#पलामू #निर्माण_विवाद : डाली पंचायत में विद्यालय भवन निर्माण में अनियमितता के आरोप पर ग्रामीणों का विरोध बढ़ा।
पलामू जिले के छतरपुर प्रखंड अंतर्गत डाली पंचायत में बन रहे प्लस टू विद्यालय भवन निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने निर्माण में घटिया सामग्री और अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए हैं। भवन में पानी रिसाव और संरचना में खामियां सामने आने से चिंता बढ़ी है। ग्रामीणों ने जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
- डाली पंचायत, छतरपुर (पलामू) में विद्यालय भवन निर्माण पर विवाद।
- संवेदक लबली गुप्ता पर घटिया सामग्री उपयोग का आरोप।
- छत से पानी रिसाव और टेढ़े बीम की शिकायत।
- शहाबुद्दीन अंसारी, संजीव कुमार रंजन ने उठाए सवाल।
- ग्रामीणों ने जांच और कार्रवाई की मांग की।
- अधिकारियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।
पलामू जिले के छतरपुर प्रखंड स्थित डाली पंचायत में निर्माणाधीन प्लस टू विद्यालय भवन को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। आरोप है कि सरकारी भवन निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताएं बरती जा रही हैं और घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे भवन की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
निर्माण कार्य पर उठे गंभीर सवाल
जानकारी के अनुसार, इस विद्यालय भवन का निर्माण टेंडर प्रक्रिया के तहत संवेदक लबली गुप्ता द्वारा कराया जा रहा है। हालांकि भवन अभी पूरी तरह तैयार भी नहीं हुआ है, इसके बावजूद छत से पानी का रिसाव शुरू हो चुका है।
ग्रामीणों का कहना है कि बीम (बिम्ब) भी टेढ़े-मेढ़े बनाए गए हैं, जिससे भवन की मजबूती पर गंभीर संदेह उत्पन्न हो गया है।
जनप्रतिनिधियों ने भी जताई नाराजगी
पंचायत समिति सदस्य शहाबुद्दीन अंसारी ने निर्माण कार्य में भारी अनियमितता का आरोप लगाते हुए कहा:
शहाबुद्दीन अंसारी ने कहा: “निर्माण में निम्न गुणवत्ता का सीमेंट, मिट्टी युक्त बालू और कमजोर ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है।”
उन्होंने यह भी कहा कि प्रयोग में लाई जा रही सामग्री सामान्य निर्माण कार्य के लिए भी उपयुक्त नहीं है।
वहीं वार्ड संख्या 5 के सदस्य संजीव कुमार रंजन ने बताया कि निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से ही शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन अब तक कोई सुधार नहीं हुआ है।
ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीण बबन राम और त्रिवेणी राम सहित अन्य लोगों ने भी निर्माण कार्य को बेहद घटिया बताते हुए कहा कि एक ही प्रकार के खराब सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है, जो जमकर पत्थर जैसा हो चुका है।
ग्रामीणों के अनुसार, भवन का एक हिस्सा पहले ही ढह चुका है, जिसे जल्दबाजी में ढककर काम जारी रखा गया है।
शिकायतों पर नहीं हुई कार्रवाई
ग्रामीणों का आरोप है कि मामले की जानकारी भवन विभाग के जेई अतुल कुमार और संबंधित जनप्रतिनिधियों को दी गई, लेकिन किसी ने इस पर गंभीरता नहीं दिखाई।
इसके अलावा एक व्यक्ति द्वारा खुद को सह-संवेदक बताते हुए शिकायतों को नजरअंदाज करने और निर्माण कार्य को सही ठहराने की भी बात सामने आई है।
जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच डीपीआर (DPR) के अनुसार कराई जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने कहा: “यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो हम न्यायालय का सहारा लेने को मजबूर होंगे।”
अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल
फिलहाल इस मामले में संवेदक या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे ग्रामीणों की नाराजगी और बढ़ती जा रही है।
यह मामला अब प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
न्यूज़ देखो: विकास कार्यों में गुणवत्ता पर सवाल
डाली पंचायत का यह मामला दर्शाता है कि विकास कार्यों में गुणवत्ता और निगरानी की कमी अब भी बड़ी समस्या बनी हुई है। सरकारी भवनों में अनियमितता न केवल संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा से भी खिलवाड़ है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
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