।
- बेसिक, एडवांस और डिजाइन तीन चरणों में प्रशिक्षण।
- जूट बैग, फाइल, बोतल बैग, स्कूल बैग बनाना सिखाया जाएगा।
- जूट और बांस को मिलाकर नए उत्पाद तैयार करने पर जोर।
- मिलन मंडल प्रशिक्षक के रूप में उपस्थित।
गुमला जिले के सिसई प्रखंड अंतर्गत सैंदा गांव में ग्रामीणों को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। नेशनल जूट बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से जन सहभागी विकास केंद्र द्वारा 35 दिवसीय जूट रिसोर्स कम प्रोडक्शन सेंटर प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य स्थानीय लोगों, खासकर ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को हस्तशिल्प निर्माण में दक्ष बनाकर आत्मनिर्भर बनाना है।
तीन चरणों में होगा प्रशिक्षण
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को तीन चरणों—बेसिक, एडवांस और डिजाइन—में विभाजित किया गया है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को जूट से विभिन्न प्रकार के उपयोगी उत्पाद बनाना सिखाया जाएगा।
प्रशिक्षक मिलन मंडल ने कहा: “जूट और बांस के संयोजन से बनाए गए उत्पाद बाजार में अच्छी मांग रखते हैं, जिससे ग्रामीणों को बेहतर आय मिल सकती है।”
प्रशिक्षण में जूट बैग, फाइल, बोतल बैग, स्कूल बैग और अन्य जूट हैंडीक्राफ्ट तैयार करने की विधि सिखाई जाएगी।
जूट और बांस का अनोखा संगम
सैंदा गांव में पहले भी बांस से बने उत्पादों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस बार जूट और बांस को मिलाकर नए प्रकार के उत्पाद बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे न केवल उत्पादों की विविधता बढ़ेगी, बल्कि उनकी बाजार में मांग भी बढ़ेगी।
संस्था के सचिव प्रमोद कुमार वर्मा ने कहा: “हमारा उद्देश्य है कि ग्रामीणों को स्थानीय संसाधनों के आधार पर स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जाए।”
इस पहल से ग्रामीणों को अपने गांव में ही रोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे पलायन की समस्या को भी कम करने में मदद मिलेगी।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्रामीणों की भागीदारी
प्रशिक्षण के उद्घाटन समारोह में ग्राम प्रधान जायसवाल उरांव, संस्था के सचिव प्रमोद कुमार वर्मा, कोषाध्यक्ष ज्योति सिंह, सीनियर प्रोग्राम मैनेजर मृत्युंजय चंद्र सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे।
ग्राम प्रधान जायसवाल उरांव ने कहा: “इस तरह के प्रशिक्षण से गांव के युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा।”
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया और उत्साह के साथ इस पहल का स्वागत किया।
स्वरोजगार की दिशा में बड़ा कदम
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जूट और बांस जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद तैयार किए जाएंगे, जिससे सतत विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

न्यूज़ देखो: कौशल विकास से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
सैंदा गांव में शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दिखाता है कि सही दिशा और संसाधन मिलने पर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं। जूट और बांस जैसे स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना एक सकारात्मक संकेत है। अब यह देखना होगा कि प्रशिक्षण के बाद कितने लोग इसे अपने व्यवसाय में बदल पाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
हुनर से आत्मनिर्भरता गांव से ही शुरू होता है विकास
जब गांव के लोग अपने हुनर से कमाने लगते हैं, तभी असली विकास संभव होता है। यह प्रशिक्षण सिर्फ सीखने का मौका नहीं, बल्कि जीवन बदलने का अवसर है।
आप भी अपने आसपास ऐसे प्रयासों को बढ़ावा दें और दूसरों को प्रेरित करें।
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