
#बरवाडीह #पशुधन_योजना : वितरण में अनियमितता के आरोप—लाभुकों ने जताया विरोध और जांच की मांग।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड में बकरा विकास योजना के तहत पशु वितरण में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। लाभुकों ने कम वजन और बीमार बकरियां मिलने की शिकायत की है। कई लोगों ने विरोध जताते हुए पशु वापस भी कर दिए। प्रशासन ने बीमा सुविधा का हवाला दिया है, जबकि मामले में जांच की मांग उठ रही है।
- मुख्यमंत्री पशुधन योजना के तहत बकरा वितरण में गड़बड़ी का आरोप।
- लाभुकों को कम वजन (5-7 किलो) के बकरे मिलने की शिकायत।
- कुछ पशु बीमार और कमजोर होने की भी बात सामने आई।
- नाराज लाभुकों ने पशु वापस कर विरोध जताया।
- प्रशासन ने बीमा सुविधा का दिया आश्वासन, जांच की मांग तेज।
बरवाडीह प्रखंड में मुख्यमंत्री पशुधन योजना के तहत चल रही बकरा विकास योजना अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। प्रखंड कार्यालय परिसर में शनिवार को लाभुकों के बीच बकरा-बकरी का वितरण किया गया, लेकिन वितरण के तुरंत बाद ही कई लाभुकों ने अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए।
लाभुकों का कहना है कि योजना के तहत मिलने वाले पशुओं की गुणवत्ता और वजन दोनों ही निर्धारित मानकों से काफी कम हैं, जिससे उन्हें लाभ के बजाय नुकसान होने की आशंका है।
कम वजन के बकरों को लेकर उठे सवाल
लाभुकों के अनुसार, उन्हें पहले बताया गया था कि प्रत्येक बकरे का वजन लगभग 10 से 15 किलोग्राम होगा। लेकिन जब वितरण हुआ, तो अधिकांश बकरियों का वजन महज 5 से 7 किलोग्राम के बीच पाया गया।
एक लाभुक ने कहा: “हमें जो बकरियां दी गई हैं, उनका वजन तय मानकों से बहुत कम है, इससे हमें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा।”
इस वजह से योजना की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
बीमार पशु मिलने से बढ़ी चिंता
कुछ लाभुकों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें बीमार और कमजोर बकरे दिए गए हैं। उनका कहना है कि ऐसे पशुओं को पालना उनके लिए आर्थिक रूप से नुकसानदायक हो सकता है।
नाराज लाभुकों ने मौके पर ही विरोध जताते हुए कुछ पशुओं को वापस कर दिया और विभागीय अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई।
अधिकारियों ने दी सफाई
वितरण स्थल पर मौजूद अधिकारियों ने अपनी सफाई में कहा कि सभी पशुओं का बीमा (इंश्योरेंस) कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि यदि किसी कारणवश बकरियों की मृत्यु हो जाती है, तो लाभुकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत बीमा का लाभ दिया जाएगा।
अधिकारियों ने कहा: “लाभुकों को किसी भी प्रकार की हानि नहीं होगी, बीमा के माध्यम से उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाएगी।”
बीमा पर भी उठे सवाल
हालांकि, लाभुकों का आरोप है कि बीमा के नाम पर गड़बड़ी को छिपाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि यदि शुरुआत में ही स्वस्थ और मानक के अनुसार पशु दिए जाते, तो बीमा की जरूरत ही नहीं पड़ती।
इस पूरे मामले को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और लाभुकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों या आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
उनका कहना है कि योजना का उद्देश्य गरीबों को आत्मनिर्भर बनाना है, लेकिन इस तरह की अनियमितताएं योजना की मंशा पर सवाल खड़ा करती हैं।
योजना की विश्वसनीयता पर असर
इस घटना ने न केवल योजना की विश्वसनीयता को प्रभावित किया है, बल्कि लाभुकों के भरोसे को भी कमजोर किया है। यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में लोग सरकारी योजनाओं पर विश्वास खो सकते हैं।
न्यूज़ देखो: योजना का लाभ या नुकसान—जांच जरूरी
बरवाडीह में सामने आया यह मामला सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की सच्चाई को उजागर करता है। यदि लाभुकों को मानक के अनुरूप सामग्री नहीं मिलती, तो योजना का उद्देश्य ही विफल हो जाता है। प्रशासन को चाहिए कि इस मामले में पारदर्शी जांच कर दोषियों को जवाबदेह ठहराए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अधिकारों के लिए जागरूक बनें
सरकारी योजनाएं आम जनता के हित के लिए होती हैं, लेकिन उनका सही लाभ तभी मिलता है जब हम जागरूक रहते हैं।
अगर कहीं भी अनियमितता दिखे, तो उसके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है।
आपकी एक पहल कई लोगों को न्याय दिला सकती है।
जागरूक नागरिक ही मजबूत समाज का आधार होते हैं।
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