#गढ़वा #ट्रेजरी_घोटाला : विधायक ने चारा घोटाले से बड़ा बताते हुए जांच पर उठाए सवाल।
गढ़वा के बीजेपी विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने झारखंड में कथित ट्रेजरी घोटाले को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इसे चारा घोटाले से भी बड़ा बताते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। रमकंडा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने घोटाले की निष्पक्ष जांच और युवाओं, किसानों से जुड़े मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग की। यह बयान राज्य की सियासत में नई बहस को जन्म दे रहा है।
- विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने ट्रेजरी घोटाले को बताया चारा घोटाले से बड़ा।
- घोटाले की राशि 100 करोड़ से अधिक होने का किया दावा।
- वित्त विभाग और जांच प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल।
- छात्रवृत्ति, किसान भुगतान और बेरोजगारी मुद्दों पर सरकार को घेरा।
- शिक्षक भर्ती परीक्षा में देरी और भाषा विवाद को बताया बड़ी समस्या।
गढ़वा जिले में एक निजी कार्यक्रम के दौरान बीजेपी विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने झारखंड में सामने आए कथित ट्रेजरी घोटाले को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस मामले को चारा घोटाले से भी बड़ा बताते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। रमकंडा में आयोजित एक शादी समारोह में शामिल होने पहुंचे विधायक ने पत्रकारों से बातचीत में यह टिप्पणी की, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
ट्रेजरी घोटाले को बताया चारा घोटाले से बड़ा
विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने कहा कि झारखंड में कोषागार से जुड़े इस घोटाले की राशि 100 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस विभाग पर पूरे वित्तीय लेन-देन का जिम्मा है, वहीं इस तरह की गड़बड़ी कैसे हो सकती है।
सत्येंद्रनाथ तिवारी ने कहा: “झारखंड में हुआ ट्रेजरी घोटाला चारा घोटाले से भी बड़ा है। जब कोषागार में ही गड़बड़ी हो रही है, तो पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े होते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अब जांच की बात कर रही है, लेकिन नियमित निगरानी क्यों नहीं की गई, यह बड़ा सवाल है।
सरकार पर विकास और प्राथमिकताओं को लेकर हमला
विधायक ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर जहां मुख्यमंत्री अपने आवास पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिल रही, किसान अपनी फसल बेचने के बाद भी भुगतान के लिए भटक रहे हैं।
उन्होंने कहा: “आज झारखंड की स्थिति ऐसी हो गई है कि आम लोगों की बात सुनने वाला कोई नहीं है।”
शिक्षक भर्ती और युवाओं की समस्याएं
सत्येंद्रनाथ तिवारी ने राज्य के युवाओं की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि झारखंड के युवा पिछले 10 वर्षों से शिक्षक पात्रता परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। कई अभ्यर्थियों की उम्र सीमा भी समाप्त हो चुकी है, जिससे उनका भविष्य प्रभावित हुआ है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यदि सरकार की मंशा स्पष्ट होती, तो 2016 की नियमावली के आधार पर ही परीक्षा आयोजित कर 26 हजार रिक्त पदों को भरा जा सकता था।
भाषा विवाद पर भी उठाए सवाल
विधायक ने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में भाषा विवाद को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषा के चयन में भोजपुरी, मगही और हिंदी को शामिल नहीं किया गया, जबकि गढ़वा और पलामू क्षेत्र में ये भाषाएं व्यापक रूप से बोली जाती हैं।
उन्होंने कहा: “सरकार ने जानबूझकर नियमावली में ऐसे बदलाव किए, जिससे मामला अदालत तक पहुंचे और प्रक्रिया में देरी हो।”
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार दो वर्षों से ओबीसी छात्रों को छात्रवृत्ति देने में असफल रही है।
राज्यपाल से भी कर चुके हैं मुलाकात
विधायक ने कहा कि वे इन सभी मुद्दों को लेकर राज्यपाल से भी मुलाकात कर चुके हैं और छात्रों की समस्याओं को उनके समक्ष रखा है। हालांकि सरकार ने अब नियमावली को रद्द कर दिया है, लेकिन नई परीक्षा कब होगी, इस पर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
उन्होंने चिंता जताई कि कई छात्र अपनी आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद कड़ी मेहनत कर तैयारी कर रहे हैं, लेकिन अनिश्चितता के कारण उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है।
न्यूज़ देखो: आरोपों के बीच जवाबदेही तय होना जरूरी
ट्रेजरी घोटाले को लेकर विधायक का बयान राज्य में गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि वाकई वित्तीय अनियमितता हुई है, तो इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है। साथ ही, युवाओं, किसानों और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर भी सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए। क्या सरकार इन आरोपों पर ठोस कार्रवाई करेगी या यह मामला भी सियासी बयानबाजी तक सीमित रहेगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
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