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नगड़ी में रिम्स-2 परियोजना पर भड़का जनाक्रोश, रैयतों ने राज्यपाल से मिल कर भूमि अधिग्रहण पर जताई आपत्ति

#रांची #RIMS2_विवाद : कहा- “खेती की जमीन पर अस्पताल नहीं, हमारी जीविका को बचाइए”; राज्यपाल से की हस्तक्षेप की मांग
  • नगड़ी के रैयतों ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल संतोष गंगवार को सौंपा ज्ञापन
  • रैयतों ने कहा- यह उपजाऊ कृषि भूमि है, हमारी पीढ़ियों की आजीविका इससे जुड़ी है
  • रैयतों ने रिम्स-2 निर्माण हेतु भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाने की मांग की
  • राज्यपाल से की अपील- हमारी जमीन बचाएं, न्याय करें
  • शांति और संवैधानिक मर्यादा के साथ जताया विरोध, गांव की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर की दी जानकारी

रैयतों ने दी चेतावनी: “विकास के नाम पर जमीन लेना स्वीकार नहीं”

रांची: कांके अंचल के नगड़ी ग्राम में प्रस्तावित रिम्स-2 सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के निर्माण के लिए की जा रही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया का विरोध तेज हो गया है। शुक्रवार को गांव के रैयतों का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से राजभवन में मिला और उन्हें ज्ञापन सौंपते हुए अधिग्रहण पर आपत्ति दर्ज कराई।

“खेती की जमीन ही है जीवन का आधार”

रैयतों ने राज्यपाल से साफ कहा कि यह भूमि उपजाऊ कृषि भूमि है, जिस पर वर्षों से ग्रामीण खेती-किसानी कर जीवन-यापन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह भूमि अधिग्रहित कर ली गई, तो गांव की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी और किसान बेरोजगार हो जाएंगे।

संवैधानिक मर्यादा में जताया विरोध

शिष्टमंडल ने पूरी शांति और गरिमा के साथ अपनी बात राज्यपाल के समक्ष रखी और उनसे आग्रह किया कि वे राज्य सरकार को इस अधिग्रहण पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दें। उन्होंने कहा कि विकास का विरोध नहीं है, लेकिन विकास के नाम पर आजीविका छीनना अन्यायपूर्ण है।

रैयतों ने जताई न्याय की उम्मीद

राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में रैयतों ने भरोसा जताया कि राज्य का संवैधानिक मुखिया होने के नाते वे नगड़ी के किसानों की पीड़ा को समझेंगे और जनहित में संवेदनशील निर्णय लेंगे।

न्यूज़ देखो : विकास के साथ न्याय भी ज़रूरी

न्यूज़ देखो मानता है कि कोई भी विकास परियोजना जनभावनाओं और आजीविका की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। नगड़ी रैयतों की यह मांग आवाज़ उठाने की एक मिसाल है। जनसुनवाई और संवेदनशील संवाद ही लोकतंत्र की ताकत है।

हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नींव – खेती की जमीन, न छीनी जाए यह जड़

यदि उत्पादक भूमि को उद्योग या निर्माण परियोजनाओं में बदल दिया जाए, तो गांवों की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताना-बाना प्रभावित होता है। राज्य सरकार को चाहिए कि वैकल्पिक भूमि या समाधान पर विचार करे।

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